पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लोक सभा में पेश उच्च न्यायालयों की वाणिज्यिक अदालतों, वाणिज्यिक डिवीजन और वाणिज्यिक अपीलीय डिवीजन बिल 2015 में आधिकारिक संशोधन को मंजूरी दे दी गई।
संशोधन इस प्रकार होंगे-
1. उपनियम 10 में उल्लिखित शब्द वाणिज्यिक अपीलीय डिवीजन की जगह वाणिज्यिक डिवीजन शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।
2. उपनियम 7 के पहले प्रावधान को यह स्पष्ट करने के लिए संशोधित किया जाएगा कि उक्त प्रावधान लंबित मामलों में भी इस्तेमाल होगा।
इससे डिवीजन बेंचों पर दबाव कम होगा। उपनियम 7 के पहले प्रावधान से उक्त प्रावधान में और स्पष्टता आएगी। इस संशोधन के संसद के मौजूदा सत्र में पेश होने की उम्मीद है। दसवें उपनियम में संशोधन के बाद मध्यस्थता के लिए उच्च न्यायालयों में दाखिल सभी आवेदन और अपीलें हाई कोर्ट के वाणिज्यिक डिवीजनों में एक जज वाली बेंच में सुनी जा सकती हैं।
पृष्ठभूमि:-
अध्यादेश के बदले बिल को लोकसभा में 07.12.2015 को पेश किया गया था। बिल के उप नियम 10 (1) और (2) के मुताबिक हाई कोर्ट में मध्यस्थता के मामले में दाखिल सभी आवेदन और अपीलों को ऐसे वाणिज्यिक अपीलीय डिवीजन में सुना जाना है, जिसमें दो जज के बेंच होंगे। इस संबंध में यह चिंता जताई गई थी इससे उच्च न्यायालयों का बोझ काफी बढ़ जाएगा।
21 अक्टूबर को 2015 को मंत्रिमंडल की बैठक में वाणिज्यिक अदालतों, हाई कोर्ट के वाणिज्यिक अपीलीय डिवीजन और वाणिज्यिक डिवीजन बिल 2015 के लिए अध्यादेश लाने की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद अध्यादेश के बदले बिल लाने को मंजूरी दी गई। इसी के मुताबिक राष्ट्रपति ने 23.10.2015 को अध्यादेश को मंजूरी दी थी।