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Text of PM’s address during the foundation stone ceremony held for four-laning of “Kaithal-Narwana-Hisar-Rajasthan Border” Highway at Kaithal


भारत माता की जय/ भारत माता की जय।

मंच पर विराजमान हरियाणा के राज्‍यपाल आदरणीय श्री कप्‍तान सिंह जी, हरियाणा के मुख्‍यमंत्री आदरणीय श्री हुडा जी, केन्‍द्र सरकार में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान नितिन गडकरी जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव और विशाल संख्‍या में पधारे हुए प्‍यारे भाइयो एवं बहनों।

कल पूरा देश जन्‍माष्‍टमी का पर्व मना रहा था। आज जब श्रीकृष्‍ण को याद करते हैं, तो कुरूक्षेत्र की याद बहुत स्‍वाभाविक आती है। यह कुरूक्षेत्र की धरती, जहां से नैतिकता के विजय का बिगुल बजा था। ये कुरूक्षेत्र की धरती ऐसी है जहां युद्ध के मैदान में शाश्‍वत शांति का संदेश दिया गया था। शायद विश्‍व में गीता एकमात्र ग्रंथ ऐसा है, जिसकी रचना युद्ध की भूमि में हुई थी। ऐसे हरियाणा की धरती पर आज आने का मुझे सौभागय मिला।

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प्रधानमंत्री बनने के बाद हरियाणा में मेरा पहला सरकारी कार्यक्रम है। लेकिन आप सबने जो उमंग, उत्‍साह और प्‍यार दिया है, इसके लिए मैं हरियाणा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं हरियाणा के भाइयो-बहनों को विश्‍वास दिलाता हूं, आपने जो प्‍यार दिया है, आपने जो विश्‍वास दिया है, इसे मैं ब्‍याज समेत लौटाऊँगा, विकास करके लौटाऊँगा। मैं हरियाणा को उतना ही जानता हूं, जितना मैं गुजरात को जानता हूं। कई वर्षों तक यहां रहने का मुझे अवसर मिला। यहां के जीवन को जानने का अवसर मिला। बहुत कुछ मुझे हरियाणा की धरती से सीखने को भी मिला है और मेरे लिए गर्व की बात है, मैं उस धरती से आया हूं, जिस धरती पर स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था और हरियाणा के हर कोने में आज भी स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती की शिक्षा-दीक्षा का हर परिवार में महात्‍म्‍य है। यहां के जीवन मूल्‍यों में, यहां के सामाजिक जीवन में, स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती की शिक्षा-दीक्षा की छाया आज भी हम महसूस करते हैं और इसलिए, जो मूल्‍यों में विश्‍वास करते हैं, जो नैतिकता में विश्‍वास करते हैं, उनको इस धरती पर आदर होना बहुत स्‍वाभाविक है। यहां के लोगों के प्रति आदर होना बहुत स्‍वाभाविक है। हरियाणा के व्‍यंग्‍य विनोद से मैं भली-भांति परिचित हूं। कितनी ही कठिन से कठिन बात को भी व्‍यंग्‍य और विनोद से आगे बढ़ाना, यह हरियाणा की विशेषता मैंने देखी है और बड़े सहज ग्रामीण लहजे में।

इतना बड़ा यह समारोह किस बात का सबूत देता है, इतनी बड़ी भीड़ किस बात का संदेश देती है? भाइयो-बहनों, ये उत्‍साह, ये उमंग, ये भीड़़ इस बात का भरोसा देती है, इस बात का संदेश देती है कि देश की जनता को विकास में कितना विश्‍वास है। सामान्‍य मानवीय विकास उसकी प्राथमिकता बनी हुई है। चाहे किसान हो, मजदूर हो, टैक्‍सी चलाने वाला रिक्शा चलाने वाला ड्राइवर हो, आप किसी से भी पूछिये, जब बात करते हैं तो उसको लगता है कि भाई, अब बहुत दिन हो गए, अब पिछड़े हुए रहना नहीं है। दुनिया आगे बढ़ रही है, हमें भी आगे बढ़ना है। अगर आगे बढ़ना है, विकास ही एक मार्ग है, जो हमें आगे ले जाएगा।

