Search

पीएमइंडियापीएमइंडिया

न्यूज अपडेट्स

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

मार्क ज़क्करबर्ग के साथ फेसबुक मुख्यालय में आयोजित टाउनहॉल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ


श्री मार्क जुकरबर्गः प्रधानमंत्री मोदी, फेसबुक में आपका स्वागत करना सम्मान की बात है। यहां हैकर स्क्वॉयर पर मौजूद और हमें भारत तथा दुनिया के दूसरे हिस्सों में सजीव (लाइव) देख रहे सभी लोगों का धन्यवाद।

आप जानते हैं, हमारी कंपनी के इतिहास में भारत निजी रूप से काफी महत्वपूर्ण है। एक कहानी है जो मैंने कभी सार्वजनिक रूप से नहीं कही और बहुत कम लोग इसे जानते हैं, लेकिन हमारे शुरुआती दौर में, वास्तव में चीजों के बेहतर होने से पहले, हम एक बुरे दौर से गुजर रहे थे और बहुत से लोग फेसबुक को खरीदना चाहते थे …वो सोचते थे क‌ि हमें फेसबुक को बेच देना चाहिए। …तब मैं अपने एक मार्गदर्शक स्टीव जॉब्स से मिलने गया, उन्होंने मुझे सलाह दी कि मेरा अपनी कंपनी के लिए जो मिशन है, उससे दोबारा जुड़ने के लिए मुझे भारत के उस मंदिर में जाना चाहिए जहां वह खुद अपने शुरुआती दिनों में एप्पल से अपेक्षा के बारे में अपनी सोच को विस्तार देने और भविष्य में उनके संभावित नजरिए के लिए गए थे…।

और इसलिए मैं वहां गया और करीब एक महीने तक वहां घूमता रहा…, लोगों को देखा…, यह देखा कि वहां लोग कैसे एक दूसरे से जुड़े हैं…, और वहां मुझे यह महसूस करने का अवसर मिला कि यह विश्व कितना बेहतर हो सकता है अगर किसी में जुड़ने की मजबूत क्षमता हो। इसने मुझमें इस बात के महत्व को सुदृढ़ बनाया कि हम क्या कर रहे हैं। और यही कुछ ऐसा है जिसे पिछले दस सालों में फेसबुक को बढ़ाने के दौरान मैं हमेशा याद रखता हूं।

पिछले वर्ष दिल्ली में हमारी काफी अच्छी बातचीत हुई थी। आप भारत और दुनिया के भविष्य को कैसे देखते हैं, इसे लेकर मैं आपके और अपने पूरे समुदाय के साथ आगे होने वाली बातचीत का इंतजार कर रहा हूं। जब मैं भविष्य के बारे में सोचता हूं तो निजी तौर पर कई कारणों से भारत को लेकर उत्साहित हो जाता हूं।

पहला, विश्व में आज हमारे पास हर किसी को इंटरनेट से जोड़ने का बड़ा अवसर है। इंटरनेट न केवल मनोरंजन और संचार तक पहुंच प्रदान करता है बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। वास्तव में, ऐसे दस लोग जिनकी इंटरनेट तक पहुंच है, उनमें से एक गरीबी से उबरता है और लगभग एक के लिए नई नौकरी पैदा होती है।

भारत में अब भी एक अरब लोग है, जिन्हें हमें इंटरनेट से जोड़ने की जरूरत है। और उन्हें जोड़ना मानवता के लिए आज मौजूद सबसे बड़े अवसरों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। मैं सभी भारतीयों के लिए एक बहुत बड़े अवसर को वास्तविकता बनाने के लिए तहे दिल से प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया की प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के नागरिकों से संवाद करने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने का जो उदाहरण रखा है, मैं व्यक्तिगत तौर पर उससे बहुत प्रभावित हूं। चाहे शांति के संदेश का प्रसार हो अथवा महिलाओं के अधिकार का अभियान, बच्चों का विकास या फिर डिजिटल इंडिया, यह तय है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता ने दुनिया के सभी नेताओं के सामने एक उदाहरण पेश कर दिया है कि उन्हें भविष्य में अपने नागरिकों से किस तरह संवाद स्थापित करना चाहिए।

जब हर कोई अपनी आवाज ऑनलाइन सुना सकेगा, तभी हम भविष्य के बारे में सार्थक बातचीत कर सकेंगे। … और ऐसे ही समाज एक साथ आएगा तथा साझा लक्ष्यों को हासिल करेगा।

आखिरी बार वर्ष 1982 में भारत के किसी प्रधानमंत्री ने कैलीफोर्निया का दौरा किया था। तब से लेकर आज तक काफी कुछ बदल चुका है। आज भारत एक वैश्विक नेता है, भारतीय व्यापार और संस्कृति दुनियाभर में लोगों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं…। भारत को लगातार विकास करने के लिए ऑनलाइन के क्षेत्र में भी लीडर बनना होगा।

