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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वियना कन्वेंशन के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के लिए दलों की बैठक में सरकार द्वारा अपनाई गई बातचीत की स्थिति को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ओजोन की परत के संरक्षण के लिए वियना कनवेंशन के मांट्रियल प्रोटोकॉल के लिए हाल ही में पक्षकारों की बैठक (एमओपी) में भारत सरकार द्वारा अपनाई गई नीति को अपनी पूर्व कार्योत्तर स्वीकृति दे दी है। यह बैठक रवांडा के किगाली में 6-14 अक्टूबर के बीच हुई थी।

किगाली में हुई वार्ता का उद्देश्य मांट्रियल प्रोटोकाल के तहत हाइड्रोफ्लूरो कार्बन (एचएफसी) को रसायनों की सूची में शामिल करना था। ताकि उनके उत्पादन और खपत को नियंत्रित किया जा सके और मांट्रियल प्रोटोकाल के तहत बनाए गए बहुपक्षीय कोष से प्राप्त वित्तीय सहायता की मदद से एक तय समयावधि के दौरान उन्हें कम किया जा सके। एचएफसी ओजोन का क्षरण नहीं कर रहा है लेकिन जलवायु परिवर्तन के लिए एक जिम्मेदार पदार्थ है और अगर इसे नियंत्रित किया जाता है तो यह वैश्विक तापमान को सीमित करने और जलवायु परिवर्तन पर अग्रिम कार्रवाई करने में काफी योगदान दे सकता है।

मंत्रिमंडल ने 2024 से 2030 के बीच के तीन विकल्पों में से एक को उपयुक्त बेसलाइन वर्ष के रूप में अपनाने के लिए विवेचन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इसे अगले साल फ्रीज करना भी शामिल है। मंत्रिमंडल ने इस सीमा के भीतर किसी भी विकल्प का उपयोग करने के लचीलापन भी दिखाया है। इसमें सरकार के परामर्श के साथ प्रस्तावित विकल्पों की सुविधाओं का संयोजन होगा। किगाली में बातचीत के दौरान भारत ने बेसलाइन वर्ष और फ्रीज वर्ष पर सफलतापूर्वक समझौता वार्ता की, जिसने घरेलू स्तर पर निर्माण के लिए रिफ्रिजरंट का उपयोग करते हुए संबंधित क्षेत्रों में विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया। इस प्रकार कम से कम अतिरिक्त लागत और अधिकतम जलवायु लाभ के साथ निर्बाध विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

किगाली में इस बात पर सहमति बनी थी कि विकासशील देशों के लिए बेसलाइन अथवा शिखर वर्ष के दो सेट होंगे और भारत के लिए 2024, 2025, 2026 बेसलाइन वर्ष होंगे। यह फैसला 65 प्रतिशत अतिरिक्त एचसीएफसी भत्ता उपलब्ध कराएगा। यह भारत की बेसलाइन खपत और उत्पादन के साथ जुड़ेगा। भारत के लिए फ्रीज ईयर 2028 होगा। इसमें यह शर्त होगी कि 2024/25 में एक तकनीकी समीक्षा होगी और अगर रिफ्रिजरंट का इस्तेमाल करते हुए इस सेक्टर में विकास सहमति की सीमा से अधिक हुआ तो भारत अपने फ्रीज वर्ष को 2030 तक आगे बढ़ा सकता है। वहीं दूसरी तरफ विकसित देश एचएफसी की खपत और उत्पादन को 2029 में 70 प्रतिशत तक कम करेंगे। किगाली में लिए गए निर्णयों के अनुसार, भारत 2032 से चार चरणों में फेज डाउन को पूरा करेगा। इसमें 2032 में 10 प्रतिशत, 2037 में 20 प्रतिशत, 2042 में 30 प्रतिशत और 2047 में 85 प्रतिशत की संचयी कमी की जाएगी।

ट्रियल प्रोटोकॉल के लिए किगाली संशोधन पहली बार, नए रिफ्रिजरंट और तकनीक के इस्तेमाल के मामले में ऊर्जा दक्षता में सुधार को प्रोत्साहित करता है। अनुसंधान एवं विकास यानी आरएंडडी के लिए अनुदान और विकासशील देशों में सेवा क्षेत्र को भी पूंजी पर सहमति प्रावधानों में शामिल किया गया है।