आज जो हमारी कठिनाइयां हैं, उन कठिनाइयों से मुक्ति भी विकास से ही आने वाली है। हमारे परिवार में नौजवानों को रोजगार चाहिए। अगर विकास नहीं होगा तो रोजगार के अवसर कहां से प्राप्‍त होंगे और अगर रोजगार के अवसर प्राप्‍त नहीं होंगे तो हमारे नौजवानों को रोजगार कहां से मिलेगा? कितनी ही ज्‍यादा जमीन क्‍यों न हो, किसान भी आज क्‍या सोच रहा है? किसान भी ये सोचता है कि अगर तीन बेटे हैं तो एक बेटा तो खेती करेगा, दो बेटे शहर में चले जाएं, नौकरी करें, रोजगार कमा लें, यह किसान भी सोचने लगा है। इस धरती की सच्‍चाई को समझ कर हमें देश को विकास की दिशा में ले जाना होगा और विकास की दिशा में जाना है तो एक बात निश्चित है, जो देश इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को बल देता है, आधुनिक से आधुनिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देता है, रास्‍ते हो, रेल हो, एयरपोर्ट हो, इस व्‍यवस्‍था को जल्‍दी विकसित करता है, वहां की विकास की संभावनाएं बहुत तेज गति से बढ़ती है। अपना हरियाणा इसका उन्‍नत उदाहरण है। कहीं बाहर जा कर इसे समझने की आवश्‍यकता नहीं है। मैं हरियाणा के हर गली मोहल्‍ले में घूमा हुआ इंसान हूं, इसलिए मुझे पता है। आपने देखा होगा, नेशनल हाइवे वन, जो पूरा उत्‍तर से दक्षिण, हरियाणा के बीच से गुजरता है। आपने देखा होगा, इस रोड के दोनों तरफ जितना तेज गति से विकास हुआ है। लेकिन जैसे अंदर की तरफ जाते हैं हरियाणा में तो हमें वह कमी महसूस होती है। एक अच्‍छा रोड बनने के कारण, नेशनल हाइवे वन, उसके दोनों तरफ तेज गति से विकास हुआ। उसी प्रकार से रास्‍तों का नेटवर्क जब बनता है तो विकास को वह गति देता है। हमारे शरीर में भी रक्‍त पहुंचाने के लिए जैसे धमनी होती है, नसें होती हैं, जिसके माध्‍यम से रक्‍त चालन होता है और जीवन गति पाता है, उसी प्रकार से रास्‍ते राष्‍ट्र के जीवन में धमनी का काम करते हैं, जो विकास के सुदूर इलाके में पहुंचाने का काम करते हैं।

यह रास्‍ता हरियाणा और राजस्‍थान को जोड़ रहा है। हरियाणा और राजस्‍थान को जोड़ने का मतलब, सिर्फ इस पर गाडि़यां आएंगी जाएंगी, वो नहीं है। दो राज्‍यों को इस प्रकार से जब एक अतिरिक्‍त रास्‍ता मिल जाता है, और उसकी कैपिसिटी जब बढ़ जाती है, तो व्‍यापार क्षेत्र के लिए, यातायात के लिए यह बहुत सुविधाजनक बनता है और इसके कारण न सिर्फ हरियाणा का भला होने वाला है बल्कि इसके साथ-साथ राजस्‍थान का भी भला होने वाला है। हरियाणा और राजस्‍थान का भला है तो देश का भी भला होने वाला है और इसलिए आपने जैसा हम पर विश्‍वास रखा है, हमने इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी है और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर भी पिछली शताब्‍दी वाला नहीं चलेगा। कोई भी कांट्रेक्‍टर है, ऐसे ही डामर डाल दिया, थोड़ा काला रंग हो गया, रोड बन गया। पहली बारिश में सब तबाह हो जाता है। पता नहीं पैसे किसकी जेब में जाते हैं। अब वक्‍त बदला है। देश की जनता, दुनिया में जो बदलाव आ रहा है, देख रही है। उसे भी अपने क्षेत्र में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के , इंटरनेशनल लेवल के रास्‍तों की भूख जगी है। और हमें यह पूरा करना चाहिए। अगर हमें देश को आगे ले जाना है तो हमें आगे के बारे में सोचना होगा। इसलिए सिर्फ रास्‍तों के जाल, रास्‍तों के नेटवर्क, इसी मात्र से इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का काम पूरा नहीं होता है। सिर्फ रेल के नेटवर्क से ही 21 वीं सदी के नेटवर्क का काम पूरा नहीं होगा। अगर हमें 21वीं सदी में आगे बढ़ना है तो आप्टिकल फाइबर का नेटवर्क लगाना पड़़ेगा, गैस ग्रिड करनी पड़ेगी, वाटर ग्रिड करनी पड़ेगी, बिजली की ग्रिड घर घर तक पहुंचानी पड़ेगी। आधुनिक से आधुनिक विज्ञान और उसकी कनेक्टिविटी हर गांव, हर घर तक पहुंचे, उस दिशा में हमें योजना बनानी होगी। हम बहुत तेजी से, हिन्‍दुस्‍तान के गांवों को आधुनिक विज्ञान का लाभ मिले, दूर-सुदूर गांवों के स्‍कूलों में बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा मिले, टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से लांग डिस्‍टेंस एजुकेशन का लाभ मिले, ब्रांडबैंड कनेक्टिविटी का जाल बिछे, आप्टिकल फाइबर नेटवर्क का जाल बिछाये जाएं, एक आधुनिक भारत के निर्माण के लिए, नई पीढ़ी की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए इन बातों पर बल देने की दिशा में हम प्रयासरत हैं।

