पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों को प्रमुख बंदरगाहों पर तट और संबद्ध भूमि आवंटित करने और उसके संचालन के लिए नीति को मंजूरी दी है।
इस नीति से कैप्टिव फैसिलिटी आवंटित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी। इससे प्रमुख बंदरगाहों पर क्षमताओं को अधिकतम दोहन सुनिश्चित होगा और मेजर पोर्ट अथॉरिटी के राजस्व में वृद्धि होगी। इस नीति के दायरे में नई परिसंपत्तियों के सृजन साथ-साथ खाली बर्थ जैसे वर्तमान परिसंपत्तियों की बेहतर उपयोगिता शामिल है। यह नीति सभी प्रमुख बंदरगाहों पर लागू होगी।
इस नीति के तहत प्रमुख बंदरगाहों पर अपनी डेडिकेटेड फैसिलिटी स्थापित करने के लिए बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों (पीडीआई) को 30 वर्षों के लिए रियायत दी जाएगी ताकि आयात और निर्यात के लिए वस्तुओं के भंडारण में उन्हें मदद मिल सके। कुछ शर्तों के साथ रियायत अवधि में विस्तार भी दिया जा सकेगा जैसे रियायत अनुबंध के अनुरूप परिसंपत्तियों की उपयोगिता सुनिश्चित होने पर विस्तार की मंजूरी दी जा सकती है।
अधिकतम 30 साल के परिचालन के बाद तट और संबद्ध भूमि प्रमुख बंदरगाहों पर बर्थ, अपतटीय एंकोरेग्स, ट्रांशिपमेंट जेट्टीज, एकल बिंदु लंगर आदि के निर्माण के लिए आवंटित की जाएगी। यह पोर्ट अथॉरिटी और संबंद्ध पीडीआई के बीच हुए रियायत अनुबंध (सीए) के नियमों और शर्तों के अनुरूप होगा।
प्रमुख बंदरगाहों पर निजी क्षेत्र की सहभागिता के लिए जहाजरानी मंत्रालय द्वारा 1996 और 1998 में जारी वर्तमान दिशानिर्देशों के तहत केंद्र/राज्य सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) सहित बंदरगाह आधारित उद्योगों को निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करने पर ही निजी आधार पर तट और संबद्ध भूमि आवंटित करने का प्रावधान है। हालांकि इन दिशानिर्देशों पर अमल करते हुए प्रमुख बंदरगाहों पर कुछ बर्थ और फैसिलिटी स्थापित किए गए लेकिन इस प्रकार की फैसिलिटी के विकास के लिए मौजूद संभावनाओं को पूरी तरह भुनाना अभी बाकी है।
भारत सरकार सागरमाला कार्यक्रम के जरिये बंदरगाह आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिसकी आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका होगी। इस संदर्भ में प्रमुख बंदरगाहों पर भूमि और तटों का अधिकतम उपयोगिता सुनिश्चित करना काफी महत्त्वपूर्ण है। इस नीति का उद्देश्य कैप्टिव फैसिलिटी आवंटित करने की प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उद्योगों द्वारा समर्पित बंदरगाह फैसिलिटी के विकास और परिचालन सुनिश्चित करते हुए यह नीति प्रमुख बंदरगाहों के लिए दीर्धावधि आधार पर कारोबार सृजित करने में मदद करेगी। इस प्रकार यह बंदरगाह आधारित विकास के उद्देश्यों को पूरा करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगी।
पृष्ठभूमिः
भारत सरकार राष्ट्रीय आर्थिक समृद्धि के अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए देश में भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रतिबदद्ध है। इस लक्ष्य को हासिल करने के संदर्भ में सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के जरिये निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन देने और सार्वजनिक उपक्रमों की उपयोगिता एवं सेवाओं में सुधार के लिए उल्लेखनीय भूमिका निर्धारित किए हैं। बंदरगाह आधारित उद्योगों को पीपीपी/निजी आधार पर तट और संबद्ध भूमि का आवंटन इसी का हिस्सा है। इसके तहत प्रमुख बंदरगाहों पर निजी क्षेत्र की सहभागिता और निवेश को बढ़ावा देना है।