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मंत्रिमंडल ने द्वारका, नई दिल्‍ली में प्रदर्शनी-सह-सम्‍मेलन केंद्र के विकास को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औद्योगिक नीति एवं सवंर्धन विभाग के निम्‍नलिखित प्रस्‍तावों को मंजूरी प्रदान कर दी है।

 

(क)   ईसीसी द्वारका एवं सम्‍बद्ध संरचनाओं को 25,703 करोड़ रूपये की कुल अनुमानित लागत पर परियोजना तथा पीपीपी एवं गैर-पीपीपी मोड (प्रदर्शनी एवं सम्‍मेलन स्‍थल क्षेत्र, प्रमुख अवसंरचना, मेट्रो/एनएचएआई सम्‍पर्क, होटल, कार्यालय एवं खुदरा कारोबार स्‍थान आदि सहित) वर्ष 2025 तक विकसित किया जाना।

 

(ख)   औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के माध्‍यम से सरकार की 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ परियोजना के कार्यान्‍वयन तथा विकास हेतु एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के रूप में एक नयी सरकारी कंपनी गठन किया जाना। एसपीवी की शुरूआती प्रदत्‍त पूंजी 5 करोड़ रूपये की होगी। भारत सरकार द्वारा प्रमुख अवसंरचना, प्रदर्शनी केंद्र के हिस्‍से, उपकक्ष, सम्‍मेलन केंद्र मेट्रो सम्‍पर्क, डीडीए को भूमि की लागत के भुगतान सहित एनएचआईएआई सड़क सम्‍पर्क, जल एवं सीवरेज अवसरंचना, मेट्रो सम्‍पर्क हेतु रेलवे भूमि तथा अन्‍य गैर-पीपीपी संघटकों के व्‍यय के लिए एसपीवी को 3 वर्ष की अवधि इक्विटी के रूप में 2037.39 करोड़ रूपये की अतिरिक्‍त बजटीय सहायता उपलब्‍ध करायी जाएगी।

 

(ग)   एसपीवी द्वारा 1381 करोड़ रूपये बाज़ार से सरकारी गारंटी के रूप में और 4000 करोड़ रूपये सरकारी भूमि के मुद्रीकरण तथा वार्षिक परियोजना राजस्‍व के माध्‍यम से जुटाया जाना। भूमि मुद्रीकरण से आय तथा एसपीवी द्वारा संग्रहित वार्षिक आय का एसपीवी द्वारा इस परियोजना के गैर-पीपीपी संघटकों के निधियन हेतु इस्‍तेमाल किया जाएगा।

 

(घ)   डीएमआईसीडीसी 10 वर्ष की प्रारंभिक अवधि के लिए न्‍यूनतम 5 करोड़ रूपये तथा अधिकतम 10 करोड़ रूपये प्रति वर्ष की शर्त के अध्‍यधीन आंतरिक वार्षिक प्राप्ति के 1 प्रतिशत की दर से वार्षिक शुल्‍क के भुगतान पर इस परियोजना हेतु ज्ञान सहभागी क रूप में कार्य करेगा।

 

(ड.)   एसपीवी बोर्ड को इस परियोजना के विभिन्‍न चरणों पर जरूरत के अनुसार निर्भर करते हुए समग्र अनुमोदित वित्‍तीय सीमाओं एवं संभावना के अंदर विस्‍तृत लागत अनुमानों, परियोजना संघटकों विवरण प्रमात्राओं, परियोजना चरण के संशोधन, कार्यक्षेत्र में परिवर्तन आदि के अनुमोदन के लिए प्राधिकृत करना। एसपीवी को बाज़ार स्थिति की निर्भरता पर भूमि के मुद्रीकरण के माध्‍यम से ऋण जुटाने/संसाधन जुटाने के लिए भी प्राधिकृत किया जाएगा।

 

प्रदर्शनी-सह-सम्‍मेलन केंद्र के साथ मुख्‍य अवसंरचना वाले परियोजना के चरण-1 को दिसंबर 2019 तक कार्यान्वित किया जाएगा। परियोजना के चरण-2 जिसमें शेष प्रदर्शनी क्षेत्र शामिल है, को मार्च, 2025 तक कार्यान्वित किया जाएगा। होटलों, खुदरा और कार्यालयों संबंधी पीपीपी घटक पीपीपी माध्‍यम से कार्यान्वित किए जाएंगे।

 

यह अनुमान है कि प्रस्‍तावित ईसीसी सुविधा में, एक बार पूर्णत: प्रचालानात्‍मक होने पर, वाणिज्यिक रूप से 100 से ज्‍यादा प्रमुख अंतर्राष्‍ट्रीय एवं स्‍थानीय प्रदर्शनी कार्यक्रम की मांग बढ़ेगी।  वाणिज्यिक रूप से प्रदर्शनी सुविधा में प्रथम चरण (2019-20) में 10 मिलियन से ज्‍यादा की संख्‍या में व्‍यक्तियों के दौरे (भुगतान आगंतुक) किए जाने का अनुमान है और दूसरे चरण (2025) के पूरे होने पर 23 मिलियन व्‍यक्तियों के दौरे किए जाने का अनुमान है। इसी प्रकार परियोजना के दूसरे चरण के सफलतापूर्वक पूरे होने पर वार्षिक रूप से सम्‍मेलन आधारित शिष्‍टमंडल की उपस्थिति 1.5 मिलियन को पार करने का अनुमान है।

 

परियोजना से प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से पांच लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन  होने का अनुमान है। रोज़गार सृजन प्रमुख ईसीसी सुविधाओं तथा ईसीसी भूमि के खुदरा, कार्यालय एवं आतिथ्‍य जैसे उपयोग सहायता में किया जाएगा।

पृष्‍ठभूमि

 

सम्‍मेलन एवं प्रदर्शनियां स्‍थानीय विनिर्माताओं को वैश्विक क्रेताओं के साथ जोड़ने तथा व्‍यावसायिक विचारो के आदान-प्रदान के लिए एक प्‍लेटफार्म के रूप में कार्य करने के लिए महत्‍वपूर्ण कड़ी हैं। भारत में एकीकृत विश्‍वस्‍तरीय सुविधा का अभाव है जिससे स्‍थान, परियोजना सुविधाओं, परिवहन लिंकेज आदि के रूप में वैश्विक प्रदर्शनी-सह-सम्‍मेलन प्रचाालकों की आवश्‍यकताओं को पूरा किया जा सके। सहायक संघटकों के साथ द्वारका में प्रदर्शनी-सह-सम्‍मेलन केंद्र (ईसीसी) का प्रचालन शुरू होने पर नई दिल्‍ली के प्रदर्शनी बाज़ार क्षेत्र में शंघाई, हांगकांग तथा सिंगापुर की श्रेणी में आने की आशा है।