पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में न्यूज़18 उभरता भारत शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने नेटवर्क18 के प्रति आभार व्यक्त किया, जिसने उन्हें इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत और दुनिया भर के प्रतिष्ठित अतिथियों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने इस वर्ष के शिखर सम्मेलन में भारत के युवाओं की आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करने की सराहना की। इस वर्ष की शुरुआत में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं के सपनों, दृढ़ संकल्प और जुनून का उल्लेख किया। उन्होंने 2047 तक भारत की प्रगति के रोडमैप पर जोर देते हुए कहा कि हर कदम पर निरंतर विचार-विमर्श से बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि ये अंतर्दृष्टि अमृत काल की पीढ़ी को ऊर्जा, मार्गदर्शन और गति प्रदान करेगी। उन्होंने शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए अपनी बधाई और शुभकामनाएं दीं।
श्री मोदी ने कहा, “दुनिया की नजर भारत पर है और दुनिया की उम्मीदें भी भारत से हैं।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ ही वर्षों में भारत 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “अनेक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत दोगुनी गति से आगे बढ़ा है और केवल एक दशक में अपनी अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना कर लिया है।” उन्होंने कहा कि जो लोग कभी मानते थे कि भारत धीरे-धीरे और लगातार प्रगति करेगा, वे अब एक ‘तेज और निडर भारत’ देख रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व वृद्धि भारतीय युवाओं की महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं से प्रेरित है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं को संबोधित करना अब एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यानि 8 अप्रैल, 2025 को साल के पहले 100 दिन पूरे होने वाले हैं। इस दौरान लिए गए फैसले भारत के युवाओं की आकांक्षाओं को दर्शाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “ये 100 दिन सिर्फ फैसले लेने के नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखने के भी थे।” उन्होंने कहा कि नीतियों को संभावनाओं के मार्ग में बदल दिया गया है। उन्होंने युवा पेशेवरों और उद्यमियों को लाभ पहुंचाने वाली 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर सहित प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने 10,000 नई मेडिकल सीटों और 6,500 नई आईआईटी सीटों को जोड़ने का उल्लेख किया, जो शिक्षा के विस्तार और नवाचार की तेजी को दर्शाता है। श्री मोदी ने 50,000 नई अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना का भी उल्लेख किया, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि नवाचार देश के हर कोने तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ये लैब, नवाचार की एक श्रृंखला प्रतिक्रिया को प्रज्वलित करेंगे। एआई और कौशल विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्रों के निर्माण पर प्रकाश डालते हुए, जो युवाओं को भविष्य के लिए तैयार होने के अवसर प्रदान करते हैं, श्री मोदी ने विचार से लेकर प्रभाव तक की यात्रा को सरल बनाने के लिए 10,000 नए पीएम रिसर्च फेलोशिप की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला गया था, उसी तरह अब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी खोला जाएगा, जिससे सीमाएं हटेंगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने संविदा अर्थव्यवस्था (गिग इकॉनमी) में कार्यरत युवाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा की शुरुआत का उल्लेख किया, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि जिनपर पहले ध्यान नहीं दिया जाता था, वे अब नीतियों के केंद्र में होंगे। उन्होंने एससी/एसटी और महिला उद्यमियों के लिए 2 करोड़ रुपये तक के सावधि ऋण पर भी प्रकाश डाला तथा इस बात पर जोर दिया कि समावेशिता अब सिर्फ वादा नहीं है, बल्कि एक नीति है। उन्होंने कहा कि इन फैसलों से भारत के युवाओं को सीधा फायदा होगा, क्योंकि राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की प्रगति से जुड़ी होती है।