और, प्रधानमंत्री मोदी, वह किस तरह होगा आप इसके एक उदाहरण हैं। इसलिए आज मैं यह सुनने के लिए आतुर हूं कि आप इन लक्ष्यों को कैसे देखते हैं और विश्व को क्यों भारत के भविष्य को लेकर आशावादी होना चाहिए।

धन्यवाद, फेसबुक में आपका स्वागत है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः मार्क, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आज मुझे फेसबुक के हेडक्‍वार्टर पर आकर दुनिया जिसके साथ जुड़ी है उनके साथ रूबरू होने का अवसर मिला है।

विज्ञान और आध्‍यात्‍म का नाता ऐसा हो भी सकता है, वो शायद मार्क ने आज न बताया होता, तो दुनिया को पता नहीं चलता। अमेरिका से एक नौजवान कुछ करने के सपने देखता है और विज्ञान की दुनिया में जिसने सफलता पाई है, वैसे उसके गुरू उसे कहते है कुछ भी करने से पहले हिन्‍दुस्‍तान जाओ, वहां किसी temple में जाओ और वहां जा करके तुम अपनी बात बताओ. तुम्‍हें रास्‍ता मिल जाएगा। ये बात अपने आप में एक अजूबा है। दुनिया के लोगों के लिए आज, मार्क, आपकी बात सुन करके बहुत बड़ा आश्‍चर्य हुआ होगा। और मैं आशा करता हूं कि जो प्रेरणा आपको मिली है, जिस प्रेरणा से आपने इस काम को प्रारंभ किया है… ये सिर्फ कंपनी की बैंक अकांउट को बढ़ाने वाला काम नहीं रहेगा, ये दुनिया के करोड़ों-करोड़ों लोगों की आवाज बनेगा। ये दुनिया के करोड़ों-करोड़ों लोगों के aspiration की अभिव्‍यक्ति का माध्‍यम बनेगा, और ये आपका प्रयास सामान्‍य मानव की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति करने की जिनकी जिम्‍मेवारी है, उनको जगाए रखेगा, और उस अर्थ में मैं आपके इस प्रयास को अभिनंदन करता हूं, धन्‍यवाद करता हूं।

आपने सवाल पूछा कि लोग भारत के पास बड़ी आशाभरी नजर से देख रहे है। आपको क्‍या लगता है? जब आप भारत आए, आप किसी टेम्‍पल में गए बड़ी आशा भरी नजर से, और देखिए आप कहां से कहां पहुंच गए! आपका अनुभव कहता है कि जो भारत से आशाएं-अपेक्षाएं है, सामर्थ्‍य भारत में है वो आपका खुद का अनुभव बता रहा है। ये दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अगर आर्थिक नजरिए से देखा जाए – चाहे World Bank हो, IMF हो, दुनिया की सारी Rating Agencies हो – एक स्‍वर से सब लोग कह रहे है कि आज विश्‍व के बड़े देशों की fastest growing economy अगर कोई है तो वो है भारत।

आज हम 8 ट्रिलियन डॉलर Economy है। मेरा ड्रीम है 20 ट्रिलियन डॉलर economy में convert करने का। और उस काम को करना है मुझे तो तीन बातों पर मैं बल दे रहा हूं: Agriculture sector, Services sector and Manufacturing sector. आप वो लोग दुनिया से जुड़े हुए है, जिनका सबसे बड़ा कन्‍ट्रिब्‍यूशन सर्विस सेक्‍टर में है। और मैं सर्विस सेक्‍टर की ताकत बहुत बड़ी देख रहा हूं।

अकेला अगर टूरिज्‍म ले लें, अकेला टूरिज्‍म। भारत के पास टूरिज्‍म के क्षेत्र में इतनी संभावनाएं पड़ी है, जॉब क्रिऐशन के लिए इतनी संभावनाएं पड़ी है और आज की technology ने विश्‍व को इतना निकट ला करके रख दिया है, इतने अपनेपन को पैदा कर दिया है। और टूरिज्‍म अगर बढ़ता है तो सर्विस सेक्‍टर को, जॉब क्रिएशन को… यानी quality of life में change लाने में एक बहुत बड़ी ताकत बनती है। और उस अर्थ में मैं देखता हूं, कि पिछले साल-सवा साल में भारत के प्रति जो नजरिया बदला है, आज कहीं पर भी किसी भारतीय को किसी विदेशी व्‍यक्ति से मिलने का अवसर मिलता है तो वो बड़े गर्व के भाव से देखता है। इतने कम समय में ये perception बदल जाना, ये उस विश्‍वास की नींव के कारण होता है। अगर 15 महीने में सबसे बड़ा काम हमारी सरकार ने किया है तो वो खोए हुए विश्‍वास को हमने वापस लाया है, एक confidence level को लाया है और मैं मानता हूं वही चीजों को बदलाव करते है। ICU में पड़ा हुआ पेशंट भी, जब उसको विश्‍वास हो जाता है कि हां मेरे डॉक्‍टर आ गए, अब मैं ठीक हो जाऊंगा, ICU वाला पेशंट भी बाहर आ जाता है।

