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मंत्रिमंडल ने महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन के लिए राज्‍य सरकार के उपक्रमों द्वारा द्विपक्षीय एजेंसियों से वाह्य सहायता प्राप्‍त करने की अनुमति को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय तौर पर समृद्ध राज्‍य सरकार के उपक्रमों को प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन के लिए द्विपक्षीय ओडीए (आधिकारिक विकास सहायता) से सीधे तौर पर सहायता प्राप्‍त करने की अनुमति देने संबंधी नीतिगत दिशानिर्देशों को मंजूरी दी है। राज्‍य सरकार के उपक्रम मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) को मुंबई ट्रांस हारबर लिंक (एमटीएचएल) परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए सीधे तौर पर जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) से ओडीए ऋण सहायता प्राप्‍त करने के लिए मंजूरी दी गई है। मुंबई ट्रांस हारबर लिंक (एमटीएचएल) की अनुमानित परियोजना लागत 17,854 करोड़ रुपये है जिसमें जेआईसीए ऋण का हिस्‍सा 15,109 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

इन दिशानिर्देशों से राज्य सरकार के उपक्रमों को बाहरी द्विपक्षीय वित्तपोषण एजेंसियों से कुछ शर्तों को पूरा करते हुए सीधे तौर पर उधार लेने में आसानी होगी और वित्तपोषण एजेंसियों को ऋण एवं ब्‍याज संबंधी सभी भुगतान सीधे तौर पर संबंधित उधारकर्ता द्वारा किए जाएंगे। संबंधित राज्‍य सरकार ऋण के लिए गारंटी प्रदान करेगी। भारत सरकार ऋण के लिए काउंटर गारंटी प्रदान करेगी।

प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं के वित्तपोषण और संस्थागत क्षमता निर्माण में बाहरी सहायता आज सहायक भूमिका निभाती है। वैश्विकृत आर्थिक ढांचे के तहत प्रतिस्‍पर्धी ताकत हासिल करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वित्तपोषण जरूरतों को पूरा करने में बड़े अंतर के मद्देनजर बाहरी सहायता की भूमिका काफी महत्‍वपूर्ण होता जा रहा है।

वर्तमान में भारत सरकार को इन कार्यों के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्रोतों से बाहरी विकास सहायता प्राप्‍त होती है: 1. केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं/कार्यक्रमों के लिए, 2. केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं के लिए और 3. राज्‍य सरकारों और/अथवा स्‍थानीय निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा क्रियान्वित राज्‍य क्षेत्र की परियोजनाओं/कार्यक्रमों के लिए राज्‍य सरकारों के बदले। मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत राज्‍य सरकार के उपक्रमों को सीधे तौर पर बाहरी एजेंसियों से उधार लेने की अनुमति नहीं है।

कई राज्य एजेंसियां राष्ट्रीय महत्व की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही हैं। ये परियोजनाएं भले ही व्‍यवहार्य एवं समर्थ हों लेकिन इन्‍हें वित्तपोषण की काफी आवश्‍यकता होती है और इस प्रकार की परियोजनाओं के लिए राज्‍य सरकारों से उधारी लेने पर उधारी की सीमा खत्‍म हो सकती है। इसलिए अन्‍य क्षेत्रों के लिए बाहरी सहायता संबंधी जरूरतों से समझौता किए बिना देश की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश की रफ्तार बढ़ाने के लिए वर्तमान दिशानिर्देशों में संशोधन करने की जरूरत महसूस की गई ताकि राज्‍य सरकार के उपक्रमों को द्विपक्षीय बाहरी एजेंसियों से सीधे तौर पर उधारी लेने में समर्थ बनाया जा सके।

इस व्‍यवस्‍था से वित्तीय तौर पर मजबूत राज्‍य सरकार के उपक्रम सरकारी खजाने पर कोई बोझ डाले बिना अपनी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सीधे तौर पर बाहरी एजेंसियों से उधारी लेने और उसे चुकाने में समर्थ होंगे। इन दिशानिर्देशों को मंजूरी मिलने से समावेशी विकास को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।