श्री मोदी ने कहा, “पिछले 100 दिनों की उपलब्धियां दर्शाती हैं कि भारत अपनी प्रगति में अजेय, अटल और अविचल है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस अवधि के दौरान, भारत उपग्रह डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमताओं को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। उन्होंने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के सफल परीक्षण और 100 गीगावाट सौर क्षमता को पार करने की उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने 1,000 मिलियन टन के रिकॉर्ड कोयला उत्पादन और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के शुभारंभ पर भी जोर दिया। श्री मोदी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की स्थापना और किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी में वृद्धि के निर्णय का भी उल्लेख किया, जिससे किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्राथमिकता रेखांकित होती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में 3 लाख से अधिक परिवारों के लिए सामूहिक गृह प्रवेश समारोह और स्वामित्व योजना के तहत 65 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड के वितरण पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि इन 100 दिनों में, दुनिया की सबसे ऊंची सुरंगों में से एक, सोनमर्ग सुरंग, राष्ट्र को समर्पित की गई। उन्होंने भारतीय नौसेना की ताकत में आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाग्शीर को शामिल करने का उल्लेख किया। उन्होंने सेना के लिए ‘मेड इन इंडिया’ हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दिए जाने का भी हवाला दिया। उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक के पारित होने को सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये 100 दिन सिर्फ 100 निर्णयों की नहीं, बल्कि 100 संकल्पों की पूर्ति का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “कार्य-निष्पादन का यह मंत्र उभरते भारत के पीछे की असली ऊर्जा है।” उन्होंने हाल ही में रामेश्वरम की अपनी यात्रा के बारे में बताया, जहां उन्हें ऐतिहासिक पंबन पुल का उद्घाटन करने का अवसर मिला था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि 125 साल पहले अंग्रेजों ने वहां एक पुल बनाया था, जिसने इतिहास देखा, तूफानों को झेला और चक्रवात से काफी नुकसान भी हुआ। जनता की सालों की मांग के बावजूद पिछली सरकारें कार्रवाई करने में विफल रहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में ही नए पंबन पुल पर काम शुरू हुआ और अब देश के पास अपना पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल- समुद्र पुल है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि परियोजनाओं में देरी से देश की प्रगति बाधित होती है, जबकि प्रदर्शन और त्वरित कार्रवाई से विकास को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, “देरी विकास का दुश्मन है और हमारी सरकार इस दुश्मन को हराने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने असम के बोगीबील पुल का उदाहरण दिया, जिसकी आधारशिला 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा ने रखी थी और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। हालांकि, बाद की सरकारों के तहत यह परियोजना रुकी रही, जिससे अरुणाचल प्रदेश और असम के लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि उनकी सरकार ने 2014 में इस परियोजना को फिर से शुरू किया और इसे चार साल के भीतर, 2018 में पूरा किया। उन्होंने केरल की कोल्लम बाईपास रोड परियोजना का भी उल्लेख किया, जो 1972 से लंबित थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इस पर 50 साल तक काम किया, जबकि उनकी सरकार के तहत यह परियोजना पाँच साल के भीतर पूरी हो गई।
श्री मोदी ने कहा कि नवी मुंबई हवाई अड्डे पर चर्चा 1997 में शुरू हुई और इसे 2007 में मंजूरी मिली। हालांकि, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने इस परियोजना में तेजी लाई और वह दिन दूर नहीं जब नवी मुंबई हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानें शुरू होंगी।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर 8 अप्रैल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले, गारंटी देने वाले के बिना बैंक खाता खोलना भी एक चुनौती थी और बैंक ऋण सामान्य परिवारों के लिए एक दूर का सपना था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुद्रा योजना ने एससी/एसटी, ओबीसी, भूमिहीन मजदूरों और महिलाओं सहित वंचित समूहों की आकांक्षाओं को संबोधित किया, जिनके पास अपनी कड़ी मेहनत के अलावा गिरवी रखने के लिए कुछ नहीं था। यह सवाल करते हुए कि क्या उनके सपने, आकांक्षाएं और प्रयास किसी भी तरह से कम मूल्यवान थे, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले एक दशक में मुद्रा योजना के तहत बिना किसी गारंटी के 52 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं। उन्होंने योजना के उल्लेखनीय पैमाने और गति का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रैफिक लाइट के हरे होने में लगने वाले समय में 100 मुद्रा ऋण स्वीकृत हो जाते हैं, दांत साफ करने में लगने वाले समय में 200 ऋण स्वीकृत हो जाते हैं और रेडियो पर पसंदीदा गीत सुनने की अवधि में 400 ऋण स्वीकृत हो जाते हैं। उन्होंने आगे टिप्पणी की कि एक त्वरित डिलीवरी ऐप को एक ऑर्डर पूरा करने में लगने वाले समय में 1,000 मुद्रा ऋण स्वीकृत हो जाते हैं। इसी तरह, जब तक कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक एपिसोड खत्म करता है, तब तक 5,000 मुद्रा व्यवसाय स्थापित हो जाते हैं।
श्री मोदी ने कहा, “मुद्रा योजना में गारंटी की मांग नहीं की गई, बल्कि लोगों पर भरोसा जताया गया”, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस योजना ने 11 करोड़ व्यक्तियों को पहली बार स्वरोजगार के लिए ऋण प्राप्त करने में सक्षम बनाया है, जिससे वे पहली बार उद्यमी बन गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले एक दशक में मुद्रा योजना के माध्यम से 11 करोड़ सपनों को पंख लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 33 लाख करोड़ रुपये संवितरित किए गए हैं, जो गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचे हैं – यह आंकड़ा कई देशों के सकल घरेलू उत्पाद से भी अधिक है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह केवल सूक्ष्म वित्तपोषण नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर एक बड़ा परिवर्तन है।”
आकांक्षी जिलों और प्रखंडों के परिवर्तनकारी उदाहरण पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि पिछली सरकारों ने 100 से अधिक जिलों को पिछड़ा घोषित किया था और उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया था, जिनमें से कई पूर्वोत्तर और आदिवासी क्षेत्रों में थे। इन जिलों में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को तैनात करने के बजाय, अधिकारियों को सजा के तौर पर वहां भेजा गया, जो “पिछड़े” क्षेत्रों को गतिहीन बनाए रखने की पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इन क्षेत्रों को आकांक्षी जिलों के रूप में नामित करके इस दृष्टिकोण को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में प्रशासन को प्राथमिकता दी गई, प्रमुख योजनाओं को मिशन मोड में लागू किया गया और विकास की विभिन्न मापदंडों पर निगरानी की गई। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ये आकांक्षी जिले अब प्रदर्शन में कई राज्यों और राष्ट्रीय औसत से आगे निकल गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को सबसे अधिक लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि इन जिलों के युवा अब आत्मविश्वास से कहते हैं, “हम भी हासिल कर सकते हैं, हम भी प्रगति कर सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम को प्रतिष्ठित संस्थानों और पत्रिकाओं से वैश्विक मान्यता मिली है। इसकी सफलता से प्रेरित होकर सरकार अब 500 आकांक्षी प्रखंडों पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “आकांक्षाओं से प्रेरित विकास समावेशी और सतत दोनों होते हैं।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र के तेजी से विकास के लिए शांति, स्थिरता और सुरक्षा की भावना आवश्यक होती है, उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के निडर और आत्मविश्वासी मन के विज़न को उद्धृत किया, “जहां मन भय मुक्त हो और सिर ऊंचा हो।” उन्होंने कहा कि दशकों से भारत में भय, आतंक और हिंसा का माहौल रहा है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान युवाओं को हुआ है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जम्मू-कश्मीर में युवाओं की कई पीढ़ियाँ बमबारी, गोलीबारी और पत्थरबाजी में खत्म हो गईं, जबकि पिछली सरकारों में इस आग को बुझाने का साहस नहीं था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता ने जम्मू-कश्मीर में स्थिति को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर के युवा विकास में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
पूर्वोत्तर में नक्सलवाद से निपटने और शांति को बढ़ावा देने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय 125 से अधिक जिले हिंसा की चपेट में थे और सरकार की सीमाएं प्रभावी रूप से वहीं समाप्त हो जाती थीं, जहां से नक्सलवाद शुरू होता था। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नक्सलवाद के शिकार थे। उन्होंने इन युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए अपनी सरकार के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में 8,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अब 20 से भी कम हो गई है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर ने भी दशकों तक अलगाववाद और हिंसा को झेला है। पिछले 10 वर्षों में उनकी सरकार ने 10 शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 10,000 से अधिक युवा हथियार छोड़कर विकास के मार्ग पर चल पड़े हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलता न केवल हजारों युवाओं द्वारा हथियार छोड़ने में, बल्कि उनके वर्तमान और भविष्य को बचाने में भी निहित है।
श्री मोदी ने कहा कि दशकों से राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने के बजाय राजनीतिक कालीन के नीचे दबा दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब ऐसे मुद्दों का सामना करने का समय है और 21वीं सदी की पीढ़ियों पर 20वीं सदी की राजनीतिक गलतियों का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि तुष्टीकरण की राजनीति भारत के विकास के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। वक्फ से संबंधित कानूनों में हाल ही में किए गए संशोधन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वक्फ को लेकर बहस तुष्टीकरण की राजनीति से उपजी है, जो कोई नई घटना नहीं है। उन्होंने कहा, “भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तुष्टीकरण के बीज बोए गए थे।” उन्होंने सवाल किया कि स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले अन्य देशों के विपरीत भारत को स्वतंत्रता की शर्त के रूप में विभाजन का सामना क्यों करना पड़ा। उन्होंने इसके लिए उस समय राष्ट्रीय हित पर सत्ता को प्राथमिकता देने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अलग राष्ट्र का विचार आम मुस्लिम परिवारों की आकांक्षाओं में निहित नहीं था, बल्कि कुछ अतिवादियों द्वारा प्रचारित किया गया था, जिन्हें सत्ता पर अपना दावा सुरक्षित करने के लिए कुछ कांग्रेस नेताओं का समर्थन प्राप्त था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति ने कांग्रेस को सत्ता और कुछ अतिवादी नेताओं को ताकत और धन दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आम मुसलमान को बदले में क्या मिला। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि गरीब और हाशिए पर पड़े मुसलमानों को उपेक्षा, निरक्षरता और बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिम महिलाओं को अन्याय का सामना करना पड़ा, उन्होंने शाह बानो मामले का हवाला दिया जहां उनके संवैधानिक अधिकारों को तुष्टिकरण के लिए बलिदान कर दिया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को चुप करा दिया गया और उन पर सवाल न उठाने का दबाव डाला गया, जबकि अतिवादियों को उनके अधिकारों को दबाने की खुली छूट दी गई।
श्री मोदी ने कहा, “तुष्टिकरण की राजनीति भारत में सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा के खिलाफ है।” उन्होंने कुछ दलों द्वारा इसे वोट बैंक राजनीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम में 2013 का संशोधन अतिवादी तत्वों और भू-माफियाओं को खुश करने का एक प्रयास था। उन्होंने कहा कि इस संशोधन ने संविधान से ऊपर होने का भ्रम पैदा किया, जिससे संविधान द्वारा खोले गए न्याय के रास्ते ही सीमित हो गए। उन्होंने इस संशोधन के दुष्परिणामों पर जोर दिया, जिसने अतिवादियों और भू-माफियाओं का हौसला बढ़ा। उन्होंने केरल में ईसाई समुदाय की जमीनों पर वक्फ के दावों, हरियाणा में गुरुद्वारा की जमीनों पर विवाद और कर्नाटक में किसानों की जमीनों पर दावों जैसे उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पूरे गांव और राज्यों में हजारों हेक्टेयर जमीन अब एनओसी और कानूनी पेचीदगियों में उलझी हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा चाहे मंदिर हो, चर्च हो, गुरुद्वारा हो, खेत हो या सरकारी जमीन हो, लोगों का अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक बनाए रखने का भरोसा खत्म हो गया है। एक नोटिस से लोगों को अपने घरों और खेतों पर मालिकाना हक साबित करने में दस्तावेजों के लिए परेशान होना पड़ेगा। उन्होंने ऐसे कानून की प्रकृति पर सवाल उठाया, जिसका उद्देश्य न्याय प्रदान करना था, लेकिन यह भय का कारण बन गया।
मुस्लिम समुदाय सहित सभी समुदायों के हितों की रक्षा करने वाले एक उल्लेखनीय कानून को लागू करने के लिए संसद को बधाई देते हुए, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि अब वक्फ की पवित्रता को संरक्षित किया जाएगा और वंचित मुसलमानों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वक्फ विधेयक पर बहस भारत के संसदीय इतिहास में दूसरी सबसे लंबी चर्चा थी, जिसके लिए दोनों सदनों में 16 घंटे की चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति ने 38 बैठकें कीं और 128 घंटे विचार-विमर्श किया। इसके अतिरिक्त, देश भर से लगभग एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव प्राप्त हुए। उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि भारत में लोकतंत्र अब केवल संसद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जन भागीदारी के माध्यम से मजबूत हो रहा है।”
श्री मोदी ने कला, संगीत, संस्कृति और रचनात्मकता पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर जोर दिया – ऐसे तत्व जो मनुष्यों को मशीनों से अलग करते हैं। चूँकि, दुनिया प्रौद्योगिकी और एआई में तेजी से आगे बढ़ रही है, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मनोरंजन मनोरंजन सबसे बड़े वैश्विक उद्योगों में से एक है और इसका और विस्तार होने वाला है। उन्होंने कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने और उसका जश्न मनाने के लिए एक वैश्विक मंच वेव्स (विश्व दृश्य-श्रव्य और मनोरंजन शिखर सम्मेलन) के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वेव्स के लिए एक बड़ा आयोजन मई 2025 में मुंबई में होगा। उन्होंने भारत के जीवंत और रचनात्मक उद्योगों के