हां, मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत तौर पर चार बार मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ लेकिन इससे पहले कि मैं इस पर जाऊं, प्रधानमंत्री को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। आप अपनी प्रयास से इस राष्ट्र की पूरी क्षमता को पूरित कर सकें। अंततः हमारे पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो जमीन से उठ कर हमारे बीच आए, जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए और जो आम आदमी की नब्ज को पहचानते हैं और मेहनत से काम करते हैं। उनके करीबी एक कैबिनेट मंत्री ने एक मुझे उनके बारे में बताया कि वे, 'कर्मयोगी हैं जो बिना थके हुए न केवल काम करते हैं बल्कि दूसरों को भी उनके पंजों पर रखते हैं।' उसका परिणाम दिखाई देता हैः आर्थिक विकास हो रहा है जो हमारे पड़ोसियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है, विरासत में मिली अराजकता से मुक्ति पाना कोई आसान काम नहीं है। यहां समस्याएं जरूर हैं। उनमें से कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो सालों से दबी हुई थीं और अब भयानक रूप लेकर उभरी हैं, कश्मीर में शुरू हुई हिंसा, असहिष्णुता पर बहस, गौ हत्या की बदसूरत पहलू आदि ऐसी ही समस्याएं हैं। कुछ अभिजात लोगों के पेट में यह बात नहीं पच रही कि एक चाय बेचने वाला लड़का प्रधानमंत्री कैसे बन गया। मैं आपका ध्यान उस ओर आकर्षित करना चाहुंगा कि जब भी समुद्र मंथन जैसी चीजें शुरू होती हैं तो सबसे पहले हलाहल (जहर) बाहर निकलता है और बाद में अमृत। हमें अमृत का इंतजार करना चाहिए और विश्वास है कि वह निश्चय ही प्रकट होगा। अब मेरी नरेंद्र मोदी जी के साथ व्यक्तिगत मुलाकात के बारे में। उनसे मेरी पहली मुलाकात उस वक्त हुई थी जब वह केवल गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मेरी आत्मकथा, अप्रेंटिस्ड टू ए हिमालयन मास्टर के गुजराती अनुवाद का शुभारंभ किया जा रहा था। श्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक तौर पर बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाना था और उन्हें शाम को दिल्ली जाना था। इसलिए मुझे गांधी नगर स्थित उनके आवास पर सुबह ही बुलाया गया था। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से हृदय से मेरा स्वागत किया और यह मानते हुए कि मैं वास्तव में कोई नहीं था मैं उनके शिष्टाचार और धैर्य से दंग रह गया। एक ऐसा व्यक्ति जो एक प्रधानमंत्री बनने जा रहा था, वह बेहद अच्छा था। जब मैंने उनसे यह बात साझा की कि मैं सांप्रदायिक सौहार्द के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक एक मैराथन वाक की शुरुआत कर रहा हूं तो उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया और कहा वो गुजरात में हमारी मदद करेंगे। मुझे याद है जब मैंने उनसे कहा कि वह संभवतः उस वक्त दिल्ली में रहेंगे तो उन्होंने बस मुस्करा दिया और कुछ नहीं बोला। मेरी उनसे अगली मुलाकात उनके प्रधानमंत्री बनने के करीब एक महीने बाद ही हुई। मैं अमेरिका जा रहा था और एक बैठक के लिए बुलाया गया। मैंने उन्हें बधाई दी। एक बार फिर से उन्होंने बड़ी विनम्रता 7 रेस कोर्स रोड पर स्थित आवास पर मेरा स्वागत किया। केवल हम दोनों ही थे कोई सुरक्षा या सचिव नहीं। हमने बात की। वह अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेने के लिए तैयार थे। तीसरी मुलाकात बैंगलोर में आयोजित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुई। पदयात्रा बैंगलोर से होकर जा रही थी। वह मुझसे राज भवन पर मिले। उस वक्त उन्होंने मेरे स्वास्थ्य और वाक कैसी चल रही है के विषय में पूछा यहां तक की अच्छी सलाह भी दी। चौथी मुलाकात एक बार फिर से 7 रेस कोर्स रोड में ही हुई। वाक दिल्ली के करीब था। उन दिनों असहिष्णुता का मुद्दा मीडिया में छाया हुआ था। उन्होंने गंभीर चिंता जताई और एक बार फिर से साम्प्रदायिक सद्भाव लाने की कोशिश के लिए शुभकामनाएं दी। हालांकि, इस सबसे बढ़कर यह था कि जैसे वाक सुबह करीब 6:30 बजे गुजरात में पहुंची मेरे सहयोगी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संपर्क करने की कोशिश की जा रही थी। मेरे सुखद आश्चर्य की कल्पना कीजिए, जैसे ही लाइन जुड़ा और प्रधानमंत्री ने मुझसे सीधे बात कीः 'आपका गुजरात में स्वागत है। सब ठीक है? आपका सेहत कैसा है।' एक विशाल देश का प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए। अनगिनत जिम्मेदारियों के बावजूद वाक पर नजर बनाए रखा और वाक पर नजर बनाए रखना चाहिए और जैसे ही वाक ने गुजरात में प्रवेश किया सटीक समय पर राजनीतिक तौर पर मेरे जैसे तुच्छ व्यक्ति से बातचीत करने के बारे में भी सोच लिया और खुद से बात किया। मैं इसे एक व्यक्ति के सहृदय पक्ष की विशेषता ही मानूंगा जिसका कुछ लोग अपमान करना चाहते हैं। उनके 66वें जन्मदिन और उनकी सरकार के तीसरे साल के लिए मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन एक निवेदन भी करता हूं सर, अपने जन्मदिन पर सद्भावना के रूप में, क्या आप व्यक्तिगत रूप से मेरे गृह राज्य में उत्तरी केरल में लेफ्ट और राइट के बीच छिड़ी भयानक हिंसा का बातचीत के द्वारा समाधान निकालने के लिए आगे आएंगे और शायद कश्मीर में भी ऐसा ही करना हो। जहां तक केरल की बात है मुझे यह वास्तविकता पता है कि दोनों पक्ष बातचीत करना चाहते हैं। यही समय है कि इस गतिरोध को खत्म किया जाए और केवल आप प्रधानमंत्री के टू के (केरल से कश्मीर) ऐसा कर सकते हैं।