कुछ साल पहले तक भारत में खनन उद्योग में भ्रष्टाचार चरम पर था। एक समय था जब प्रमोटर चेहरे को देखकर आवंटन का फैसला करते थे। मोदी सरकार का ध्यान कोयला और गैर-कोयला खनिजों की नीलामी में पारदर्शीता लाने पर है।