पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) में विदेशी निवेश के लिए नियमों में संशोधनों के लिए अपनी मंजूरी दी।
गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों से संबंधित वर्तमान विदेशी विनिमय प्रबंधन (ट्रांसफर और इश्यू ऑफ सिक्योरिटी बाय द पर्सन रेजिडेंट आउटसाइट ) विनियमों में संशोधन ‘अन्य वित्तीय सेवाओं में’ स्वत: अनुमोदित मार्ग से विदेशी निवेश के प्रवाह को सुगम्य बनाएगा। बशर्तें, ऐसी सेवाएं किसी अन्य वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों (आरबीआई, सेबी, पीएफआरडीए आदि) / सरकारी एजेंसियो द्वारा विनियमित हो। ‘अन्य वित्तीय सेवाओं में’ विदेशी निवेश, जो कि किसी अन्य विनिमयाकों/सरकारी एजेंसी द्वारा विनियमित नहीं है, मंजूरी मार्ग से किया जा सकता है।
इसके अलावा, एफडीआई नीति के अंतर्गत न्यूनतम पूंजीकरण मानदंडों को भी समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि अधिकांश विनियामकों ने पहले से ही न्यूनतम पूंजीकरण मानदंड निर्धारित कर लिए हैं। इससे एफडीआइ को प्रोत्साहन मिलेगा और देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होगी। यह सिर्फ किसी एक राज्य/जिले पर लागू न होकर, सम्पूर्ण भारत पर लागू होगा।
पृष्ठभूमि
बजट 2016-17 के अपने भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने यह घोषणा की थी कि ‘एफडीआइ को ऐसी 18 विनिर्दिष्ट एनबीएफसी गतिविधियों के अलावा उन अन्य गतिविधियों में स्वत: अनुमोदित मार्ग से लागू किया जाएगा, जो वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों द्वारा विनियमित नहीं है’। ‘गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों’ पर वर्तमान नियम निर्धारित करते है कि इन नियमों में उल्लेखित निर्धारित न्यूनतम पूंजीकरण मानदंडों को पूरा करने के पश्चात सिर्फ 18 निर्दिष्ट एनबीएफसी गतिविधियों के लिए ही एफडीआइ की अनुमति दी जाएगी। प्रस्तावित नियमों में, ‘सभी अन्य वित्तीय सेवाओं में’ विदेशी निवेश को स्वत: अनुमोदित मार्ग से मंजूर किया जाएगा। बशर्तें ऐसी सेवाएं किसी अन्य वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों (आरबीआई, सेबी, पीएफआरडीए आदि) / सरकारी एजेंसियो द्वारा विनियमित हो। इसके अलावा, एफडीआई नीति के अंतर्गत न्यूनतम पूंजीकरण मानदंडों को भी समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि अधिकांश विनियामकों ने पहले से ही न्यूनतम पूंजीकरण मानदंड निर्धारित कर लिए हैं।