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मंत्रिमंडल ने केन्‍द्रीय सूची में अन्‍य पिछड़े वर्गों के उप-वर्गीकरण के मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग की अवधि का 20 जून, 2018 तक विस्‍तार किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्‍द्रीय सूची में अन्‍य पिछड़े वर्गों के उप-वर्गीकरण के मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग की अवधि के दूसरे और अंतिम विस्‍तार को मंजूरी दे दी है। आयोग की अवधि 27 मार्च, 2018 से 12 सप्‍ताह बढ़ा कर 20 जून, 2018 कर दी गई है।

पृष्‍ठभूमि : 

आयोग का गठन 2 अक्‍टूबर, 2017 को राष्‍ट्रपति की मंजूरी के साथ संविधान के अनुच्‍छेद 340 के अर्न्‍तगत किया गया था। न्‍यायमूर्ति (सेवानिवृत्‍त) श्रीमती जी. रोहिणी के नेतृत्‍व में आयोग ने 11 अक्‍टूबर, 2017 को काम करना शुरू किया और तब से वह उन सभी राज्‍यों / संघ शासित प्रदेशों के साथ बातचीत कर रहा है जिन्‍होंने अन्‍य पिछड़े वर्गों और राज्‍य पिछड़ा वर्ग आयोगों का उप-वर्गीकरण कर रखा है। आयोग ने उच्‍च शिक्षा पाठ्यक्रमों में ओबीसी के दाखिले के संबंध में उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों तथा सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्‍थानों के साथ-साथ सीपीएसई में सरकारी नौकरियों में ओबीसी की भर्ती के संबंध में आंकड़े मांगे है, ताकि अन्‍य पिछड़े वर्गों की केन्‍द्रीय सूची में शामिल जातियों / समुदायों के बीच आरक्षण के लाभों का असमान वितरण होने के परिमाण का आकलन किया जा सके।

सभी क्षेत्रों से आयोग द्वारा प्राप्‍त किए गए आंकड़ों और एक विस्‍तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्‍लेषण के लिए आवश्‍यक समय को ध्‍यान में रखते हुए आयोग ने अपने कार्यकाल को 12 सप्‍ताह बढ़ाकर 20 जून, 2018 तक करने की मांग की थी।