मै सामाजिक मनोरचना बदलने की दिशा में कार्य करता हूं | जब किसी को हम विकलांग कहते हैं तब हमारा ध्यान उनके शरीर के कौन से हिस्से में गड़बड़ है उनकी तरफ होता है | उनमें जो अपार शक्ति पड़ूी है उनकी तरफ नहीं होता है और इसलिये मैंने कहा की सरकार इन विकलांग जैसे शब्दों से बाहर आये और उनके पास शायद एक अंग नहीं है पर बाकी सब अंगो की ताकत दिव्यांग बराबर है और उसमें से यह भाव पैदा होता है। –सामाजिक अधिकारिता शिविर, नवसारी, गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी