पीएमइंडिया

· अपराध से प्राप्त आय की प्रभावी जब्ती, अपराधियों की जल्द से जल्द वापसी और अपराधिक आय को प्रभावी रूप से स्वदेश लौटाने जैसी कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग को बढ़ाना और सुव्यवस्थित करना।
· सभी भगोड़े आर्थिक अपराधियों का दूसरे देशों में प्रवेश और उनके सुरक्षित आश्रय को रोकने के लिए जी-20 देशों द्वारा एक कार्य प्रणाली बनाने के लिए संयुक्त प्रयास करना।
· भ्रष्टाचार के विरूद्ध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के सिद्धांतों (यूएनसीएसी), अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनओटीसी) के बारे में विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को पूरी तरह और प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए।
· अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक वित्तीय कार्रवाई कार्य दल (एफएटीएफ) का गठन किया जाना चाहिए, जो सक्षम कार्यक्रमों और वित्तीय खुफिया इकाइयों (एफईआईयू) के बीच जानकारियों का समय रहते व्यापक आदान-प्रदान सुनिश्चित कराये जिससे कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
· एफएटीएफ को भगोड़े आर्थिक अपराधियों की मानक परिभाषा तैयार करने का कार्य सौंपा जाये।
· एफएटीएफ को अपने घरेलू कानूनों के मुताबिक दिशा-निर्देश और सहायता उपलब्ध कराने के लिए भगोड़े आर्थिक अपराधियों से निपटने हेतु उनकी पहचान प्रत्यार्पण और न्यायिक कार्रवाई से संबंधित आम रूप से सहमत और मानकीकृत प्रक्रियाओं का एक सेट भी विकसित करना चाहिए।
· प्रत्यार्पण के सफल मामलों, प्रत्यार्पण की मौजूदा प्रणालियों में अंतर और कानूनी सहायता आदि सहित अनुभवों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए सामान्य मंच स्थापित किया जाना चाहिए।
· जी-20 फोरम को ऐसे आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों का पता लगाने के लिए कार्य शुरू करने पर विचार करना चाहिए, जिनके निवास के मूल देश में उनके खिलाफ भारी ऋण बकाया हो।
Striking at the root of economic malpractices for a better future.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 1, 2018
During the second session at G-20 Summit, which focused on international trade, financial and tax systems, I presented a 9-point programme on ways to take stringent action against fugitive economic offenders. pic.twitter.com/IsSryMrms8