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स्‍पैक्‍ट्रम साझेदारी पर दिशा-निर्देशों को मंजूरी


डिजिटल इंडिया का सपना पूरा करने के लिए आवश्‍यक स्‍पैक्‍ट्रम क्षमता सुधार तथा गुणवत्‍ता सम्‍पन्‍न सेवा की सरकारी प्रतिबद्धता पूरी करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आज केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के अनुसार स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने संबंधी दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी।

अन्‍य विषयों के अलावा स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने के तौर-तरीके निम्‍न होंगे:-

(क). पहले दोनों लाइसेंसियों के पास समान बैंड में स्‍पैक्‍ट्रम वाले लाइसेंसशुदा क्षेत्र (एलएसए) में एक्‍सेस सेवा प्रदाताओं के लिए स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने की अनुमति दी जाएगी। स्‍पैक्‍ट्रम को लीज़ पर देने की अनुमति नहीं होगी। स्‍पैक्‍ट्रम उपयोग शुल्‍क (एसयूसी) के उद्देश्‍य से लाइसेंसी को पूरे लाइसेंसशुदा सेवा क्षेत्र में बैंड विशेष में पूरे स्‍पैक्‍ट्रम को साझा करने वाला माना जाएगा।

(ख). व्‍यावसायिक स्‍पैक्‍ट्रम सहित सभी एक्‍सेस स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने योग्‍य होंगे, बशर्ते दोनों लाइसेंसियों के पास समान बैंड में स्‍पैक्‍ट्रम है।

(ग). स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने का अधिकार प्रासंगिक लाइसेंस शर्तों के पालन तथा लाइसेंस प्रदाता/सरकार द्वारा समय-समय पर निर्देशित शर्तों के पालन करने की शर्त के साथ होगा।

(घ). यह सिद्ध होने पर कि लाइसेंस की शर्तों का उल्‍लंघन हुआ है और लाइसेंस प्रदाता के पास लाइसेंस रद्द करने का आदेश है, तो ऐसी स्थिति में लाइसेंसी स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने का पात्र नहीं होगा।

(ङ). निम्‍नलिखित परिस्थितियों में स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने की अनुमति दी जा सकती है:

1). जहां दोनों कम्‍पनियां मार्च 2013 में हुई नीलामी में 800 मेगाहर्टस में स्‍पैक्‍ट्रम के संबंध में स्‍पष्‍टीकरण के साथ बाजार मूल्‍य प्रदत्‍त स्‍पैक्‍ट्रम साझा करती हैं वहां स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब शेष अवधि के स्‍पैक्‍ट्रम उपयोग अधिकार पर नवीनतम नीलामी मूल्‍य तथा मार्च 2000 नीलामी मूल्‍य के अंतर का समानुपातिक आधार पर भुगतान हुआ है।

2). जहां स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने वाली दोनों कम्‍पनियों के पास प्रशासनिक रूप से आवंटित स्‍पैक्‍ट्रम है।

3). ऐसे मामले में जहां स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने वाली एक कम्‍पनी ने नीलामी के जरिए या उदार स्‍पैक्‍ट्रम से स्‍पैक्‍ट्रम प्राप्‍त किया है और दूसरी कम्‍पनी को प्रशासनिक रूप से स्‍पैक्‍ट्रम आवंटित हुआ है वहां प्रशासनिक रूप से आवंटित स्‍पैक्‍ट्रम के उदारीकरण के लिए स्‍पैक्‍ट्रम शुल्‍क का भुगतान करने के बाद ही स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने की अनुमति दी जाएगी।

(च). टेक्‍नोलॉजी का उपयोग नोटिस आवंटन आवेदन (एनआईए/लाइसेंस) के नियम और शर्तों से शासित होगा।

(छ). दोनों लाइसेंसी हस्‍तक्षेप नियमों सहित साझेदारी संबंधी दिशा-निर्देशों के परिपालन के लिए व्‍यक्तिगत और सामूहिक रूप से उत्‍तरदायी होंगे।

(ज). स्‍पैक्‍ट्रम साझेदारी दो लाइसेंसियों द्वारा साझेदारी तक सीमित होगी बशर्ते समान बैंड में कम से कम दो स्‍वतंत्र नेटवर्क दिए गए हैं।

(झ). साझेदारी के बाद प्रत्‍येक लाइसेंसी की स्‍पैक्‍ट्रम उपयोग शुल्‍क (एसयूसी) दर योगफल सकल राजस्‍व (एजीआर) के 0.5 प्रतिशत बढ़ जाएगी।

(ञ). स्‍पैक्‍ट्रम सीमा के लिए निर्धारित सीमाएं व्‍यक्तिगत रूप से दोनों लाइसेंसियों पर लागू होंगी। साझा करने के बाद किसी लाइसेंसी द्वारा स्‍पैक्‍ट्रम रखने की गणना साझा किए जा रहे बैंड में दूसरे लाइसेंसी द्वारा रखे गए स्‍पैक्‍ट्रम का 50 प्रतिशत जोड़कर की जाएगी। बैंड में लाइसेंसी द्वारा रखे गए मूल स्‍पैक्‍ट्रम में अतिरिक्‍त स्‍पैक्‍ट्रम के रूप में जुड़ जाएगा।

