केंद्रीय खेल मंत्री श्री मनसुख भाई मांडविया, खेल राज्य मंत्री बहन रक्षा खडसे जी, आप सभी युवा athletes, Coaches, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।
आप सभी के बीच आना, ये मुझे भी ऊर्जा से भर देता है। इतने सारे पदक वीर और उन सबको एक साथ मिलना, ये कोई मामुली बात नहीं है। ये बहुत सुखद एहसास होता है। आप सब युवा athletes इस बात के उदाहरण हैं, कि जुनून जब जीत में बदलता है, तो वो कैसे medals के साथ – साथ, चेहरे की चमक भी लेकर आता है। और देश तो चमकता ही है।
साथियों,
आपने 140 करोड़ देशवासियों को गौरव का मौका दिया है। क्योंकि सबसे बड़ी सफलता, और सफलता अगर कुछ होती है, तो वो है तिरंगे की शान बढ़ाना। आपने तिरंगे की शान बढ़ाई है, तिरंगे का मान बढ़ाया है, और इसलिए आपकी सफलता केवल आपकी नहीं है, ये देश के करोड़ों-करोड़ों नागरिकों की सफलता है। मैं सभी देशवासियों की ओर से और आप सबको एक बार फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। साथ ही आपके कोच, आपके सपोर्ट स्टाफ और आपके परिवार का भी, मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ।
साथियों,
आज हमारे पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जन्म जयंती भी है। उनका जीवन और उनका विजन, हम सभी के लिए प्रेरणा है। मैं उन्हें भी सादर नमन करता हूं।
साथियों,
इस बार एशियन गेम्स कई मायनों में हमारे लिए यादगार रहे हैं। हमारी हॉकी की महिला और पुरुष, दोनों टीमें यहाँ मौजूद हैं। दोनों टीमों ने इस बार गोल्ड मेडल जीता है। और खासकर हमारी महिला हॉकी टीम, आपने तो गोल्ड लाकर 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है। क्रिकेट में हमारी दोनों टीमों ने लगातार दूसरी बार मेडल जीता है, और इतना ही नहीं, अपना ही रिकॉर्ड दोहरा दिया है। कबड्डी में भी हमारी पुरुष और महिला दोनों ने, दोनों टीमों ने गोल्ड जीता है। इसी तरह तीरंदाजी में पांच गोल्ड, और जहां पंच वहां परमेश्वर, शूटिंग में शानदार प्रदर्शन, बॉक्सिंग में, कुश्ती में बड़ी-बड़ी सफलता, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड, अट्ठाइस (28) साल बाद वेटलिफ्टिंग में मेडल, उन्नीस सौ बयासी (1982) के बाद पहली बार मैराथन में भारत को मिली सफलता, ये वाकई बहुत ही सुखद है।
साथियों,
मैं हमारी बेटियों की खास तौर पर सराहना करना चाहता हूं। भारत ने जो 85 मेडल जीते हैं, उनमें से 38 मेडल हमारी वूमन एथलीट्स ने जीते हैं। और इनमें 11 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं। और ये मेडल्स केवल एक संख्या नहीं हैं, ये नए भारत की एक सशक्त तस्वीर है। आज भारत ऐसे खेलों में भी मेडल जीत रहा है, जिनमें एशियन गेम्स के इतिहास में हमें पहले कभी मेडल नहीं मिला था। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस, और सेलिंग की कुछ स्पर्धाएं, इनमें हमारे खिलाड़ियों ने पहली बार मेडल जीतकर नया इतिहास रचा है।
साथियों,
अब हमें खेलों में और भी बड़ी ऊंचाइयों तक जाना है। जाना है ना? और ज्यादा करना है ना? मैं कुछ संकल्प आपके सामने रखूंगा। और आप सबको पूरे जोश से कहना है, We will Do it! तो मेरे साथ बोलिए-
हर मैदान पर तिरंगे की शान, We will Do it!
हर मैदान पर तिरंगे की शान, We will Do it!