बारे में बात की, जिसमें फिल्में, पॉडकास्ट, गेमिंग, संगीत, ए आर और वी आर शामिल हैं। उन्होंने “क्रिएट इन इंडिया” पहल पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य इन उद्योगों को अगले स्तर पर ले जाना है। उन्होंने कहा कि वेव्स भारतीय कलाकारों को कंटेंट बनाने और इसे वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित करेगा, साथ ही दुनिया भर के कलाकारों को भारत में सहयोग करने के लिए आमंत्रित करेगा। प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री ने नेटवर्क 18 से वेव्स प्लेटफॉर्म को लोकप्रिय बनाने का आग्रह किया और रचनात्मक क्षेत्रों के युवा पेशेवरों को इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने जोर देकर कहा, ” वेव्स को हर घर और हर दिल तक पहुंचना चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से देश के युवाओं की रचनात्मकता, विचारों और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करने के लिए नेटवर्क 18 की सराहना की। उन्होंने युवाओं को जोड़ने, उन्हें राष्ट्रीय चुनौतियों के बारे में सोचने, सुझाव देने और समाधान खोजने के संदर्भ में प्रोत्साहित करने के लिए मंच की सराहना की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिखर सम्मेलन ने युवाओं को केवल श्रोता से परिवर्तित करके बदलाव में सक्रिय भागीदार बना दिया है। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शोध संस्थानों से इस शिखर सम्मेलन के जुड़ाव को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। शिखर सम्मेलन केवल एक आयोजन न होकर एक स्थायी प्रभाव बन जाए, इसे सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अंतर्दृष्टि और सुझावों के दस्तावेजीकरण, अध्ययन और गति देने करने के महत्व पर जोर दिया, जिससे इन्हें नीति निर्माण में शामिल किया जा सके। उन्होंने टिप्पणी की कि युवाओं का उत्साह, विचार और भागीदारी भारत के विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के पीछे की प्रेरक शक्ति है। उन्होंने शिखर सम्मेलन से जुड़े सभी लोगों, विशेष रूप से युवा प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।
प्रधानमंत्री ने ‘समाधान’ दस्तावेज का भी अनावरण किया, जो वायु प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, नदियों की सफाई, सभी के लिए शिक्षा और भारत की सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने जैसी चुनौतियों पर भारत भर के चयनित युवाओं और कॉलेजों द्वारा विकसित समाधानों और अवधारणाओं का एक संग्रह है।
Addressing the #RisingBharatSummit2025. Do watch. @CNNnews18 https://t.co/Y2AADRZP2k
— Narendra Modi (@narendramodi) April 8, 2025
The world’s eyes are on India. So are its expectations. pic.twitter.com/swrVsLVlJA
— PMO India (@PMOIndia) April 8, 2025
India has sprinted ahead at double the speed, doubling the size of its economy in just one decade. pic.twitter.com/WEFEAYJOD3
— PMO India (@PMOIndia) April 8, 2025
Fast and Fearless India. pic.twitter.com/apfvglfe8C
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Delay is the enemy of development. pic.twitter.com/xfj3aFBexa
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When growth is driven by aspirations, it becomes inclusive and sustainable. pic.twitter.com/XCsuLmH0eS
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Ensuring dignity for all, especially the marginalised. pic.twitter.com/jSuaCwMZdB
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WAVES will empower Indian artists to create and take their content to the global stage. pic.twitter.com/RzMfoKGUjZ
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Delay is the enemy of development!
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And, India is comprehensively defeating this culture of delays in all sectors. pic.twitter.com/etGFsaUViF
Mudra Yojana is not just micro-finance, it is a mega transformation at the grassroots. #10YearsOfMUDRA pic.twitter.com/imZHJpAxRu
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We are building an India where peace, stability and security are the foundation of our nation's rapid progress. pic.twitter.com/c3xdZhSISJ
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Appeasement politics stands in complete contradiction to the idea of true social justice. pic.twitter.com/IdE82IGZ3I
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Entertainment is one of the world’s fastest-growing industries and it’s only getting bigger.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 9, 2025
The WAVES Summit will showcase India’s creative power on the global stage. pic.twitter.com/ffbW95EUGm