PMINDIA
मुझे पूछ रहे थे कि मैं हिन्दी में बोलू तो यहां translation करने की जरूरत है क्या? स्वामी जी स्वयं बताए कि कोई जरूरत नहीं, यहां सब हिन्दी समझते हैं। ये मेरा सौभाग्य है कि इस पवित्र उपक्रम में मुझे सरीक होने का अवसर मिला है। इतनी बड़ी संख्या में संतों की हाजिरी हो, इतने वरिष्ठ संत, इस उम्र में, इस समारोह में उपस्थित हो, ऐसा सौभाग्य कहां मिलता है।
कुछ दिन पहले मैं लंदन गया था। लोकतंत्र की बातें, मानवतावाद की बातें, women empowerment की चर्चाएं, दुनिया के देशों को लगता है ये सारे विचार वहीँ पर शुरू हुए, वही पर पैदा हुए और दुनिया को वही से मिले। जहां इस प्रकार की सोच है वहां पर मुझे उस महापुरुष के statue का अनावरण करने का सौभाग्य मिला। वे बसेश्वर जी, social reformers कैसे होते हैं, women empowerment क्या होता है, grass root level democracy की ताकत क्या होती है, सदियों पहले इसी धरती के महापुरुष बसेश्वर जी ने दुनिया को करके दिखाया। स्वीडन के पार्लियामेंट के स्पीकर उस अवसर पर मौजूद थे और जो मैंने समाज सुधार का महान काम करने वाले बसेश्वर जी की बातें सुनाई तो उनके लिए तो आश्चर्य था कि सदियों पहले भारत में महापुरुष का ऐसा चिंतन हुआ करता था और वो सिर्फ विचार नहीं व्यवहार भी था, आचरण भी था और करके दिखाया था। आज उसी परंपरा की एक कड़ी के साथ मुझे जुड़ने का सौभाग्य मिला है। मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानता हूं।
सारे विश्व में, इस बात के विषय में बहुत कम जानकारी है और कभी-कभी तो विश्व छोड़ो हमारे देश में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बहुत बड़ा बुद्धिमान मानता है, बड़ा elite class मानता है। उन्हें अंदाजा नहीं है कि भारत में ऋषियों ने, मुनियों ने, संतों ने, मंतों ने समाज हित के लिए कितने बड़े-बड़े काम किए हैं। उनका उस तरफ ध्यान ही नहीं है और इसलिए जहां-तहां हमारी इस महान परंपरा की आलोचना करते रहना यही कुछ लोगों की आदत बन गई है। इस देश की विशेषता है कि हजारों साल पुराने इस समाज जीवन में समय-समय पर किसी न किसी बुराई ने प्रवेश कर दिया है। समाज में विकृति आई, गलत चीजें घुस गई, गलत पंरपराएं घुस गई, जिसने इस समाज की आत्मा को भी तहस-तहस कर दिया लेकिन उसके बाद यही समाज की ताकत देखिए कि इसी समाज में से संत पैदा हुए, समाज सुधारक पैदा हुए, ऋषि-मुनि पैदा हुए और उन्होंने समाज के विरोधों के बावजूद भी समाज सुधार का बीड़ा उठाया और समाज की बुराइयों से समाज को मुक्त कराने का अविरत प्रयास किया।
हजारों साल से ये देश, ये परंपराएं, ये संस्कृति इसलिए बची है कि हर युग में जब-जब संकट आया, जब-जब हमारे भीतर बुराइयां आई, हमारे भीतर से ही एक नई ऊर्जा पैदा हुई, नया नेतृत्व पैदा हुआ, नई ताकत पैदा हुई, नई परंपरा पैदा हुई और समाज सुधार का काम चलता रहा और इसलिए मैं आज जब His Holiness जगतगुरु श्री डॉ. शिवराथरी राजेन्द्र महास्वामी जी के शताब्दी समारोह में आया हूं, उस महाने परंपरा को नमन करने के लिए आया हूं, जिस महान परंपरा ने समाज के हितों की, समाज के कल्याण की, चिंता करने में कभी कोई कमी नहीं की।
हम आजादी के आंदोलन को देखे, इस तरफ हमारे लोगों का ध्यान बहुत कम जाता है। लेकिन अगर हम आजादी के आंदोलन को देखे तो 19वीं शताब्दी में और 18वीं शताब्दी, ये दो शताब्दी पर हम नजर गड़े तो हमारे ध्यान में आएगा कि 20वीं शताब्दी में जो आजादी के आंदोलन की तीव्रता पैदा हुई, उसके पीछे 19वीं शताब्दी और 18वीं शताब्दी में हमारे संतों महंतों ने, जिसको हम भक्ति युग कहते है, उस भक्ति युग में जो चेतनाएं जगाई गई, भारत की आत्मा को जगाने का प्रयास हुआ और हिन्दुस्तान के हर क्षेत्र, इलाके में, पूर्व हो, पश्चिम हो, उत्तर हो, दक्षिण हो, हर भाषा-भाषी ने, कोई तो एक संत पैदा हुआ जो संत, मठ-मंदिरों से बहार निकला, एक सामूहिक जागरण का अभियान चलाया। पूरे देश में फिर से एक बार समाज की आत्मा को जगाने का काम दो शताब्दी तक हमारे संतों ने, हमारे महापुरुषों ने किया और वो चेतना जगी। जिस चेतना में से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की ज्योति जगी। वही एक तरह से 1947 में, देश आजादी को प्राप्त कर सका। आजादी के आंदोलन की पीठिका ऐसे महापुरुषों ने रची। जिसको आगे महात्मा गांधी का नेतृत्व मिला और देश ने महात्मा गांधी को भी कभी राजनेता के रूप में नहीं देखा था। उसी संत परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा था, तभी तो उनको महात्मा कहा था। जो बात संतों-महंतों के लिए कही जाती थी, वो बात महात्मा गांधी के लिए कही जाती थी। उसी परंपरा का नेतृत्व मिला और तब जाकर के देश को आजादी प्राप्त हुई और इसलिए भारत ने समाज जीवन के हर कबीला-कबिलाई, कबीलों से मुक्ति दिलाने का काम हमारे संतों के द्वारा हुआ है।
