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संसद के समक्ष भारत के राष्ट्रपति का अभिभाषण


माननीय सदस्यगण,

1.   मुझे 16वीं लोक सभा के चुनावों के बाद, संसद के दोनों सदनों के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले, मैं अपने साथी नागरिकों का हार्दिक अभिनंदन करता हूं जिन्होंने हाल में हुए लोक सभा चुनावों में बड़ी संख्या में भाग लिया। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम उन्हीं की वजह से यहां हैं। उनकी सेवा करना हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मैं इस नई लोक सभा के सदस्यों का भी अभिनंदन करता हूं। आप इन चुनावों में जनादेश प्राप्त करने में सफल हुए हैं और अब आप उनकी आशाओं, आकांक्षाओं और उनके सपनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मैं आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं और आशा करता हूं कि प्रचुर विधायी कार्य भरे आने वाले सत्र सार्थक और उपयोगी होंगे।

2.   यह बड़े संतोष का विषय है कि हाल के आम चुनाव सुचारु रूप से एवं काफी हद तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। मैं भारत के निर्वाचन आयोग और उससे जुड़े सरकारी तंत्र को सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराने के लिए बधाई देता हूं। इन चुनावों में हमारे नागरिकों द्वारा दर्शाई गई अभूतपूर्व रुचि हमारे जीवंत लोकतंत्र की गहराती जड़ों का द्योतक है। दूसरी विषय-वस्तुओं पर चर्चा करने से पहले मैं सशस्त्र बलों के उन सदस्यों के परिवारों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करता हूं जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया।

3.   मैं, लोक सभा के नए अध्यक्ष को इस गरिमापूर्ण पद पर सर्वसम्मति से चुने जाने के लिए बधाई देता हूं। लोक सभा ने अध्यक्ष पद के लिए लगातार दोबारा किसी महिला को चुनकर भारतीय समाज में महिलाओं के महत्त्व की सदियों पुरानी मान्यता को पुन: पुष्ट किया है।

माननीय सदस्यगण,

4.   यह उम्मीदों का चुनाव रहा है। यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। चुनावों में 66.4 प्रतिशत मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी और लगभग 30 वर्षों पश्चात् किसी एक ही पार्टी को मिला स्पष्ट जनादेश लोगों की बढ़ी हुई आकांक्षाओं और उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही पूरा किया जा सकता है। मतदाताओं ने जाति-पंथ, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं को तोड़ा है और उन्होंने सुशासन द्वारा विकास के पक्ष में एकजुट होकर निर्णायक मत दिया है।

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