खेलों में भारत की नई पहचान, We will Do it!
हर खेल में नए चैंपियंस, We will Do it!
हमारे नाम और नए रिकॉर्ड्स, We will Do it!
साथियों,
अभी हम जिस स्टेडियम में हैं, वो मेजर ध्यान चंद जी के नाम पर है। हॉकी के प्रति उनका समर्पण इतना ज्यादा था, कि वो रात में भी घंटों-घंटो हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। उनका ये परिश्रम हमें बार-बार याद दिलाता है, कि संकल्प और सपने एक दिन में पूरे नहीं होते। इसके लिए वर्षों का धैर्य और लगातार परिश्रम, ये अनिवार्य होता है।
साथियों,
भारत ने भी बीते 12 वर्षों में बहुत धैर्य और परिश्रम के साथ, अपने स्पोर्ट्स-पर्सन और स्पोर्ट्स इकोसिस्टम पर, बहुत लगन से काम किया है। आप देखिए, एक समय बड़े टूर्नामेंट्स में भारत केवल गिने चुने मेडल्स ला पाता था। कितने ही खेलों का तो देश में पता ही नहीं होता था कि ये भी खेले जाते हैं, पहले ओलम्पिक जैसा इतना बड़ा event होता था, और आधे से ज्यादा खेलों में हमारे देश का कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं होता था। आप सोचिए, अगर हम
compete ही नहीं करेंगे तो मेडल कहाँ से लाएँगे?
साथियों,
हमने ये संकल्प लिया, हम इस निराशादी मानसिकता को हटाएँगे! और नतीजा ये है कि आज, हर ग्लोबल platforms पर हमारा प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है।
साथियों,
देश में ये बदलाव आया कैसे? ये बदलाव आया है, उसी स्पिरिट से जिसकी बदौलत आपने सफलता हासिल की है। बीते 10-12 वर्षों में देश ने लगन, निष्ठा से निरंतर प्रयास किए, एक दूरगामी विजन के साथ काम किया, खेलों के लिए एक पारदर्शी और आधुनिक ecosystem बनाया। जैसे कि आप सब जानते हैं, हमने Target Olympic Podium Scheme शुरू की। हमने ‘खेलो इंडिया स्कीम’ शुरू की। समय के साथ, इसका दायरा और व्यापक बनाया। खेलो इंडिया के विस्तार और स्पोर्ट्स फेडरेशंस को मजबूत करने के लिए, जैसा अभी मनसुख भाई ने बताया, 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा allocate किए हैं।
साथियों,
आज देश में एक हजार से ज्यादा खेलो इंडिया सेंटर्स बनाए गए हैं। स्टेडियम और मिनी स्टेडियम, मल्टी-पर्पज़ हॉल स्पोर्ट्स के लिए तैयार किए हैं। एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल ग्राउंड, हॉकी ग्राउंड, स्विमिंग पूल, हजारों ऐसे स्पोर्ट्स इनफ्रास्ट्रक्चर छोटे-बड़े शहरों में बन रहे हैं। इस स्कीम के तहत खिलाड़ियों को भी सीधे मदद दी जा रही है। उन्हें Out-of-Pocket Allowance दिया जा रहा है। TOPS स्कीम के तहत खिलाड़ियों को 50 हजार रुपए महीने मिल रहे हैं। अगर किसी खेल में कोचिंग के लिए देश से बाहर जाने की जरूरत है, तो सरकार उसे भी facilitate कर रही है, उसके लिए आर्थिक सहायता दे रही है।
साथियों,
युवाओं को खेलने और compete करने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलें, इसके लिए विंटर गेम्स जैसे events शुरू किए गए, सांसद खेल प्रतियोगिताएं शुरू की गईं। देश ने नई स्पोर्ट्स पॉलिसी, खेलो भारत नई नीति बनाई। हमारे दिव्यांग खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उनके लिए भी खेलों में बेहतर अवसर और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। और इसीलिए ही, आज हर खिलाड़ी को ये भरोसा होता है कि उसकी पूरी जर्नी में देश उसके साथ खड़ा है। और, जब खिलाड़ी को ये अहसास रहता है, तो, वो देश के लिए क्या करके दिखाता है, आप सब खुद इसके उत्तम उदाहरण हैं।
साथियों,