उसी प्रकार से, आज हम इस पीठ को देखते हैं। मुझे तो यहां पहले भी आने का सौभाग्य मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा काम किया है। करीब एक लाख विद्यार्थियों की जिन्दगी, यहां बदल रही है। एक प्रकार से सरकार का काम संत कर रहे हैं। सरकार का बोझ भी हल्का कर रहे हैं और समाज की शक्ति बढ़ा रहे हैं।
आज यहां इस शताब्दी समारोह में knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है। ये बात सत्य है कि पिछली शताब्दियों में राष्ट्र की शक्ति को नापने का आधार या तो धन शक्ति हुआ करता था या तो सैन्य बल शक्ति द्वारा। इस देश के पास कितना military power है और कितना money power है उसके आधार पर विश्व में उस देश की ताकत को नापा जाता था। उसी के आधार पर वो देश कितना शक्तिशाली है और उसके आधार पर विश्व में उसकी स्वीकृति बनती थी। लेकिन वक्त बदल चुका है, आज धन बल हो या सैन्य बल हो, इतने से गाड़़ी चलती नहीं है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है, knowledge की century है। जिसके पास ज्यादा information होगी, ज्यादा knowledge होगा, समय के अलग सोचने वाले innovations होंगे, दुनिया पर उसी देश की चलने वाली है। और इसलिए 21वीं सदी की ताकत को संतों ने पहचाना है और उस ताकत को वैज्ञानिक तरीके से रंग देने के लिए आज knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है।
पिछली अनेक शताब्दियों में मानव जाति ने ज्ञान के आधार पर, विज्ञान के आधार पर, technology के आधार पर जो प्रगति की है, आज हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल विज्ञान के नए अविष्कार, ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ प्रभाव, technology का प्रभुत्व, समाज जीवन को इतनी तेजी से बदल रहा है, जो पिछली शताब्दियों में कभी नहीं हुआ था। जिस गति से दुनिया बदल रही है, technology विज्ञान और ज्ञान के आधार पर उसको cope-up करने के लिए कभी-कभी मानव की कल्पना शक्ति भी कम पड़ जाती है। कही एक जगह पर लोग आगे बढ़े तो हम सोचते रह जाते हैं कि भई हम वहां कहां पहुंचेंगे। दुनिया इतनी तेजी से ज्ञान-विज्ञान और technology के सहारे बदल रही है। क्या भारत इंतजार करता रहेगा क्या? क्या भारत यही सोचता रहेगा क्या कि कोई महापुरुष, संत, महात्मा के आशीर्वाद मिल जाएंगे और देश महान हो जाएगा। संत भी ऐसा नहीं मानते हैं, संत भी मानते हैं कि knowledge Resource Centre बनाने चाहिए।
नए innovations होने चाहिए। पिछले दिनों आपको पता होगा पेरिस में दुनिया के सभी देशों के लोग इकट्ठे आए थे। एक बड़ा विश्व का कुंभ मेला लगा था और वे सब ब्रहमांड की चर्चा करने में लगे थे, Global warming के लिए, Global warming से कैसे मानव जात को बचाया जाए, विश्व को बचाया जाए, पृथ्वी को बचाया जाए, इसकी चिंता हो रही थी। लेकिन वहां पर दो बातें हुईं। एक भारत, अमेरिका, फ्रांस, इनके initiative थे, innovation पर बल देने के लिए योजना बने और इस संकट का सामना करना होगा, तो नए अनुसंधान करने पड़ेंगे, innovations करने पड़ेंगे और उसके लिए एक सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है और दूसरा वाला निर्णय हआ। जो देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश उपलब्ध होता है, ऐसे देश इकट्ठे आएं। विश्व में करीब 122 countries ऐसे हैं कि जहां Solar Radiation काफी मात्रा में हैं और इससे भारत के प्रयासों से, भारत के नेतृत्व में दुनिया के 122 देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश रहता है इकट्ठे आएं और सूर्य शक्ति का मानव जात में कैसे उपयोग हो, उस पर एक संगठन का निर्माण किया है।
