प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मां जगदाम्बिका का गुणगान करते हुए और सभी शब्दों, विचारों एवं रूपों में उनकी दिव्य उपस्थिति पर प्रकाश डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया। यह श्लोक बताता है कि प्रत्येक शब्द देवी की स्तुति की अभिव्यक्ति बन सकता है, क्योंकि उनके दिव्य स्वरूप में सभी शब्द और सभी अभिव्यक्तियां समाहित हैं।
श्री मोदी ने एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया;
“तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः।
निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥”
तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः।
निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥ https://t.co/gh1E9Ylz9h
— Narendra Modi (@narendramodi) October 16, 2026
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पीके/केसी/आरटी/एके/केके
तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः। निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥ https://t.co/gh1E9Ylz9h
— Narendra Modi (@narendramodi) October 16, 2026