श्री मार्क जुकरबर्गः ठीक है, अब हम अपना पहला प्रश्न लेते हैं। इस टाउनहॉल कार्यक्रम के बारे में हमारी फेसबुक पोस्ट पर हमें करीब 4,000 टिप्पणियां और प्रश्न मिले हैं। यह असाधारण है।

कई लोग अपने सवाल पूछने के लिए आज यहां पहुंचे हैं। उन लोगों को बुलाने से पहले, वास्तव में मैं आपसे एक प्रश्न पूछकर शुरुआत करना चाहता हूं। आप इंटरनेट, सोशल मीडिया और फेसबुक को शुरुआती दौर में अपनाने वाले लोगों में से एक हैं। आज इस मुकाम पर, क्या आप मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट शासन और नीतियों में नागरिकों की भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बन सकते हैं?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः जब मैंने सोशल मीडिया को अपनाया तब मुझे ही मालूम नहीं था कि मैं कभी मुख्‍यमंत्री बनूंगा, कभी प्रधानमंत्री बनूंगा। तो मैंने ये तो सोचा नहीं था कि सोशल मीडिया का मुझे governance में भी काम आ सकता है। मैं जब सोशल मीडिया से जुड़ा तो एक technology के प्रति मेरी curiosity रहती थी। मैंने देखा कि मैं किताबों के द्वारा दुनिया को समझने की जो कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मनुष्‍य का स्‍वभाव है कि textbook के बजाए अगर guide मिल जाए तो ज्‍यादा अच्‍छा लगता है, और guide से भी अगर कोई sure suggestions दे देता है तो अच्‍छा लगता है। मेरे लिए सोशल मीडिया ने ये काम किया। मुझे बहुत की कम समय में दो-चार शब्‍दों से, मुझे जिन चीजों की जरूरत थी वो मिल जाती थी।

और दूसरा फायदा ये हुआ कि मैं बहुत ज्‍यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं। बहुत मेरे पास वो सौभाग्‍य नहीं था कि मुझे कोई ज्‍यादा ज्ञान अर्जित कर सकूं। लेकिन मेरी उस कमी को सोशल मीडिया ने भर दिया। दो-चार शब्‍दों से भी मेरी दुनिया चल जाती थी। और उसके कारण मेरी thought process में बहुत बड़ा बदलाव आया। मैं जो कभी आस पास उस दुनिया से ही सोचता था, एक पूरे विश्‍व के दायरे तक उसे छूने का मुझे अवसर मिला। मैं जुड़ता चला गया। और जैसे-जैसे मैं जुड़ता चला गया, दुनिया ने भी, मैं जैसा हूं वैसा, मुझे स्‍वीकारना शुरू कर दिया। और इंसान के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात ये होती है कि आप जैसे हो वैसे जब दुनिया आपको स्‍वीकार करती है तो उससे बड़ा आनंद का कोई अवसर नहीं होता। वरना क्या है, लोग कहते है “हाँ, आप अच्‍छे है लेकिन ये होता तो अच्‍छा होता, आप बहुत अच्‍छे है लेकिन थोड़ा ये..” सोशल मीडिया में वो problem ही नहीं है! आप जैसे है वैसे दुनिया स्‍वीकार करती है आपको। उसे कोई Question नहीं होता है। और इससे आपका दायरा बहुत तेजी से बढ़ता है। मैंने ये जो पहले अनुभव किया, वो इस दायरे को बढ़ाने वाला अनुभव किया।

जब मैं सरकार में आया तो तो मेरे सारे दरवाजे खुल गए। मैंने देखा… सरकार का एक problem होता है। उसके और जनता के बीच एक बहुत बड़ा gap होता है, बहुत बड़ी खाई होती है। और जब पता चलता है, पांच साल हो जाते हैं चुनाव आता है, रिजल्‍ट आता है, तब पता चलता है कि भई इतनी बड़ी gap थी। Social Media के कारण daily voting होता है। मैं अभी बात रहा हूं अभी voting चलता होगा कि मोदी ठीक कर रहा है गलत कर रहा है।

