पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को शांतिपूर्ण उद्देश्यो के लिए बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में सहयोग पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया। इस समझौता ज्ञापन पर 26 जुलाई, 2018 को जोहान्सिबर्ग में हस्ताक्षर किए गए थे।
प्रमुख विशेषताएं-
इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र होंगेः
पृथ्वी का दूर संवेदन
बी) सेटेलाइट संचार तथा सेटेलाइट आधारित नैविगेशन
सी) अंतरिक्ष विज्ञान तथा ग्रहों की खोज
डी) अंतरिक्ष यान, लांच यान, अंतरिक्ष प्रणालियों और जमीनी प्रणालियों का उपयोग
ई) भू-स्थानिक उपायों और तकनीकों सहित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यवहारिक एप्लीकेशन
एफ) दोनों क्षेत्रों द्वारा निर्धारित किए जाने वाले सहयोग के अन्य क्षेत्र
इस समझौते ज्ञापन के अंतर्गत निम्नलिखित तरीके से सहयोग किया जाएगा।
1. पारस्पर लाभ और हित की संयुक्त अंतरिक्ष परीयोजनाओं का नियोजन और क्रियान्वयन
2. समर्थनकारी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए ग्राउंड स्टेशनों की स्थापना, संचालन तथा रख-रखाव
3. सेटेलाइट डाटा प्रयोगों के परिणाम तथा वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी सूचना साझ करना
4. संयुक्त अनुसंधान और विकास गतिविधियां
5. सहयोग के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए निर्धारित तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मियों का आदान-प्रदान
6. अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्षमता सृजन तथा सामाजिक उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष एप्लीकेशन कार्यक्रम
7. संयुक्त गोष्ठियों, सम्मेलनों और वैज्ञानिकों बैठकों का आयोजन
8. संबद्ध पक्षों के बीच पारस्परिक सहमति के आधार पर लिखित रूप में सहयोग के अतिरिक्त तरीकों का निर्धारण किया जाएगा।
लाभः
समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर से अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी और पृथ्वी का दूर संवेदन, सेटेलाइट संचार तथा सेटेलाइट आधारित नैविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान तथा ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यान तथा अंतरिक्ष प्रणालियों और ग्राउंड प्रणालियों का उपयोग तथा अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के एप्लीकेशन सहित अन्य एप्लीकेशनों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं जारी रखने में मदद मिलेगी।