पीएमइंडिया
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज यहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थावर सम्पदा निवेश न्यासों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 के अंतर्गत एक पात्र वित्तीय विलेख/संरचना के रूप में मान्यता प्रदान करने की मंजूरी दे दी है।
इस मंजूरी से किराया अर्जित करने वाली पूर्ण स्थावर सम्पदा परियोजनाओं में विदेशी निवेश किए जाने की सम्भावना है। अभी तक ऐसे निवेश पर पाबंदी थी।
इस निर्णय के परिणामस्वरूप सेबी (आरईआईटी) विनियम 2014 के अंतर्गत पंजीकृत और नियमित संस्थाएं विदेशी निवेश आमंत्रित कर सकेंगी, जिस पर अभी तक फेमा विनियमों के तहत पाबंदी थी। स्थावर सम्पदा निवेश न्यासों को निवेश के एक विलेख के रूप में मंजूरी देने का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली पर दबाव कम करना है, जिस पर यह क्षेत्र धन के लिए निर्भर रहता है। इससे बैंकों के धन को मुक्त किया जा सकेगा और निर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। स्थावर सम्पदा निवेश न्यास अनिवासी भारतीयों के निवेश सहित विदेशी और घरेलू स्रोतों से दीर्घावधि की वित्त व्यवस्था आकर्षित कर सकेंगे। इससे भूमि और भवन क्षेत्र के लिए नई इक्विटी उपलब्ध हो सकेगी।
वित्त मंत्री ने 2014-15 के बजट भाषण में स्थावर सम्पदा निवेश न्यासों की स्थापना का प्रस्ताव किया था ताकि उनका इस्तेमाल भूमि सम्पदा क्षेत्र में अनेक देशों से निवेश जुटाने के लिए किया जा सके।