आज Social Media की ताकत है कि किसी भी सरकार को – वो गलत करता है तो रोकता है, गलत करने से डरता है, और गलती सुधारने का अवसर पहले पांच साल में एक बार चुनाव के बाद होता था, आज हर 5 मिनट के बाद होता है। मैं मानता हूं ये लोकतंत्र की बहुत बड़ी ताकत बन गया है। और इसलिए मैं सभी राजनेताओं से, दुनिया के सभी राजनेताओं को – Social Media से भागने से कुछ होने वाला नहीं है, आप जुडि़ए, आप उसको जानने की कोशिश कीजिए। अच्‍छी सरकार तब चलती है, जब Information Channel बहुत हों आपके, और Real Time Information मिलती हो।

सरकारों के पास पहले Mechanism था भी तो बड़ा slow था। कहीं पर कुछ हो जाता था तो 24 घंटे के बाद जब Newspaper आता था तब पता था यार वहां कहीं हुआ है। आज 24 सेकेंड में पता चलता है कि दुनिया के उस कोने में ऐसा हुआ है। और इसलिए Real Time Information के लिए ये सबसे बड़ा Source है। और अगर Government जागरूक है, सतर्क है, conscious है तो Real Time Information से वो Corrective measures ले सकते हैं, Policy Framework बना सकते हैं और काम की गति को बहुत बड़ा सकते हैं। और उस अर्थ में मैं देख रहा हूं कि Social Media ने Governance में बहुत बड़ा Role Play किया है।

आपने मुझे सवाल पूछा Diplomacy का। देखिए Diplomacy, पहले क्‍या होता था? Country, Capital एक-दूसरे से जुड़ते थे। दिल्‍ली वाशिंगटन से जुड़ता था। दिल्‍ली टोकियो से जुड़ता था। नेताओं से जुड़ते थे। Social Media के कारण एक देश दूसरे देश के नागरिकों से जुड़ता है। आज मैं चाईना में, चाईना में Social Media का अलग Structure है, लेकिन मैं वहां भी Active हूं। और मैं वहां Chinese Language में Communicate करता हूं। आपको हैरानी होगी मैंने चाईना की विबो पर उनके प्रधानमंत्री के जन्‍मदिन की बधाई दी। चाईना के नागरिकों के लिए उनके प्रधानमंत्री का जन्‍मदिन एक न्‍यूज थे और वो इतना viral हुआ था पूरे चाईना में इतना viral हुआ था। अब ये Diplomacy का रूप कहां किसी ने कभी सोचा था। कभी नहीं सोचा था। मैंने इस्राईल के Prime Minister को उनका एक Festival होता है उस Festival पे हिब्रू भाषा में शुभकामनाएं दीं। वो viral हो गई। लेकिन सबसे बड़ी वजह तब आई जब उन्‍होंने मुझे इसका जवाब, Thanks, हिन्‍दी में भेजा। अब देखिए ये, ये Diplomacy का नया रूप है जो सीधा जनता से जोड़ता है और शायद विश्‍व एक परिवार है, ये formation में, ये Social Media एक Catalytic Agent के रूप में बहुत बड़ी नई भूमिका अदा कर रहा है।

श्री मार्क जुकरबर्गः यहां फेसबुक में मौजूद हम में से बहुत से लोगों का आपके नेतृत्व का इतना प्रशंसक होने का एक कारण यह है कि हम अपने मिशन को लेकर पूरी तरह सहमत हैं, यह कुछ ऐसा ही है, जैसा कि आपने अभी कहा, इसके लिए आपका धन्यवाद।

हमारा अगला सवाल वीर कश्यप का है। वीर, आप हमें बताएं आप कहां से हैं?

