पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने राष्ट्रीय कैपिटल गुड्स नीति को अपनी मंजूरी दे दी है। कैपिटल गुड्स के क्षेत्र में यह अपने तरह की पहली नीति है जिसका उद्देश्य कैपिटल गुड्स के उत्पादन को बढ़ाना है। कैपिटल गुड्स के क्षेत्र में 2014-15 में 2,30,000 करोड़ रुपये का उत्पादन हुआ जिसे 2025 तक 7,50,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही इससे 8.4 मिलियन से 30 मिलियन तक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
नीति में निर्यात को वर्तमान में 27 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत होने की परिकल्पना की गई है। इससे भारत के घरेलू उत्पादन में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से बढ़ कर 80 प्रतिशत तक हो जाएगी। नीति में सभी उपक्षेत्रों में तकनीकों में सुधार, कौशल उपलब्धता को बढ़ावा, आवश्यक मानदंडों का पालन करने व एमएसएमई के पूंजीगत विकास व वृद्धि को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखा गया है।
इस नीति से ‘भारत को विश्वस्तरीय कैपिटल गुड्स केंद्र बनाने’ को साकार किया जा सकेगा। यह नीति समस्त उत्पादन में भी अहम भूमिका अदा करते हुए ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना को मजबूत आधार देगी।
नीति के उद्देश्यों को पूरा करने का जिम्मा भारी उद्योग विभाग का होगा जो कि समयबद्ध तरीके से इसके लिए तैयार रोडमैप के हिसाब से योजनाओं के लिए मंजूरी प्राप्त करेगा।
पृष्ठभूमिः
राष्ट्रीय कैपिटल गुड्स नीति का विचार पहली बार दिसंबर, 2014 में आयोजित ‘मेक इन इंडिया’ कार्यशाला में भारी उद्योग विभाग द्वारा प्रधानमंत्री के सामने रखा गया था। इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले इसके हिस्सेदारों, उद्योग के परामर्शदाताओं, अकादमिक लोगों व विभिन्न मंत्रालयों द्वारा गहन विचार विमर्श किया गया। इस नीति की मुख्य सिफारिशें व बातें इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विकास को तेजी देने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। नीति का लक्ष्य कैपिटल गुड्स क्षेत्र में परिवर्तनकारी रणनीतियां लागू करना है। इसमें जो मुख्य मसलों पर विचार किया गया है उसमें वित्तिय उपलब्धता, कच्चे माल, नवाचार व तकनीक, उत्पादकता, गुणवत्ता व पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन के तरीके, निर्यात को बढ़ावा देना व घरेलू मांग पैदा करना आदि।