इस बार एशियन गेम्स में टीम इंडिया के कई खिलाड़ी ऐसे भी थे, जिनकी उम्र 15-17 साल ही है। इतनी कम उम्र में इन खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। देशवासियों का दिल जीता है। ये दिखाता है कि, सफलता के लिए उम्र कोई बंदिश नहीं होती। बल्कि, खेलों में तो कम उम्र से की गई शुरुआत एक added advantage होती है। इसीलिए, हमारी कोशिश है कि खेलों में प्रतिभा की पहचान कम उम्र से ही हो। पांच से पंद्रह वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनकी ट्रेनिंग पर हमारा विशेष फोकस है। आने वाले वर्षों में हजारों नए खिलाड़ियों को खेलो इंडिया, और इमर्जिंग खेलो इंडिया के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए अवसर मिलेंगे। हमें आने वाली खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी को और मजबूत करना है। 2028 में लॉस एंजिलिस ओलंपिक्स हैं। 2030 में भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। और 2036 में ओलंपिक्स की मेजबानी करना भी भारत की आकांक्षा है। इसी को देखते हुए मैंने लालकिले से talent hunt अभियान चलाने की बात कही है। आज गाँव-गाँव तक जाकर प्रतिभाओं को तलाशा जा रहा है, और उन्हें तराशा भी जा रहा है। यही खिलाड़ी आने वाले समय में भारत के लिए मेडल्स लेकर आएंगे।
साथियों,
हमारे सपने बड़े हैं, हमारे संकल्प भी बड़े हैं, और इन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी आज हिन्दुस्तान के पास है, हर हिन्दुस्तानी के पास है। और इसलिए, मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ-
भारत में बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स, We will Do it!
भारत में बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स, We will Do it!
भारत में बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स, We will Do it!
टॉप स्पोर्टिंग नेशंस में भारत, We will Do it!
ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बने भारत, We will Do it!
भारत में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, We will Do it!
भारत के हर कोने से एक चैंपियन, We will Do it!
साथियों,
एशियन गेम्स में हमारी सफलता देश के बदलते मिजाज का भी उदाहरण है। ये एक example है कि कैसे, आज देश का युवा हर बुलंदी को छूने के लिए अधीर है। ऐसा कोई मुकाम नहीं है, जो भारत के युवाओं के हौसलों से बड़ा हो! ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है, जो हमारी युवाशक्ति के सामर्थ्य के बाहर हो! संभावनाओं का असीम आकाश सामने है, और मंजिल भारत का युवा खुद तय कर रहा है। इसीलिए, देखते ही देखते, भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ecosystem बन गया है। हमारे युवा आज स्पेस सेक्टर में अपनी कंपनियां बना रहे हैं, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, यही युवा, डिफेंस सेक्टर में नई तकनीक विकसित कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नए प्रयोग कर रहे हैं। और ये बदलाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, जैसे खेलों में आज दूर-दराज की प्रतिभाओं को भी मौका मिल रहा है, वैसे ही, आज स्टार्टअप्स, रिसर्च और दूसरे उद्यमों में भी, छोटे शहरों और गाँवों के युवा नए आइडिया लेकर आगे आ रहे हैं। इस आत्मविश्वास के पीछे एक बड़ा भरोसा है। बीते एक दशक में देश ने जो व्यवस्थाएं विकसित की हैं, उनसे युवाओं को भरोसा मिला है कि, वे बड़े सपने देख सकते हैं। उन्हें विश्वास है कि उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए देश का पूरा सामर्थ्य उनके साथ खड़ा है।
साथियों,
