पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत और अर्मानिया के बीच अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग के क्षेत्र में हुए समझौता ज्ञापन के बारे में सूचित किया गया था।
यह समझौता ज्ञापन अप्रैल 2017 में पहले ही हस्ताक्षरित किया जा चुका है।
इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से पृथ्वी के सुदूर संवेदन, उपग्रह संचार, उपग्रह आधारित नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलीय खोज, अंतरिक्षयानों और अंतरिक्ष प्रणालियों और भू प्रणाली और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग सहित अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को सुविधाजनक बनाएगा।
इस समझौता ज्ञापन के माध्यम भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग/ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (डीओएस/इसरो) और अर्मानिया गणराज्य विज्ञान एवं शिक्षा मंत्रालय की राज्य समिति से सद्स्यों को शामिल करके एक संयुक्त कार्य दल की स्थापना की जाएगी जिससे कि इस समझौता ज्ञापन की समयसीमा और लागू करने के उपायों सहित कार्य योजना बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह पृथ्वी के दूर संवेदन, उपग्रह संचार, उपग्रह नेविगेशन, अन्तरिक्ष विज्ञान और बाह्य अंतरिक्ष में खोज के क्षेत्रों में नए अनुसंधान कार्यों और अनुप्रयोगों की संभावनाओं को खोजने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से मानवता के फायदे के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकीयों के अनुप्रयोग के क्षेत्र संयुक्त गतिविधि का विकास हो पाएगा। इससे देश के सभी वर्गों और क्षेत्रों को फायदा मिलेगा।
इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत किए गए कार्यों का वित्तपोषण संबंधित कार्यकारी संगठन द्वारा राज्यों में लागू बजटीय मापदण्डों से संबंधित राष्ट्रीय मानकों और नियमों पर विधिवत् विचार और उपलब्ध संसाधनों की सीमा के भीतर ही किया जाएगा।
कार्यकलाप के प्रकार और क्षेत्र के आधार पर इस एमओयू के अंतर्गत शुरू की गई संयुक्त परियोजनाएं और कार्य गैर-वाणिज्यिक या वाणिज्यिक आधार पर किए जाएंगे और इनका निष्पादन या तो आपसी भुगतानों के बिना या क्षतिपूर्ति प्रबंधों या करारों के आधार पर किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
अर्मानिया ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने की रूचि अभिव्यक्त की है। तद्नुसार, अंतरिक्ष सहयोग के लिए फ्रेमवर्क एमओयू का नमूना सरकारी स्तर पर अतिरिक्त कार्यवाही के लिए प्रदान किया गया था जिसके लिए अर्मानिया ने अप्रैल 2017 में अपनी सहमति प्रदान कर दी है। तद्नुसार, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए सहयोग पर 25, अप्रैल 2017 को येरेवन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति जी की यात्रा के दौरान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।