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मंत्रिमंडल ने जल सहयोग पर भारत और यूरोपीय संघ के साथ समझौता ज्ञापन को स्वीकृति दी


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल संसाधन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और यूरोपीय संघ के साथ समझौता ज्ञापन को स्वीकृति प्रदान कर दी।

समझौता ज्ञापन के तहत जल प्रबंधन के क्षेत्र में समानता, परस्‍पर ओर समान रूप में लाभ पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक और प्रबंधकीय क्षमता को विस्तार देने की परिकल्पना की गई है। इस करार से दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा। इसके अंतर्गत जल के मुद्दों को लेकर तकनीकी आदान-प्रदान किए जाएंगे, जिसमें नदी घाटियों में एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन की योजना के साथ अध्ययन यात्राओं का भी प्रावधान है।

इस करार का मुख्य मकसद पर्यावरणीय मुद्दों की पहचान करना और स्थायी विकास के लिए अनुभवों का आदान प्रदान करना है, जिससे जल प्रबंधन को लेकर भारत व यूरोपीय संघ के बीच परस्पर सहयोग का रिश्ता बने। इस समझौते के तहत बढ़ती जनसंख्या, पानी की मांग में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए भारत में जल संसाधनों के प्रबंधन व उसके स्थायी विकास की परिकल्पना की गई है। समझौता ज्ञापन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए होने वाली गतिविधियों पर निगरानी के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन भी किया गया है।

पृष्टभूमिः

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने नीतियों एवं तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करके दूसरे देशों के साथ जल संसाधनों के विकास पर द्विपक्षीय सहयोग का एक खाका तैयार किया है। इसके लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का संचालन, कार्यशालाओं का आयोजन, वैज्ञानिक व तकनीकी संगोष्ठियों के आयोजनों सहित अध्ययन यात्राओं का आदान प्रदान किया जाएगा। मूल्य, जल संसाधनों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता और जल संसाधनों के वितरण में यूरोपीय संघ की सफलता को देखते हुए इजरायल के साथ एक करार करने का फैसला किया गया है ताकि उसके अनुभवों एवं विशेषज्ञता का लाभ लिया जा सके। यूरोपीय संघ के देशों ने जल संसाधनों के उपयोग के लिए पानी के मूल्य निर्धारण की नीतियों को अपनाया है ताकि पर्यावरण सुरक्षा को प्रोत्साहित किया जा सके।