नरेन्द्र, मेरे प्रिय मित्र, और मैं यह बात यूं ही नहीं कह रहा हूं। मैं कहूंगा कि आप सिर्फ मित्र ही नहीं, उससे भी बढ़कर एक भाई हैं। कई मायनों में हम दोनों भाई जैसे हैं।