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मंत्रिमंडल ने डब्ल्यूटीओ के 11वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को स्वीकृति दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अर्जेटीना के ब्यूनस आयर्स में 10-13 दिसंबर, 2017 को आयोजित डब्ल्यूटीओ के 11वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को पूर्व प्रभाव से स्वीकृति दी गई।

सम्मेलन में उपयोग किए गए अधिकार और अपनाए गए दृष्टिकोण का उद्देश्य भारत के हितों और प्राथमिकताओँ की रक्षा करना था।

पृष्ठभूमिः

सम्मेलन से पहले बाली/नैरोबी आदेश के अनुसार खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूति विषय तथा अन्य कृषि विषयों पर स्थायी समाधान की आशा की जा रही थी। विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्य देश सेवाओं में घरेलू नियमन, मछलीपालन सब्सिडी, ई-कॉमर्स, निवेश सहायता तथा सूक्ष्म मझौले और लघु उद्यमों (एमएसएमई) पर परिणाम चाहते थे।

लेकिन सहमति के अभाव में खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूति और अन्य कृषि विषयों पर कोई परिणाम प्राप्त नहीं किया जा सका।

नवंबर, 2014 के आम परिषद के निर्णय के साथ बाली मंत्रिस्तरीय निर्णय जिसकी पुष्टि 2015 में विश्व व्यापार संगठन के 10वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में की गई थी, वह सार्वजनिक प्रतिभूति के संबंध में भारत की रक्षा करता है। यह विश्व व्यापार संगठन द्वारा स्वीकृत स्थायी हल तक मौजूद रहेगा। इस तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत में आनाज खरीद सुरक्षित रहेगी।

सम्मेलन के दौरान मंत्रिस्तरीय निर्णयों में मछलीपालन संबंधी विषयों पर कार्यक्रम शामिल है ताकि 2019 में विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन द्वारा कोई निर्णय लिया जा सके। भारत द्वारा प्रस्तावित ई-कॉमर्स पर वर्तमान कार्यक्रम के गैर-वार्ता अधिकार जारी रखने का भी फैसला किया गया। जैसाकि पूर्ववर्ती मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में किया गया, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क लगाने की वर्तमान अवधि दो वर्षों के लिए बढ़ा दी गई। टीआरआईपीएस गैर-उल्लंघन कंपनियों पर रोक बरकरार रखी गई। यह फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में पेटेंटों के सदाबहार होने से रोकेगा और जेनेरिक दवाईयों तक पहुंच और वहन योग्य दवाएं सुनिश्चित होगा।

निवेश सुविधा, एमएसएमई, लिंग तथा व्यापार जैसे विषयों पर सहमति के अभाव में कोई मंत्रिस्तरीय निर्णय नहीं लिया गया।

सदस्यों में व्यापक मतभेद थे। कुछ सदस्य विश्व व्यापार संगठन को निर्देशित करने वाले प्रमुख सिद्धांतों को मानने से और उनके प्रति आग्रह से इंकार कर रहे थे। मंत्री सहमत मंत्रिस्तरीय घोषणा पर नहीं पहुंच सके। भारत ने प्रारूप मंत्रिस्तरीय घोषणा का समर्थन नहीं किया क्योंकि इसमें बहु-पक्षवाद, दोहा विकास एजेंडा तथा विकासशील देशो के साथ विशेष और लीक से हटकर व्यवहार जैसे विषयों को पर्याप्त रूप से कवर नहीं किया गया था।

लेकिन बहु-पक्षीय व्यापार प्रणाली और डब्ल्यूटीओ में विभिन्न कार्य क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में व्यापक समर्थन मिला। यह महत्वपूर्ण है कि मंत्रिस्तरीय घोषणा के अभाव में भी वर्तमान आदेश तथा निर्णयों से यह सुनिश्चित हुआ कि कार्य आगे जारी रहेगा और सदस्य खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूतियों, कृषि, विशेष रक्षा व्यवस्था, कृषि सब्सिडी तथा अन्य विषयों पर कार्य जारी रखेंगे।