मंत्रिमंडल ने कारोबारी सहजता के सिद्धांत से निर्देशित होते हुए यह निर्णय लिया कि स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने वाले दोनों लाइसेंसी प्रस्‍तावित साझेदारी की तिथि से कम से कम 45 दिन पहले स्‍पैक्‍ट्रम उपयोग अधिकार साझा करने के लिए संयुक्‍त रूप से पूर्व सूचना देंगे। दोनों लाइसेंसी इस बात की अंडरटेकिंग देंगे कि दोनों स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने और लाइसेंस शर्तों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं और दोनों इस बात पर सहमत हैं कि स्‍पैक्‍ट्रम के उपयोग अधिकार साझा करने के लिए सूचना देने के समय यदि सिद्ध होता है कि दोनों में से किसी लाइसेंसी ने दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं किया है तो सरकार को उचित कार्रवाई करने का अधिकार होगा और ऐसी कार्रवाईयों में साझेदारी व्‍यवस्‍था समाप्‍त करने की कार्रवाई भी शामिल की जा सकती है। सूचना देने के समय प्रत्‍येक सेवा क्षेत्र के लिए प्रत्‍येक लाइसेंसी द्वारा 50 हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस देय होगी। इस फीस में समय-समय पर संशोधन भी हो सकता है।

संदर्भ:-

अधिकतर देशों में सरकार ऐतिहासिक रूप से स्‍पैक्‍ट्रम आवंटन के लिए प्रक्रिया तय करती है। दूर संचार क्षेत्र पूंजी प्रोत्‍साहन क्षेत्र है इसलिए सामान्‍य रूप से इसमें लम्‍बी अवधि के लिए कार्य दिए जाते हैं। पिछले दशक में स्‍पैक्‍ट्रम आवंटन के लिए अनेक देशों ने बाजार व्‍यवस्‍था को अपनाया है। भारत में पहले प्रशासनिक आवंटन प्रक्रिया से स्‍पैक्‍ट्रम आवंटित होते थे और 2010 से नीलामी प्रक्रिया के जरिए 20 वर्षों की अवधि के लिए स्‍पैक्‍ट्रम दिया जाता है। 20 वर्ष की इस अवधि में कुछ ऑपरेटर उपभोक्‍ता प्राप्‍त कर लेते हैं और अन्‍य ऑपरेटरों की तुलना में तेज गति से विकास करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कुछ कम्‍पनियां स्‍पैक्‍ट्रम का उपयोग नहीं कर पातीं और अन्‍य ऑपरेटर स्‍पैक्‍ट्रम कस अभाव महसूस करते हैं क्‍योंकि स्‍पैक्‍ट्रम सीमित संसाधन है। इस प्रकार एक ओर सीमित प्राकृतिक संसाधन वाला स्‍पैक्‍ट्रम अनुपयोगी रह जाता है और दूसरी ओर अन्‍य सेवा प्रदाताओं के स्‍पैक्‍ट्रम अभाव के कारण उपभोक्‍ताओं को गुणवत्‍ता सम्‍पन्‍न सेवा नहीं मिलती। स्‍पैक्‍ट्रम एक सेवा क्षेत्र के लिए सेवा प्रदाता को आवंटित किया जाता है। सेवा क्षेत्र एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र होता है और वह एक साथ राज्‍य की सीमाओं पर समाप्‍त होता है। विभिन्‍न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाताओं की स्‍पैक्‍ट्रम आवश्‍यकताएं उनके उपभोक्‍ताओं के स्‍वरूप पर निर्भर करती हैं।

स्‍पैक्‍ट्रम साझेदारी ऑपरेटरों को भौगोलिक क्षेत्र विशेष में उपयोग के लिए अपना स्‍पैक्‍ट्रम पूल करने की अनु‍मति देता है और इस प्रकार एक-दूसरे की आवश्‍यकता पूरी होती है और स्‍पैक्‍ट्रम का सक्षम तरीके से उपयोग सुनिश्चित होता है। स्‍पैक्‍ट्रम पूल करने से दोनों ऑपरेटरों के लिए स्‍पैक्‍ट्रम सक्षमता बढ़ती है क्‍योंकि दूरसंचार शुल्‍क वहन करने की क्षमता स्‍पैक्‍ट्रम रखने के मूल्‍य के सीधे अनुपात में नहीं होती बल्कि यह एक सेवा प्रदाता की कुल ट्रैफिक क्षमता से बहुत अधिक होती है। ट्राई ने कहा है कि स्‍पैक्‍ट्रम क्षमता में वृद्धि का लाभ स्‍पैक्‍ट्रम परिणाम के साथ गैर-रेखीय वृद्धि करती है इसलिए यह संसाधनों के अधिकतम उपयोग में मदद देती है और दूरसंचार विकास के लिए उचित माहौल बनाती है।

नवम्‍बर 2012 में तत्‍कालीन सरकार ने स्‍पैक्‍ट्रम साझा करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी लेकिन विस्‍तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए थे। इसलिए नीति अमल में नहीं लाई जा सकी।

यह विषय वर्तमान सरकार के विचाराधीन था क्‍योंकि इस तरह की व्‍यवस्‍था से संसाधनों के अधिकतम उपयोग में मदद मिलती है और गुणवत्‍ता सम्‍पन्‍न सेवा सुनिश्चित करने के लिए लाभकारी ट्रैफिक क्षमता बढ़ती है।