पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए भारत तथा मोरक्को के बीच समझौता से अवगत कराया गया। इस समझौता पर बेंगलुरू में 19 सितम्बर, 2018 को हस्ताक्षर किए गए थे।
प्रमुख विशेषताएं :
यह समझौता पृथ्वी के दूर संवेदी, सेटेलाइट संचार, सेटेलाइट आधारित नैविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान तथा ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष प्रणालियों और ग्राउंड सिस्टम, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी ऐप्लीकेशन सहितअंतरिक्ष विज्ञान टेक्नोलॉजी तथा ऐप्लीकेशनों में सहयोग की संभावनाओं में सहायक होगा।
इस समझौता से एक संयुक्त कार्य समूह बनेगा जो इस समझौता को लागू करने की समय सीमा और उपायों सहित एक कार्य योजना तैयार करेगा। कार्य समूह में डीओएस/ इसरो तथा रॉयल सेंटर फॉर रिमोट सेंसिंग (सीआरटीएस) तथा रॉयल सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च एंड स्टडीज (सीआरईआरएस) के सदस्य होंगे।
पृष्ठभूमि :
मोरक्को ने 1990 के प्रारंभ में अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के लिए दिलचस्पी व्यक्त की थी। 1998 में इसरो तथा सेंटर रॉयल डी टेले स्पेशियल (सीआरटीएस-रॉयल सेंटर फॉर रिमोट सेंसिंग) ने प्रारूप काआदान-प्रदान किया और 1998 में अंतरिक्ष सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर पारस्परिक सहमति व्यक्त की। लेकिन मोरक्को के अति विशिष्ट व्यक्तियों की भारत यात्रा रद्द होने से इस पर काम नहीं हो सका। विदेशमंत्रालय की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के प्रयास सफल नहीं हो पाए।
मोरक्को में भारत के राजदूत ने सरकार स्तर पर नया समझौता ज्ञापन के बारे में बातचीत की है और इसरो के साथ इसे साझा किया है। इसरो ने प्रारूप अंतर सरकारी समझौता ज्ञापन तैयार किया और मोरक्को के रक्षा प्रशासन प्रभारी मंत्री की भारत यात्रा के दौरान 25 सितम्बर, 2018 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का इरादा व्यक्त किया।