इन चीजों का आने वाले युगों तक प्रभाव रहने वाला है। उसके मूल में ज्ञान है, विज्ञान है, technology है, innovation है और वही, वही बदलाव आया है और बदलाव को लाने की दिशा में एक उत्तम कदम है। और मैं मानता हूं कि शताब्दी समारोह तक पूज्य स्वामी जी को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि, इस एक उत्तम कदम के द्वारा दी जा रही है और इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं, अभिनंदन के पात्र हैं।
भारत सरकार की तरफ से इन उत्तम प्रयासों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए कंधे से कन्धा मिलकर के देश, दिल्ली में बैठी हुई सरकार आपके साथ चलेगी और नए innovations समाज-जीवन के काम आएं, ज्ञान का भंडार, मानव जात के कल्याण का कारण बनें, उस दिशा में हम प्रयास करते रहें।
आज जब में इस पवित्र कार्यक्रम में आया हूं, मैं देश के जवानों का गर्व करना चाहता हूं, देश के सुरक्षा बलों का गर्व करना चाहता हूं, उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। जब युद्ध होते हैं तो दुश्मन देश, अपने सामने वाले देश की सैन्य शक्ति पर घात करने के प्रयास करता है। आज मानवता के दुश्मनों ने जो भारतीय प्रगति को देखने की उनको परेशानी हो रही है, ऐसे तत्वों ने ऐसी ताकतों ने पठानकोट में हिंदुस्तान की सैन्य शक्ति का अंग Airbase देने का प्रयास किया है। मैं देश के सुरक्षा बलों को बधाई देता हूं कि दुश्मनों के उन इरादों को उन्होंने खाक में मिला दिया। उनको सफल नहीं होने दिया और जिन जवानों ने शहादत दी है, उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं और देशवासियों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे सुरक्षा बलों में वो सामर्थ्य है कि दुश्मनों की कोई भी नापाक इरादों को उठते ही वो खत्म करने की ताकत रखते हैं और देश को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन जांबाज जवानों को बधाई देता हूं, उन सुरक्षा बलों को अभिनंदन करता हूं और ऐसे समय राष्ट्र का आत्मविश्वास, राष्ट्र का धैर्य और राष्ट्रीय एकता एक स्वर में राष्ट्र जब बोलता है तो दुश्मन के घर नष्ट हो जाते हैं। उस संकल्प लेकर के आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं और ये knowledge Resource Centre 21वीं सदी में हमें नई ताकत दें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।
At a programme in Karnataka, PM pays tributes to Guru Basaveshwara. Watch. https://t.co/HOZNzpkH73
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
Rishis, Saints, Seers, Mutts..they have done so much for society. Sadly, some people have only believed in criticising: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
These saints, seers...they overcame so much opposition and ensured evils were removed from society: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
Whenever the need came, a new strength always emerged from our society: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
You are undertaking the effort of educating so many children. This will increase the strength of society: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
The 21st century is the century of knowledge. The one with more knowledge and information will influence the world: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
It is the saints who have understood what the 21st century is about & that is why this knowledge centre is starting: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
Proud of our Jawans and security forces: PM @narendramodi in Mysuru
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
Enemies of humanity who can't see India progress, such elements attacked in Pathankot but our security forces did not let them succeed: PM
— PMO India (@PMOIndia) January 2, 2016
Saints, Seers, Rishis & Mutts have always enriched our society & contribute immensely to nation building. https://t.co/vFuQ4Y02yc
— Narendra Modi (@narendramodi) January 2, 2016
In Pathankot today, our security forces once again demonstrated their valour. I salute their sacrifice.
https://t.co/jqcIYiflzE
— Narendra Modi (@narendramodi) January 2, 2016