पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष के इस्तेमाल और अन्वेषण में सहयोग पर भारत और नीदरलैंड के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) की जानकारी दी। इस एमओयू पर हस्ताक्षर 11 और 22 मई 2017 को क्रमश: बेंगलूरु और हेग में किए गए थे।
लाभ:
इस एमओयू से दोनों पक्षों के बीच निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग आसान होगा: पृथ्वी के रिमोट सेंसिंग सहित अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं ऐप्लिकेशन, उपग्रह संचार एवं उपग्रह आधारित नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोलीय अन्वेषण, अंतरिक्ष यान का उपयोग एवं अंतरिक्ष प्रणाली व ग्राउंड सिस्टम और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल।
तौर-तरीका:
इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की जाएगी जिसके सदस्य अंतरिक्ष विभाग/भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (डीओएस/इसरो) और नीदरलैंड स्पेस ऑफिस (एनएसओ) के अधिकारी होंगे जो समय-सीमा और इस एमओयू को लागू करने साधन सहित आगे की कार्ययोजना तैयार करेंगे। यह पृथ्वी की रिमोट सेंसिंग, उपग्रह संचार, उपग्रह नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान और बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण के क्षेत्र में नई अनुसंधान गतिविधियां और ऐप्लिकेशन की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
इस समझौता ज्ञापन मानवता के लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के ऐप्लिकेशन के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधि विकसित करने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। इस प्रकार इससे देश के सभी वर्गों और क्षेत्रों को लाभ होगा।
पृष्ठभूमि:
डीओएस/इसरो केंद्रों का क्षमता निर्माण पर नीदरलैंड के आईटीसी (इंटरनैशनल इंस्टीट्यूट फॉर जियो-इन्फॉर्मेशन साइंस एंड अर्थ ऑब्जर्वेशन, यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे) और पृथ्वी के अवलोकन पर अंशांकन/सत्यापन प्रयोग करने के लिए रॉयल नीदरलैंड मेट्रोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आरएनएमआई) के साथ काफी पुराना संबंध रहा है। अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) की वाणिज्यिक इकाई ऐंट्रिक्स कॉरपोरेशन ने अप्रैल 2008 में नीदरलैंड के एक उपग्रह (डीईएलएफआई-सी3) का प्रक्षेपण किया था। इसरो और नीदरलैंड स्पेस ऑफिस (एनएसओ) के अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग के निर्माण की रूपरेखाओं पर चर्चा की। तदनुसार दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष के इस्तेमाल और अन्वेषण में सहयोग के लिए इस एमओयू पर पारस्परिक रूप से सहमति जताई।