पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारतीय क्षेत्र में आतंकवादी/सांप्रदायिक/वामपंथी उग्रवादी हिंसा और सीमा पार गोलीबारी एवं खदान/ईडी विस्फोटों के पीड़ित नागरिकों की मदद के लिए केंद्रीय योजना’ शीर्षक योजना के तहत पीड़ित नागरिकों के मुआवजे की अनुदान को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने को मंजूरी दी है। इस योजना की विशेषताएं इस प्रकार हैंः
1. भारत-पाक सीमा पर सीमापार से होने वाली गोलीबारी से पीड़ित नागरिकों को आतंकवादी अथवा वामपंथी उग्रवादी हिंसा के कारण मारे जाने वाले लोगों की तरह पहली बार 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
2. सरकार ने बुधवार को सीमापार गोलीबारी के पीड़ितों को मुआवजा देने और आतंकवादी अथवा वामपंथी उग्रवादी हिंसा के पीड़ितों के लिए मुआवजे की रकम को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का निर्णय लिया।
3. अब देश में कहीं भी आतंकी हमले, एलडब्ल्यूई हिंसा, सीमा पार गोलीबारी और आईईडी विस्फोट के कारण मारे गए किसी भी नागरिक को समान रूप से मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुआवजे की रकम पीड़ित के परिजनों को दी जाएगी।
4. समान कारणों से 50 प्रतिशत से अधिक विक्लांगता या अशक्तता के शिकार लोगों को भी 5 लाख रुपये दिए जाएंगे।
5. मुआवजे की रकम इस शर्त पर दी जाएगी कि पीड़ित के परिवार के किसी भी सदस्य को राज्य अथवा केंद्र सरकार द्वारा रोजगार नहीं मुहैया कराई जाएगी।
6. 2008 से अब तक आतंकवादी, सांप्रदायिक, नक्सली हिंसा के पीड़ित नागरिकों की सहायता के लिए केंद्रीय योजना के तहत मृतकों के परिजनों अथवा स्थायी तौर पर अशक्त होने वाले व्यक्तियों को मुआवजे के तौर पर 3 लाख रुपये दिए जाते रहे हैं। पीड़ितों के परिवारों को सरकार अथवा किसी अन्य स्रोत से कोई अन्य सहायता अथवा अनुग्रह राशि मिलने के बावजूद उन्हें इस योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र माना जाता था वशर्ते केंद्र सरकार द्वारा पहले से ही लागू किसी समान योजना के तहत मदद न मिली हो। 2008 में इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक सरकार ने असैनिक पीड़ितों के बीच मुआवजे के तौर पर 35.89 करोड़ रुपये वितरित किए।
पृष्ठभूमिः
23.10.2014 को प्रधानमंत्री के जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान सीमा पार गोलीबारी में मारे जाने वाले व्यक्तियों को वित्तीय सहायता देने का मुद्दा उठा था। आजादी के बाद के 70 वर्षों में पहली बार सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली भारतीय आबादी की समस्याओं को महसूस किया गया, सरकार ने उनकी दुर्दशा का विश्लेषण किया क्योंकि वे खास तौर पर जम्मू-कश्मीर के उत्तर पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन किए जाने से पीड़ित हैं। करीब 770 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा (एलसी) और करीब 220 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) 1990 से लगातार संघर्ष विराम के उल्लंघन और आतंकवादियों की घुसपैठ की गवाह है। 2015 में 13,921 नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। नागरिक आबादी की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीमा पार गोलीबारी के पीड़ित नागरिकों को भी इस योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।