हमारे प्रयासों का लाभ केवल मैदान में खेलने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। स्पोर्ट्स कोचिंग, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए नए करियर के अवसर बन रहे हैं। खेलों के विकास के साथ-साथ इनसे जुड़े अनेक प्रोफेशन भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यम के नए रास्ते बने हैं।
साथियों,
आज हम जिस किसी भी फील्ड में हैं, हमें अपनी सफलता के लिए परिश्रम तो करना ही है, साथ ही, नई पीढ़ी को गढ़ने की जिम्मेदारी भी उठानी है। अब आपके पास इंटरनेशनल टूर्नामेंट का भी अनुभव है, और इसलिए, मेरा आग्रह होगा, आप कुछ समय उन बच्चों को जरूर दें, जो आपकी तरह आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं। आपके पसीने से उनके सपनों को सींचना है, सफलता तब आती है। जब भी अवसर मिले, अपने गांव, अपने शहर के बच्चों से मिलिए। अलग-अलग स्कूलों में जाइए। जिन मैदानों पर आपने खेलना शुरू किया था, वहां जरूर जाइए। आपके अनुभव उन बच्चों के बहुत काम आ सकते हैं। हो सकता है, आपकी एक छोटी-सी बात किसी बच्चे को खेलों में आगे बढ़ने का हौसला दे दे।
साथियों,
देश के युवाओं को आपसे केवल स्पोर्ट्स की ही प्रेरणा नहीं मिलती है। क्योंकि, खेल की भूमिका केवल मैदान तक ही सीमित नहीं है। खेल हमें जीवन में अनुशासन सिखाते हैं, जीवन में गिरकर फिर से खड़े होने की, हारकर जीतने की सीख खेलों से मिलती है। एक लक्ष्य के लिए कैसे लंबे समय तक अटल रहना है, कैसे परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना है, स्पोर्ट्स से ये हमारे हर रोज के जीवन का हिस्सा बन जाता है। यही स्पोर्ट्सपर्सन स्पिरिट जीवन भर काम आती है।
साथियों,
मैं हमेशा कहता हूं, जो खेलेगा, वो खिलेगा। आप भी खेलते रहिए, खिलते रहिए, आने वाली प्रतियोगिताओं और भविष्य के सभी प्रयासों के लिए, एक बार फिर मेरी तरफ से आपको अनेक-अनेक शुभकामनाएं। आपका ये उत्साह, ये आत्मविश्वास, यही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इसी आत्मविश्वास के साथ हमें भारत को नई बुलंदियों तक पहुंचाना है। तो आइए, एक बार फिर पूरी ताकत के साथ मेरे साथ बोलिये –
विकसित भारत We will Do it!
विकसित भारत AT Twenty Forty Seven, We will Do it!
We will Do it!
टॉप थ्री इकोनॉमी, We will Do it!
टॉप थ्री इकोनॉमी, We will Do it!
आत्मनिर्भर भारत, We will Do it!
आत्मनिर्भर भारत, We will Do it!
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब, We will Do it!
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब, We will Do it!
टेक्नॉलजी में भारत की लीडरशिप, We will Do it!
अंतरिक्ष में कदम, We will Do it!
ओलंपिक्स का आयोजन, We will Do it!
नए खेलों में मेडल्स, We will Do it!
Yes, We will Do it!
बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।
Our Asian Games champions have made the Tricolour fly high! Their achievements show what passion, perseverance and belief can achieve. https://t.co/m3gOPecQCo
— Narendra Modi (@narendramodi) October 15, 2026
You have made the Tricolour fly high and enhanced its honour and pride: PM @narendramodi to the Asian Games team https://t.co/pJazGfotrq
— PMO India (@PMOIndia) October 15, 2026
We will do it! https://t.co/5g0lLzSVsT
— PMO India (@PMOIndia) October 15, 2026
India is all set to become a global sporting powerhouse. https://t.co/x7T46sg91E
— PMO India (@PMOIndia) October 15, 2026