पीएमइंडिया
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के निधन पर शोक जताया है। आज सुबह मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया कि ‘उनके निधन से देश ने एक दूरदृष्टा वैज्ञानिक, एक सच्चा राष्ट्रवादी और महान सपूत खो दिया है।’ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार और पूरे देश की ओर से शोक संतप्त परिवार को हार्दिक संवेदनाएं भेजी गई। पूर्व राष्ट्रपति ने 27 जुलाई 2015 को मेघालय में शिलॉग के बैथानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
प्रस्ताव का मूल पाठ इस प्रकार है:-
“15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्में डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम ने मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की। डॉ. कलाम ने देश में पहले सेटेलाइट प्रक्षेपणयान को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारत को अंतरिक्ष क्लब का विशिष्ट सदस्य बना दिया। “भारत के मिसाइल मैन” के रूप में प्रसिद्ध डॉ. कलाम अग्नि और पृथ्वी मिसाइल के निर्माण और परिचालन के लिए विख्यात थे। उन्होंने हल्के लड़ाकू विमान प्रयुक्त कर सुरक्षा पद्धति में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
डॉ. कलाम रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे और 1992-99 के दौरान रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग में सचिव थे। इस अवधि में रणनीतिक मिसाइल पद्धति विकसित की गई और पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए गए। डॉ. कलाम 1999 से 2001 तक भारत सरकार में प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे और उन्होंने विकास विनियोग के लिए कई नीतियां- रणनीतियां और अभियान तैयार किए तथा इंडिया मिलेनियम मिशन 2020 की शुरूआत की।
उनके साहित्यिक कार्यों में डॉ. कलाम की पुस्तकें- ”विंग्स ऑफ फायर,” ”इंडिया 2020-ए विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम”, ”माइ जर्नी” और ”इग्नाइटेड माइंड्स- अनलिशिंग द पावर विदइन इंडिया” देश और विश्व में प्रसिद्ध हुई।
डॉ. कलाम प्रौद्योगिकी विशेषरूप से देश के युवाओं को मानव कल्याण के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए प्रेरित करके समाज में तब्दीली लाना चाहते थे।
डॉ. कलाम को 48 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि सहित देश और दुनियाभर में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया था। उन्हें वर्ष 1997 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ”भारत रत्न” प्रदान किया गया था। अत्यंत साधारण शुरूआत से वे देश के सर्वोच्च स्थान तक पहुंचे थे एवं 2002 से 2007 तक वे देश के 11वें राष्ट्रपति रहे। अपने कार्यकाल के दौरान वे लोगों के राष्ट्रपति के रूप में प्रसिद्ध थे।”