श्री वीर कश्यपः प्रधानमंत्री मोदी जी एवं मार्क, सुप्रभात। हमें यहां बुलाने के लिए धन्यवाद। मैं इस समय बेंगलुरू में रह रहा हूं। मैं आठ साल पहले भारत गया था। मैंने वहां किसी के साथ मिलकर अपनी कंपनी खोली क्योंकि मैंने डिजिटल क्रांति पर प्रभाव डालने में भारत की सक्षम होने की बड़ी संभावना देखी। यह देश भर के लाखों लोगों को इंटरनेट का उपयोग कर बेहतर नौकरी पाने में सक्षम बनाता है। मैंने हमेशा यह महसूस किया कि अतीत में सरकारों ने भौतिक बुनियादी ढांचे में निवेश किया, आज के समय और युग में, सरकारों की मुख्य भूमिका डिजिटल ढांचा तैयार करने की होनी चाहिए जिससे लोगों को इससे जुड़ने का अवसर मिल सकेगा और वे वैश्विक समाज में योगदान देने योग्‍य नागरिक बन सकेंगे। इसलिए प्रधानमंत्री जी, मेरा आपसे सवाल है कि आपकी सरकार 80 करोड़ से एक अरब लोगों को एक साथ जोड़ने के लिए किस तरह का निवेश करने जा रही है?
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः वीर, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने भारत आ करके अपना नसीब आजमाने के लिए प्रयास किया है। मैं इसका स्वागत करता हूं और वीर से प्रेरणा ले करके यहां के और भी नौजवान जरूर भारत आना पसंद करेंगे। ये बात सही है कि भारत को दो बातों पर equally बल देना पड़ेगा। एक Physical Infrastructure, जिसको हम नकार नहीं सकते क्‍योंकि मेरे देश की वो Requirement है। और दूसरा Digital Infrastructures, क्‍योंकि मैं पहले ये काम करूं, फिर दूसरा करूं, फिर तीसरा करूं, तो तो वक्‍त चला जाएगा। तो simultaneous मुझे सारे चीज करने पड़ेंगे। और ये मेरा conviction है कि आज की 21वीं सदी में जितना महत्‍व Highways का है उतना ही महत्‍व i-ways का है। Highway भी चाहिए Information ways भी चाहिए। भारत में 600,000 Villages हैं। ये नम्‍बर ही इतना बड़ा है कि लोगों को वहीं से डर लग जाता है। और करीब ढाई लाख पंचायतें हैं। मेरी कोशिश है कि Next Five Years में इन सभी गांवों को Optical Fibre Network से जोड़ दूं। जो लोग भारत से परिचित हैं, और दुनिया में भी आप देखोगे तो मानव संस्‍कृति का जो विकास हुआ है – पहले लोग वहां बसते थे जहां नदी हुआ करती थी। जहां नदी होगी उसके बगल में शहर बसते थे, वक्‍त बदल गया, जहां से Highways गुजरते थे शहर वहां बसने लग गए। आने वाले दिनों में जहां से Optical Fibre Network गुजरेगा वहां पर शहर बसने वाले हैं।

ये बदलते हुए विश्‍व को हमने देखना चाहिए। और इसलिए हमारी कोशिश है कि हम, हम Governance में Technology को बहुत बड़ी मात्रा में ला रहे हैं। Transparency के लिए वो बहुत उपयोगी हो रहा है। Effective Governance करना है, Easy Governance करना है, even Economical Governance करना है। तो ये Technology बहुत बड़ी ताकत है। तो सरकार के फायदे के लिए भी मेरे लिए compulsion है कि मैं, मेरा पूरा shifting digital world की हो। तो एक तो Infrastructure world हो, जहां तक पैसों का सवाल है मैं नहीं मानता हूं आज दुनिया में पैसों की कोई कमी है। बहुत से देश हैं उनको पता नहीं है पैसे कहां लगाएं। मैं उनको Address दे रहा हूं कि, here is the place.

श्री मार्क जुकरबर्गः ठीक है, हमारा अगला सवाल टीएस खुराना का है, वह यहां फेसबुक में काम करते हैं, तो टीएस तुम कहां से हो?

श्री टीएस खुरानाः मेरा जन्म भारत में हुआ लेकिन हम 1971 में अमेरिका आ गए थे। मैंने अपनी अंग्रेजी केंटुकी की गलियों में सीखी है। प्रधानमंत्री जी, हमारे परिसर में आपका स्वागत है और मार्क रविवार की इस शानदार सुबह के लिए आपका धन्यवाद। प्रधानमंत्री के लिए मेरा सवाल है, पिछले 15 महीने के दौरान भारत में व्यापार करना आसान हुआ है अथवा नहीं, आप क्या मानते हैं? आपने लालफीताशाही खत्म करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत की है। लेकिन ऐसी धारणा बन रही है कि अभी सुधारों की गति धीमी है। क्या आप मानते हैं कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान अंततः सफल हो पाएगा?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः देखिए एक स्‍कूटर जब टर्न करना होता है, ऐसे जा रहा है स्‍कूटर, it takes half a second. और आपको पता चला, हां यार स्‍कूटर ऐसे जा रहा था, इधर आ गया। लेकिन अगर 40 डिब्‍बे वाली ट्रेन को मुझे उधर से इधर लाना है, तो काफी देर लगती है कि हां यार इधर गया फिर आया, अभी तो आया नहीं, आया नहीं, आया नहीं, आया नहीं।

तो इतना बड़ा देश – आपको एक बदलाव निरंतर होते हैं, बहुत सारे होते हैं, अब जब उसका cumulative effect कुछ समय के बाद ध्‍यान आता है, तब लगता है कैसे से कैसे हो गया। अब आप देखिए भारत में 40 साल पहले बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण हुआ। इस मकसद से हुआ कि बैंक गरीबों के काम आने चाहिए। लेकिन 40 साल में 60% Population, उसका Bank Account नहीं था। अब काम हो रहा है कि नहीं हो रहा उसका हिसाब कैसे लगाओगे? 40 साल में 180 Million लोग – बैंक का Account नहीं था।

