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मत्रिमंडल ने 01.01.1997 से एनएचपीसी लिमिटेड, नॉर्थ ईस्‍ट इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और एसजेवीएन लिमिटेड के बोर्ड स्‍तर के कार्यपालकों से नीचे वाले वेतनमानों के नियमन को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मत्रिमंडल ने 1 जनवरी, 1997 से नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी), नॉर्थ ईस्‍ट इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनईईपीसीओ), टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (पूर्ववर्ती टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड) और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएन) के बोर्ड स्‍तर के कार्यपालकों से नीचे वाले वेतनमानों के नियमन को अपनी मंजूरी दे दी है। इसे विद्युत मंत्रालय के दिनांक 04.04.2006 और 01.09.2006 के आदेशों के अनुसरण में लागू किया गया था।

कार्यान्‍वयन की रणनीति :

इस मंजूरी से, विद्युत मंत्रालय के दिनांक 04.04.2006 और 01.09.2006 के आदेशों के अनुसरण हाइड्रो क्षेत्र के केन्‍द्रीय सार्वजनिक उद्यमों द्वारा लागू किए गए वेतनमानों को नियमित किया जाएगा।

प्रभाव :

इस मंजूरी से,  01.01.2007 से पहले हाइड्रो क्षेत्र के केन्‍द्रीय सार्वजनिक उद्यमों में शामिल लगभग 5,254 कार्यपालक लाभान्वित होंगे। इससे हाइड्रो क्षेत्र के केन्‍द्रीय सार्वजनिक उद्यमों के कार्यपालकों का मनोबल प्रेरित और मजबूत होगा।

व्‍यय :

वेतनमानों के नियमन के लिए लगभग 323 करोड़ रुपये की कुल लागत होगी।

पृष्‍ठभूमि  :

एनटीपीसी / तेल क्षेत्र के अनुसार कामगारों / गैर-कार्यपालकों की केन्‍द्रीयकृत श्रेणी के वेतनमानों के संशोधन के कारण 01.01.1997 से संगठनों के भीतर एनएचपीसी, एनईईपीसीओ, टीएचडीसीआईएल और एसजेवीएनएल के कार्यपालकों के वेतनमानों में विषमताएं थीं। कामगारों और पर्यवक्षकों के वेतनमान, ई-1 ग्रेड में कार्यपालकों के वेतनमान से अधिक थे।

सचिवों की समिति (सीओएस) और मंत्रिमंडल द्वारा पहले कई बार इस प्रस्‍ताव पर विचार किया गया था। दिसंबर, 2013 में मंत्रिमंडल ने निम्‍नलिखित निर्णय लिए थे :

विषम 01.01.1997 से निर्धारि‍त विषमतापूर्ण वेतनमानों को नियमि‍त नहीं किया जाएगा।

हालांकि,  वसूली संबंधी कठिनाइयों और ऐसी वसूली से कर्मचारियों के हतोत्‍साहित होने के बारे में ध्‍यान रखते हुए 01.01.1997 से प्राप्‍त किए गए अतिरिक्‍त वेतन की वसूली नहीं की जाएगी।

01.01.1997 से निर्धारित वेतनमानों में विषमता को सही करने के बाद वेतनमानों को 01.01.2007 के अनुरूप लागू किया जाएगा।

इस आदेश से असंतुष्‍ट, हाइड्रो क्षेत्र के सार्वजनिक उद्यमों के अनेक कर्मचारी संघों ने कई उच्‍च न्‍यायालयों में याचिकाएं दाखिल की थीं। उत्तराखंड और मेघालय के उच्‍च न्यायालयों ने उपर्युक्‍त निर्णय को खारिज कर दिया था। उत्तराखंड उच्‍च न्‍यायालय के फैसले के विरूद्ध 12.04.2017 को उच्‍चतम न्‍यायालय में एसएलपी दाखिल किया गया था, जिसे 08.05.2017 को खारिज कर दिया गया। मेघालय और उत्तराखंड के उच्‍च न्‍यायालयों में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। विद्युत मंत्रालय के 04.04.2006 और 01.09.2006 के आदेशों के अनुसरण में एनएचपीसी, एसजेवीएनएल, एनईईपीसीओ और टीएचडीसीआईएल द्वारा 01.01.1997 से प्रभावी वेतनमानों को नियमि‍त करने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी मांगने से सिवा विद्युत मंत्रालय के पास कोई अन्‍य विकल्‍प शेष नहीं था।