पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2020 में 36वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस का आयोजन करने और भारतीय उपमहाद्वीप में भूगर्भ विज्ञान को प्रोत्साहन देने के लिए भारतीय सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 के अंतर्गत “36वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस” सोसायटी के गठन को अनुमति प्रदान की। कांग्रेस का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 2 से 6 मार्च, 2020 तक किया जाएगा। वर्ष 2018-19 तक प्रारंभिक तैयारी के लिए मंत्रिमंडल द्वारा 52 करोड़ रुपए की राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है और मुख्य कार्यक्रम से एक वर्ष पहले लागत की फिर से गणना करने पर अतिरिक्त राशि आवंटित की जाएगी।
36वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस( आईजीसी) का आयोजन खान और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से देश के वैज्ञानिकों और सह-मेजबान पड़ोसी देशों के सहयोग के साथ किया जाएगा। आशा है कि कांफ्रेस में विश्व भर से सात हजार से अधिक भूवैज्ञानिक भाग लेगें।
इस भूवैज्ञानिक कांग्रेस से संपूर्ण भूवैज्ञानिक समुदाय और भू विज्ञान से जुडे मुद्दे जिसमें खान अन्वेषण,खनन, पर्यावरणीय प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अध्ययन,प्राकृतिक आपदाओं का प्रबंधन आदि क्षेत्रो को लाभ प्राप्त होगा । इससे देश में भू-पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। कांफ्रेस के दौरान एक प्रदर्शनी “जियोएक्सपो-2020” का आयोजन भी किया जाएगा। जिसमें विश्व भर की प्रमुख खनन और धातु अन्वेषण कंपनिया भाग लेंगी। प्रदर्शनी में खनन,धातु अन्वेषण और आधारभूत ढांचे के विकास में लगी कंपनिया भाग लेंगी। इससे खनन के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं का विश्व के सामने प्रदर्शन हो सकेगा जिससे इन क्षेत्रों में विदेशी निवेश के अवसर सृजित हो सकेगें।
36वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस( आईजीसी) का आयोजन “भूविज्ञान-दीर्धकालिक विकास के लिए मूल विज्ञान” विषय पर किया जा रहा है। समारोह के आयोजन से देश में भूविज्ञान और भूवैज्ञानिक अनुसंधान को वैश्विक चुनौतियों को हासिल करने और प्राकृतिक संसाधनों की निरंतर खोज की चुनौती को प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। भारतीय उपमहाद्वीप में दस हजार से अधिक भूवैज्ञानिक हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों,विश्वविद्यालयों,उद्योगों और निजी क्षेत्र के उद्यमो में खनन अन्वेषण,भू-तकनीकी खोज,भूवैज्ञानिक मानचित्रण और मूल भूवैज्ञानिक संबधी गतिविधियों के अनुसंधान और विकास में कार्यरत हैं।
पृष्ठभूमि:-
भारत ने अगस्त 2012 में ब्रिस्बेन,आस्ट्रेलिया में आयोजित 34वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस में सह-मेजबान पडोसी देशों बांग्लादेश,नेपाल,पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ 36वें अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस के आयोजन का प्रस्ताव रखा था और इस प्रस्ताव को विश्व भर के भूवैज्ञानिक समुदाय का अपार समर्थन मिला।