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मंत्रिमंडल ने भारत में कारोबार करने में आसानी का समर्थन करने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में कारोबार करने में आसानी को समर्थन देने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता ज्ञापन करने के लिए अपनी पूर्व-कार्योत्तर स्वीकृति दे दी है। समझौता ज्ञापन पर इस महीने के शुरू में हस्ताक्षर किए गए थे।

यह समझौता ज्ञापन दोनों सरकारों के अधिकारियों के आदान-प्रदान को सक्षम करेगा ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को सांझा करने, तकनीकी सहायता पेश करने और सुधारों का उन्नत कार्यान्वयन करने का काम हो सके। सहयोग के इस दायरे में राज्य सरकारें भी आएंगी। ब्रिटेन की सरकार ने निम्नलिखित क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता देने में रुचि दिखाई है:

1) छोटे कारोबारों और स्टार्ट अप को सहयोग
2) पंजीकरण और कारोबार शुरू करना
3) कर प्रशासन और कर देना
4) दिवालियापन
5) कंस्ट्रक्शन परमिट
6) बिजली पाना
7) जांच और नियामक प्रशासनों के लिए जोखिम आधारित ढांचा
8) सीमा पार व्यापार
9) प्रतिस्पर्धी अर्थशास्त्र
10) उधार पाना
11) कानूनों और नियमों का मसौदा बनाना
12) विनियमन के स्टॉक और प्रवाह को कम करना
13) विनियमनों का प्रभाव आकलन

वर्तमान में 190 अर्थव्यवस्थाओं में से भारत का स्थान 130वां (डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2017 के मुताबिक) है। ब्रिटेन सरकार ने हाल के वर्षों में कारोबार करने में आसानी (ईओडीबी) की रैंकिंग में अभूतपूर्व सुधार हासिल किया है। सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण आदि के जरिए इसके लाभार्थियों में केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हैं। हर पक्ष ट्रेनिंग / सेमीनार / सम्मेलनों की सह-मेजबानी के और अपने अधिकारियों की यात्रा व सामान का खर्चा उठाएगा।

इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत ब्रिटिश सरकार की कई एजेंसियां अधिकारियों के लिए बेहतर विनियमन मसौदा बनाने, अग्रिम पंक्ति के निरीक्षकों की क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान आदि पर पेशेवर कोर्स करवाएंगी। इस सहयोग से अनुमान है कि भारत सरकार, राज्य सरकारें और उनकी एजेंसियां देश में नियामक वातावरण को आसान बनाने और भारत में अनुकूल कारोबारी माहौल को बढ़ावा देने के लिए अभिनव प्रथाओं को अपनाने में तेजी लाएंगी।