ये सरकार आई, 100 days में 100 days – 180 million bank accounts. अब आप speed देखो, scale देखिए, ये देखो के अरे वाह कैसे हो गया भाई? जो 40 साल में नहीं हुआ वो 100 दिन में कैसे हो गया? तो ये बदलाव की speed है, बदलाव की speed है। जिस प्रकार से अभी मैंने एक अभियान चलाया और world Bank ने initiative लिया – Ease of Doing Business. Ease of Doing Business के rating में भारत दुनिया में 140 नम्‍बर पर खड़ा है। और जो रिपोर्ट देख करके सोचेगा वो कभी भारत में आने के लिए नहीं सोचेगा। स्वाभाविक है क्‍योंकि कम्‍पनी का जब बोर्ड बैठता है, तो कागज ले के बैठता है वो कोई देखने के लिए थोड़ा ही आता है, जैसे कि ये फेसबुक वाले Temple में आ गए। वो तो अपना बोर्ड देखते हैं। अब ये Mark की बात सुन करके लोग सोचेंगे यार कागज से नहीं, पहले एक बार जा करके देख लें।

लेकिन हमने तय किया कि हमें Ease of Doing Business करना है। मैंने सभी states को On-Board लिया। We are a Federal Government, और ज्‍यादातार हमारे यहां states के पास सबसे ज्‍यादा Power है. उनको बुलाया, Ease of Doing Business के लिए क्‍या-क्‍या रुकावट है उसकी listing किया, और अभी World Bank ने rating किया मैं हैरान था, मैं खुद हैरान था, सभी राज्‍यों के बीच Ease of Doing Business का एक unprecedented competition शुरू हुआ है। एक से दूसरा राज्‍य आगे निकलना चाहता है। और Ease of Doing Business में unprecedented achievement in last six months India ने achieve कर लिया है। आने वाले दिनों में जब National Rating आएगा, मुझे विश्‍वास है हम 140 से काफी ऊपर चले जाएंगे।

कहने का तात्‍पर्य है कि संभावना है। दूसरा, “Make In India” की सफलता का रहस्‍य क्‍या है? दुनिया का कोई भी व्‍यक्ति अपनी कम्‍पनी बंद करना नहीं चाहता है। Competitive World में वो खड़ा होना चाहता है। अगर Facebook के Headquarter को मान लीजिए 10 Million पगार देना पड़ता है, लोगों को हर महीना, और वही काम भारत में 1 Million पगार से होता है, तो आएगा कि नहीं आएगा? आएगा कि नहीं आएगा? तो low cost manufacturing, effective governance, skilled manpower, raw material and the biggest market in India, ये सारी संभावनाएं ऐसी हैं कि जो Make in India के लिए दुनिया के किसी भी Manufacturer के लिए ये स्‍वर्ग भूमि है।

और उस अर्थ में मैं देखता हूं कि “Make in India” के लिए बहुत-बहुत संभावनाएं पड़ी हुई हैं और सफलता की ओर… आपने देखा होगा पिछले 15 महीने में अकेले अमेरिका से Foreign Direct Investment में 87% growth है 87% ! One can imagine! FII में बहुत तेजी से growth हो रहा है। और Average, हमारे देश का Foreign Direct Investment का growth 40 percent हो गया है। जो कि आज दुनिया में जो recession है, दुनिया के और देशों में 16 percent minus है, whereas India 40 percent plus है। ये बताता है कि “Make in India” की सफलताएं इसके साथ जुड़ी हुई हैं। और मैं देख रहा हूं कि make in India सफल होगा।

दूसरी बात है भारत के इन दिनों जो सुविधाएं है उसके comparison में दुनिया के किसी के पास नहीं है। हमारे पास 3-D है, और 3-D हमारी unique strength है. Strength ऐसे नहीं – it is a unique strength – Demographic Dividend, Democracy and Demand. 800 million Population below 35 years है। जो जवान देश हो, vibrant democracy हो, vibrant judiciary हो vibrant media हो, Like-minded countries के लिए ये एक बहुत बड़ी opportunity होती है democracy. And demand – 1.25 billion people! कितनी बड़ी डिमांड है! और उसमें मैंने आ करके एक नया D जोड़ दिया है “deregulaisation”. मैं सारे सरकारी कब्जो को हटा रहा हूं। मैं सरकार को छोटी कर रहा हूं। और मेरी philosophy है “Government has no business to be in business”. ये हमारा काम नहीं होटल चलाना। लोग चलाए, और अच्‍छी तरह से चलाए। और ये चीजें जिसके कारण मैं देख रहा हूं कि मि. खुराना, बहुत संभावना है।

