पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज अंतर्राष्ट्रीय मेरीटाईम संगठन (आईएमओ) के बंकर ऑयल पॉल्यूशन डैमेज-2001 (बंकर संधि) के लिए अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उत्तरदेयता संधि में भारत के सम्मिलन और बंकर संधि, नैरोबी संधि और सेलवेज संधि को लागू करने के लिए मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 1958 में संशोधन से जुड़े नौवहन मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
बंकर संधि के माध्यम से जहाजों के बंकरों में र्इंधन के रूप में ढोते समय तेल के रिसावों द्वारा होने वाले नुकसान के लिए पर्याप्त, शीघ्र और प्रभावकारी मुआवजा सुनिश्चित किया जाता है। क्षति सम्बन्धी मुआवजे का क्षेत्राधिकार क्षेत्रीय समुद्र से लेकर विशेष आर्थिक क्षेत्रों तक है। यह ऐसे भारतीय जहाज के लिए लागू है जो कहीं भी स्थित हो तथा ऐसे विदेशी जहाज के लिए लागू है जबकि वह भारतीय क्षेत्राधिकार में हो।
प्रत्येक जहाज के पंजीकृत मालिक को अनिवार्य बीमा सुरक्षा का पालन करना होता है, जो उन्हें बीमाकर्ता के पास सीधे-सीधे लाकर प्रदूषण की स्थिति में नुकसान होने पर मुआवजे के लिए दावे की अनुमति देता है।
बंकर संधि 2001 को 21 नवम्बर, 2008 से विश्व भर में लागू किया गया है और विश्व में जहाज द्वारा ढुलाई क्षमता का 91 प्रतिशत कुल हिस्सेदारी वाले समुद्री देश इस संधि से जुड़े पक्ष हैं। भारत यदि बंकर संधि का एक पक्ष नहीं बनता है तो विदेशी बंदरगाहों पर जाने वाले भारतीय जहाज विदेश जाने के लिए बंकर बीमा अनुपालना प्रमाणपत्र हेतु मौजूदा व्यवस्था के अधीन रहेंगे, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर आने वाले विदेशी जहाजों पर अनिवार्य बीमा की शर्तें लागू नहीं होंगी।