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मुंबई में ग्लोबल सिटीजंस फेस्टिवल के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन


हैलो, मेरे युवा मित्रों,

नमस्ते

मैं देख रहा हूं कि आप अच्छा समय व्यतीत कर रहे हैं।

मैं जानता हूं कि मैं आपके और कोल्ड प्ले के बीच में आ गया हूं। इसलिए मैं इसे संक्षिप्त रखूंगा।

वर्ष 2014 में मैंने न्यूयार्क के खूबसूरत सेंट्रल पार्क में ग्लोबल सिटीजन फेस्टिवल का आनंद उठाया था।

हालांकि, इस बार मेरी व्यस्तता ने मुझे इसमें व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की अनुमति नहीं दी।

लेकिन फिर, यह पहली बार भारत में हो रहा है और मैं इसे छोड़ना नहीं चाहता।

इसलिए मैं यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मौजूद हूं।

आप में से कई मेरे मोबाइल ऐप के जरिए मुझसे जुड़े हुए हैं।

मुझे भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रिया और सलाह का इंतजार रहेगा।

मैं हमेशा युवा लोगों के बीच जाने के लिए तत्पर रहता हूं।

यह मुझे तरोताजा और फिर से ऊर्जावान कर देता है।

आप ऐसी ऊर्जा और आदर्शवाद लाते हैं, जो अद्वितीय है।

मैं इसे तब भी महसूस कर सकता हूं जब मैं आपसे सैकड़ों किलोमीटर दूर हूं।

यह मेरी पुरानी फाइलों और दिल्ली की ठंड में सामान्य दिनचर्या से अलग एक स्वागतयोग्य ब्रेक (अंतराल) है।

मैं ह्यूज इवांस, शिव खेमका, गौरी ईश्वरन, पूनम महाजन और उन कई लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने इसे संभव बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है।

सार्वजनिक नीति को कूल बनाना आसान काम नहीं है!

मुझे सुनने के लिए आप लोगों का धन्यवाद।

आप लोगों ने मुझे सिर्फ भाषण देने के लिए बुलाकर समझदारी दिखाई है, मुझे गाना गाने को नहीं कहा।

नहीं तो, मुझे यकीन है कि आपके दर्शक आपसे अपने पैसा वापस मांग लेते।

…और वो भी 100 रुपये के नोटों में।

गरीबी किसी भी सभ्य समाज के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है।

कुपोषण हो, बेरोजगारी हो, भ्रष्टाचार हो, अस्वच्छता हो, इसका सबसे ज्यादा असर गरीबों पर ही पड़ता है ।

इसलिए, सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ ये सरकार गरीबों को सशक्त करने का काम कर रही है। पिछले दो साल से देश में स्वच्छता का महाअभियान चल रहा है।

लोग अपने आसपास सफाई के प्रति, गंदगी न करने के प्रति जागरूक हुए हैं।

करोड़ों की संख्या में घरों में शौचालयों का निर्माण हो रहा है।

शहरों में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

स्वच्छता अभियान को जन-जन के जोश ने जनआंदोलन में बदल दिया है, और आज ये जन-जन के आनंद में भी बदल रहा है ।

इस मुहिम में आप नौजवानों ने मिलकर देश को राह दिखाई है।

अगर कोई बड़ा गंदगी कर रहा है, तो आपने उसे टोका है, उसे स्वच्छता का महत्व समझाया है।

आपने खुद झाड़ू उठाकर अपने आसपास की सफाई की है।

आपकी प्राथमिकता इसी बात से झलकती है कि आज “वर्ल्ड टॉयलेट डे” पर इस कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है ।

देश के गली-मोहल्लों, गांवों और शहरों में सफाई के साथ ही स्वच्छता अभियान का दायरा भी बढ़ गया है।

आजकल बॉर्डर के पार की सफाई हो या कालेधन से भरी तिजोरियों के भीतर तक की सफाई, सब कुछ जोर-शोर से चल रहा है।

सफाई आंदोलन के इस दूसरे चरण में भी मुझे आपका अमूल्य साथ मिल रहा है।

मेरे युवा मित्रों, कुल मिलाकर मैं आश्वस्त हूं कि हम ऐसा कर सकते हैं और हम इस पीढ़ी में ही गंदगी के सभी रूपों से मुक्त स्वच्छ भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मैं यह भी जानता हूं कि हम ऐसा कर सकते हैं। उस पल से जब आप ऐसा करने का इरादा कर लें।

अतः इस सफाई अभियान में मेरे साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए मैं आपका तहे दिल से आभारी हूं और आगे भी आपको ऐसा करते देखने के लिए तत्पर हूं।

अब मैं आपको कोल्ड प्ले का लुत्फ उठाने के लिए छोड़े जाता हूं, मैं अपनी बात एक संगीतमय नोट पर खत्म करता हूं।

कलाकारों ने हमेशा एक पीढ़ी को प्रेरित किया है, मेरे भी कुछ अपने आइडल्स हैं।

लेकिन, आप शायद बॉब डायलन, नोरा जोंस, क्रिस मार्टिन और ए.आर. रहमान से ज्यादा परिचित हैं।

डायलन का एक परिवर्तनकारी गीत उद्धृत कर रहा हूं, यह आज भी उतना ही अर्थपूर्ण है, जितना कि 1960 में था, जब इसे पहली बार गाया गया था।

देश भर से माता और पिता आओ,

उसकी आलोचना नहीं करो, जो आपकी समझ में नहीं आता।

आपके बेटे और बेटियां आपके आदेश से परे हैं।

आपके पुराने तरीकों की अब उम्र ढलने लगी है।

अगर अपना हाथ नहीं बढ़ा सकते तो नए से अलग हो जाओ।

समय के साथ वे बदल रहे हैं।…

बड़ों को ज्ञान की इन बातों को सीखना चाहिए।

हमें वास्तव में रास्ते से हट जाना चाहिए, समय के साथ वे बदल रहे हैं।

व्यक्तिगत तौर पर, मुझे हमेशा ही युवा शक्ति ने प्रेरित किया है।

भारत एक युवा राष्ट्र है।

हमारा भविष्य वैसा बनेगा जैसी आपकी चाह होगी, और जैसा काम आप करेंगे।

इसलिए, मुझे उम्मीद है कि आप भी इस लम्हे को हाथ से नहीं जाने देंगे और बदलाव की उस बयार के साथ हो लेंगे जो हमारे देश को बदल रही है।

क्योंकि, क्रिस ने अपने गीत में कहा है,

आप वो बदलाव देख सकते हो, जो चाहते हो,

वही बनो, जो बनना चाहते हो,

जो कुछ भी तुम चाहते हो वह सपने भर की दूरी पर है,

इस दबाव में, इस प्रभाव में,

हम आकार ले रहे हीरे हैं।

हम आकार ले रहे हीरे हैं।

धन्यवाद।

आनंद लें,

(ईश्‍वर आपके साथ रहे ।)