भाइयो-बहनों, मैंने 15 अगस्‍त को राष्‍ट्र के नाम अपने मन की कुछ बातें कही थी। लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि 15 अगस्‍त को लाल किले पर से मोदी जी ने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ कुछ बोला नहीं। मैंने एक बात कही थी, मैंने कहा था कि कुछ लोगों की ऐसी आदत हो गई है, कोई भी काम हो तो पूछते हैं, मेरा क्‍या? और जब बात नहीं बनती है तो हाथ ऊपर कर कह देते हैं कि मुझे क्‍या? ये तो मेरा क्‍या, मुझे क्या, इसने देश को तबाह करके रखा हुआ है। यहां मौजूद कोई व्‍यक्ति ऐसा नहीं होगा जो भ्रष्‍टाचार को समर्थन देता हो। आप मुझे बताइए, भ्रष्‍टाचार से देश को मुक्‍त कराना चाहिए या नहीं? इसके लिए कठोर कदम उठाने चाहिए या नहीं उठाने चाहिए? अगर मैं कठोर कदम उठाता हूँ तो क्या आपका आर्शीवाद है? आपके आर्शीवाद की ताकत से इस देश की इस बीमारी को हम हटा सकते हैं, निकाल सकते हैं। ये बीमारी इतनी भयानक है, इतनी फैल चुकी है, कैंसर से भी ज्‍यादा। पूरे राष्‍ट्र जीवन को तबाह करने वाली बीमारी है ये और इसलिए पूरे देश में एक मिजाज बनाना है और मैं अनुभव कर रहा हूं, देश अब लंबे अरसे तक बुराइयों को सहने के लिए तैयार नहीं है। देश लंबे अरसे तक बुराइयों को झेलने के लिए तैयार नहीं है।

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मेरे हरियाणा के भाइयो-बहनो, जब चुनाव के दिनों में आपके बीच आने का अवसर मिला था, तब भी मैंने कहा था, कि हरियाणा का मुझ पर एक विशेष अधिकार है। और आज प्रधान सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद भी दुबारा मैं कहता हूं- हरियाणा का मुझ पर विशेष अधिकार है। भाइयो-बहनो, केन्‍द्र सरकार की कई योजनाएं यहां कोई 4 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, कोई 2 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, वह विलंबित पड़ी हुई है। मैं हरियाणा के भाइयों-बहनों को विश्‍वास दिलाता हूं कि भूतकाल में जिन परियोजनाओं को शुरू किया गया था, जो आज अटकी पड़ी हैं, उनको बहुत ही जल्‍द प्रारंभ करके, बहुत ही तेज गति से पूर्ण हो, इसके लिए दिल्‍ली में बैठी सरकार पूरा प्रयास करेगी।

हरियाणा के किसान देश के अन्‍न के भंडार भरते हैं। भाइयो-बहनों, हमारा किसान देश के अन्‍न के भंडार तो भरता है, लेकिन किसानों की जेब खाली रह जाती है। हमें देश की कृषि को उस दिशा में आगे ले जाना है, ताकि देश में अनाज के भंडार भी भरें और किसान का जेब भी भरे। हरियाणा ने देश के कृषि विकास में बहुत योगदान किया है। यहां के किसानों की मेहनत हिन्‍दुस्‍तान के नागरिकों का पेट भरने में कभी पीछे नहीं रही है। मैं हरियाणा के किसानों को नमन करता हूं। लेकिन मैं हरियाणा के किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि जैसे अटल बिहारी वापयेजी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़़क योजना के द्वारा हर गांव को पक्‍की सड़क से जोड़ने का बीड़ा उठाया था, हमने तय किया है प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ताकि गांव-गांव यदि किसानों को पानी मिला तो किसान को किसी की भी जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार पानी मिल गया तो किसान मिट्टी में से सोना पैदा कर देता है। किसान खेत में मजदूरी करके हिन्‍दुस्‍तान के भाग्‍य को बदल सकता है और इसलिए अगर देश के गांव के जीवन को बदलना है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाना है, वैज्ञानिक ढंग से हमारा किसान कृषि करता चले, कृषि के साथ ही पशुपालन भी हो, ताकि कभी भी वर्षा कमी अधिकता के कारण किसान को परेशान होने की नौबत न आए। पशुपालन के माध्‍यम से अगर संकट के दिनों में एक साल गुजारने की नौबत आए तो हमारा किसान आराम से गुजार दे, उस प्रकार की उसकी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।

भाइयो-बहनों, आइए, विकास के मंत्र को हम हरियाणा के गांव-गांव, गली-गली, घर-घर पहुंचायें, जन-जन तक पहुंचायें, और हिन्‍दुस्‍तान के अग्रिम राज्‍यों में हरियाणा भी अपनी जगह बनाये। उसके लिए हम सब को मिल कर के दिल्‍ली सरकार हो या राज्‍य सरकार हो, कंधे से कंधा मिला कर के काम करें और हरियाणा के भाग्‍य को बदलें। इसी अपेक्षा के साथ, आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।