श्री मार्क जुकरबर्गः हमारा अगला सवाल डॉ. रंजना कुमारी की ओर से है लगता है कि वह अभी नई दिल्ली से यहां आई हैं। डॉक्टर, क्या आप हमें बताएंगी कि आप कहां से हैं और आपका प्रश्न क्या है?
डा. रंजना कुमारीः जी हां, मैं भारत में दिल्ली में, महिला सशक्तिकरण के लिए Centre for Social Research की निदेशिका हूँ। मोदी जी, मेरा आपसे सवाल है, पिछले समय में दुनिया में भारतीय महिलाओं को लेकर काफी कुछ कहा सुना गया है, जिसकी वजह से सब लोग जानना चाहते हैं कि आपकी महिलाओं और बच्चियों के सशक्तिकरण के लिए क्या योजना है और ख़ास तौर से “Progressive India” में महिलाओं की बराबरी के लिए आपकी क्या सोच है?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः दो पहलू है। मैं एक उन पहलूओं की ओर ले जाऊंगा, जो कई लोग पसंद नहीं करते है। लेकिन जब मार्क ने टेंपल की बात कह दी है तो मेरा मन करता है मैं भी कुछ ऐसा बता दूं। दुनिया में भगवान की कल्‍पना सभी समाजों में है। ईश्‍वर की कल्‍पना हर किसी समाज में हैं। लेकिन हर किसी समाज में भगवान पुरूष ही है। हर समाज में! अकेला हिन्‍दुस्‍तान है जहां स्‍त्री भगवान की कल्‍पना की गई है। दुर्गा, सरस्‍वती, अम्‍बा, काली, यानी मूलभूत हमारे चिंतन का जो अधिष्‍ठान है, उसमें नारी के इस रूप की कल्‍पना की गई है।

ये बात सही है कि हजारों साल से चलते-चलते कभी उसमें diversion आते है, deterioration आते है, वो बदलते हुए समाज की एक तासीर रहती है। जहां तक सरकार का सवाल है, भारत को अगर अपने आर्थिक विकास के लक्ष्‍य प्राप्‍त करने है तो 50% population को घर के अंदर बंद रख करके नहीं हो सकते है। इस 50% नारी शक्ति, उसकी भारत की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिला करके 100% partnership होनी चाहिए। सरकार की नीतियां proactive होनी चाहिए। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे है। आज हिन्‍दुस्‍तान में education ले लीजिए, health ले लीजिए, तो वहां स्थिति ऐसी है कि Male के लिए reservation करना पड़ेगा! अगर आप आज Education Field की meeting करें, 1000 लोगों को बुलाए, तो 800 महिलाएं होती है और 200 ही पुरूष होते है।

इतनी बड़ी मात्रा में पूरी education activity आज हिन्‍दुस्‍तान में महिलाओं के हाथ में है। Health sector – आज अगर आप health sector की कोई conference कर लीजिए। आपको बहुत बड़ी मात्रा में health sector में – खास करके nursing में, paramedical staff में – पूरा control महिलाओं ने लिया है। पिछले दिनों हमने निर्णय किया Police Department में, जो Union Territories है, जहां भारत सरकार निर्णय करती है वहां 30% Reservation for the women police, हमने decide किया।

भारत, आज भी दुनिया के कई देश है, आज भी दुनिया के देश है जहां किसी महिला को चुनाव जीतना आज भी मुश्किल है। बहुत ही पढ़े-लिखे देश में भी भारत में electoral process में है, अनेक राज्‍य ऐसे है कि जहां local self-government में 50% women reservation है। अगर 100 लोगों को body है तो compulsory 50 महिलाएं होगी, होगी, होगी। ये छोटा निर्णय नहीं है और Parliament assembly में भी उसके लिए बहस चल रही है कि वहां भी महिलाओं को… ताकि Decision Making Process में उनकी भागीदारी हो। और मैं मानता हूं कि Women Empowerment में एक बात हमको achieve करनी होगी कि Decision Making Process में Women का हिस्‍सा होना चाहिए।

सिर्फ वो मकान बनाते है, तो दीवार का कलर कैसा हो, यहां तक उसका सीमित role नहीं होना चाहिए, मकान कैसा बने तब तक का उसका involvement होना चाहिए। परिवार में भी Empowerment होना चाहिए। और इस दिशा में, अब जैसे हमने एक अभियान चलाया “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं।“ मैं जब गुजरात में था मुख्‍यमंत्री, जून महीने में 45 डिग्री temperature गुजरात में होता है। मैं जून महीने में 12, 13, 14, 15 इन जून के चार दिनों में खुद गांव चला जाता था। गांव में रहता था, 45 डिग्री temperature हुआ करता है। हर घर जा करके कहता था बेटी को स्‍कूल भेजिए, मुझे आपकी बेटी को पढ़ाना है और मैं 100% Girl Child Education को achieve करके रहा था। आज मेरी कोशिश है Girl Child Education को “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” एक बहुत बड़ा Movement Nation Wide चल रहा है और ऐसे अनेक काम है।

