पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और मोरोक्को के बीच जल संसाधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के लिए अपनी मंजूरी दी है।
यह एमओयू संबंधित देश के कानून एवं उनकी विशेषज्ञता के दायरे में जल संसाधनों के विकास एवं प्रबंधन में सहयोग को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इस एमओयू के तहत द्विपक्षीय सहयोग का दायरा इस प्रकार होगा:
1. हाइड्रोलिक बुनियादी ढ़ांचे की परिकल्पना, प्राप्ति एवं रखरखाव, विशेष तौर पर बड़े बांधों और जल अंतरण परियोजनाओं के लिए,
2. एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, यानी सतही एवं भूजल संसाधनों का मिश्रित उपयोग, जल उपयोग दक्षता में सुधार, जलवायु परिवर्तन पर लचीलापन एवं अनुकूलन, जल शोधक का कृत्रिम पुनर्भरण, संगठनात्मक, संस्थागत एवं विनियमन पहलुओं में बढ़ोतरी,
3. बाढ़ एवं सूखा प्रबंधन,
4. रिचार्ज में बढ़ोतरी सहित भूजल संसाधनों के सतत विकास एवं प्रबंधन, और
5. वर्षा जल संग्रहण एवं मूल्यांकन और जलवायु अनुकूलन।
सहयोग में यह भी शामिल हैं:
1. विशेषज्ञों के दौरे और अभियानों का आदान-प्रदान,
2. जल संसाधन के क्षेत्र में कार्यक्रमों, प्रकाशनों, विशेषज्ञता और अनुसंधान के परिणामों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान,
• भारत और मोरोक्को में ऊपर बताए गए दायरे में परियोजनाएं विकसित करना: दोनों देशों में सामाजिक-आर्थिक क्रियाकलापों के साथ भागीदारी तंत्र विकसित करना,
1. जल से संबंधित कार्यक्रमों और परियोजनाओं में विशेषज्ञों की पारस्परिक भागीदारी सुनिश्चित करना,
2. हाइड्रोलिक बेसिन में एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन के सिद्धांतों को लागू करने के लिए विशेषज्ञता को साझा करने के उद्देश्य से दोनों देशों हाइड्रोलिक बेसिन एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) स्थापित करने का भी प्रस्ताव है जिसमें दोनों देशों के बराबर सदस्य होंगे। यह कार्य समूह एमओयू से संबंधित गतिविधियों की निगरानी करेगा। कार्य समूह की सालाना बैठक बारी-बारी से भारत और मोरोक्को में आयोजित होगी। साथ ही कार्य समूह टेलीफोन अथवा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये किसी भी समय बातचीत कर सकता है।
वैज्ञानिक, तकनीकी एवं तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित यह सहयोग दोनों देशों के जल संसाधन क्षेत्र के सार्वजनिक एवं निजी संगठनों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विकास/स्थापना को प्रोत्साहित करेगा। अद्यतन तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुभव के आदान-प्रदान से दोनों देश सीख सते हैं और अपने कौशल को बेहतर बना सकते हैं।
पृष्ठभूमि:
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय ने करअन्य देशों के साथ नीति एवं तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी संगोष्ठियों के आयोजन, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और अध्ययन टूर के आयोजन के जरिये जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की परिकल्पना की है। भारत और अफ्रीका के बीच जारी सहयोग को ध्यान में रखते हुए मोरोक्को के साथ जल संधान के क्षेत्र में अनुभव एवं विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए समझौता करने का निर्णय लिया गया है।