जैसे, सरकार की कोई scheme है। सरकार की scheme में अगर हम गरीबों को मकान देते है। तो मेरे यहां compulsory है, वो मकान, सबसे पहले मालिक का नाम महिला का होगा second name उस घर के पुरूष का होगा। पहले भारत में बच्‍चों को स्‍कूल दाखिल करते थे, तो बच्‍चे के पीछे पिता का नाम लिखा जाता था। मैं जब गुजरात में था तो compulsory कर दिया था, बच्‍चे के साथ सिर्फ पिता का नाम नहीं माता का नाम compulsory रहेगा। आपको समाज के जीवन की जो पुरानी सोच है उसको बदलना होगा और एक के बाद एक चाहें वो सामाजिक स्‍तर हो, आर्थिक स्‍तर हो, सरकार की व्‍यवस्‍था का स्‍तर हो इन सारे विषयों में इसको जोड़ा जा रहा है और मैं मानता हूं कि उसके कारण एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है।

श्री मार्क जुकरबर्गः ठीक है, हमारा अगला सवाल, मैं आपसे एक व्यक्तिगत सवाल पूछना चाहता हूं। लोग शायद इसका अनुभव न करें लेकिन वास्तव में कई सारी चीजें ऐसी हैं, जो हम दोनों में एक समान हैं। इनमें से एक है परिवार। हम दोनों के लिए ही परिवार बहुत अहम है। वास्तव में आज मेरा माता -पिता भी यहां हैं। आप अपनी मां को अपनी जिंदगी में भी काफी महत्वपूर्ण मानते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि आप हमें उनके बारे में कुछ बताएंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीः मैं उन मां-बाप को बहुत बधाई देता हूं और उनको यहां से मैं प्रणाम करता हूं कि उन्‍होंने मार्क जैसा बेटा एक ऐसे काम के लिए दिया जिसने दुनिया को जोड़ने का काम किया। I request you, will you please stand-up? We would like to see you. और मुझे लगता है शायद यह पहली घटना होगी कि मार्क ने आज आप दोनों को यहाँ बुलाया है।

आप किसी भी व्यक्ति के जीवन में देखें, किसी की भी Biography देखें, autobiography देखें, हर किसी के जीवन में दो चीजें हमेशा आती है – कि मेरे जीवन में टीचर का क्‍या रोल रहा और मेरे जीवन में मेरी माता का क्‍या रोल रहा। हर एक के जीवन में आता है। मैं भी एक सामान्‍य परिवार से हूं। मेरे जीवन में मेरे मां-बाप का बहुत बड़ा रोल रहा है। मैं बहुत गरीब परिवार से हूं। आप जानते है मैं रेलवे स्‍टेशन पर चाय बेचता था। कोई कल्‍पना नहीं कर सकता कि दुनिया की इतनी बड़ी democracy ने एक चाय बेचने वाले को अपना नेता मान लिया। और इसलिए मैं सबसे पहले उन सवा सौ करोड़ भारतवासियों को नमन करता हूं कि जिन्‍होंने मुझ जैसे सामान्‍य व्‍यक्ति को अपना बना लिया।

दूसरी बात है, बहुत सामान्‍य परिवार में से कैसे गुजारा करना। हमारे पिता जी तो रहे नहीं है। माता जी हैं 90 साल से भी ज्‍यादा उम्र है। आज भी अपने सारे काम खुद करती है, सब कुछ काम खुद करती है। पढ़ी-लिखी नहीं है, लेकिन टीवी के कारण उनको समाचारों का सब पता रहता है, दुनिया क्‍या चल रही है। वरना, कुछ पता नहीं होता था। जब हम छोटे थे तो हमारा गुजारा करने के लिए वे अड़ोस-पड़ोस के घरों में बर्तन साफ करना, पानी भरना, मजदूरी करना… आप कल्‍पना कर सकते हैं कि एक मां ने अपने बच्‍चों को बड़ा करने के लिए कितना कष्‍ट उठाया होगा। और ये सिर्फ नरेंद्र मोदी के case में नहीं है। भारत में ऐसी लाखों माताएं हैं, जिन्‍होंने अपने बच्‍चों के सपनों लिए अपना पूरा जीवन आहूत कर दिया है।

और इसलिए मैं सभी माताओं को शत-शत वंदन करता हूं और उनकी प्रेरणा, उनके आर्शीवाद न सिर्फ हमें शक्ति दें, पर हमें सही रास्‍ते पर रखें। ओर वही मां की सबसे बड़ी ताकत होती है। मां कभी नहीं चाहती कि आप कुछ बन जाओ। लेकिन मां हमेशा चाहती है कि आप कैसे बनो। और यह मां का सपना होता है “कैसे बनो”। “कुछ भी बनो”, ये कभी मां का सपना नहीं होता है। ये फर्क होता है और इसलिए हर किसी के जीवन में मां का बहुत बड़ा योगदान होता है।

धन्यवाद मार्क।