पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) 2026 के 9वें संस्करण के तहत छात्रों के साथ संवाद किया। इस कार्यक्रम के दूसरे एपिसोड में उन्होंने कोयंबटूर, रायपुर, देवमोगरा और गुवाहाटी के विद्यार्थियों से अनौपचारिक चर्चा की। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के इस विशेष संस्करण में विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इस बार कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया गया है। कोयंबटूर संस्करण की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के छात्रों की ऊर्जा और जिज्ञासा ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है। उन्हें “वनक्कम” कहकर अभिवादन करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों से हल्की-फुल्की बातचीत की। छात्रों ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देखकर उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। वे एक भव्य आगमन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री को उन्होंने बेहद सरल, विनम्र और सहज पाया। एक छात्र ने यह भी बताया कि उनकी उपस्थिति से उन्हें रोमांचित महसूस हुआ।
स्टार्टअप और प्रधानमंत्री का अध्ययन मंत्र
प्रधानमंत्री ने बताया कि वे कई वर्षों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के माध्यम से 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों से संवाद करते आ रहे हैं। यह बताते हुए कि यह उनके लिए सिखाने का नहीं बल्कि एक सीखने का अवसर है, उन्होंने छात्रों को अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित किया। एक छात्र के स्टार्टअप से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने सलाह दी कि सबसे पहले अपनी रुचि और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, चाहे वह प्रौद्योगिकी में नवाचार हो, ड्रोन का विकास हो, या विद्युत प्रणालियों जैसे व्यावहारिक समाधान। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीक और वित्त में कुशल मित्रों के साथ छोटी टीमें बनाना सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि उद्यम शुरू करने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती और छोटे स्टार्टअप भी प्रभावशाली हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ही रुचि है, तो यह बहुत अच्छी बात है। उन्होंने मौजूदा स्टार्टअप्स का दौरा करने, एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने और उसे ईमानदारी से एक स्कूल प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत करने का सुझाव दिया, जिससे मार्गदर्शन और समर्थन को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान धीरे-धीरे आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त होगा, जो आगे के प्रयासों में सहायक होगा।
एक अन्य छात्र की पढ़ाई और शौक के बीच संतुलन बनाने की चिंता को दूर करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि दोनों ही उपयोगी हैं और एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कला और विज्ञान के प्रयोगों को मिलाकर एक उदाहरण दिया और कहा कि रचनात्मकता सीखने में मदद कर सकती है और थकान कम कर सकती है। उन्होंने सलाह दी कि शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी व्यक्तिगत रुचियों के लिए भी प्रतिदिन या साप्ताहिक समय निकालना जरूरी है।
विकसित भारत और वोकल फॉर लोकल में युवाओं का योगदान
जब प्रधानमंत्री से 2047 तक भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने खुशी व्यक्त की कि युवा छात्र भी इस सपने को साझा करते हैं। उन्होंने सिंगापुर के एक मछुआरा गांव से विकसित राष्ट्र बनने के सफर का उदाहरण देते हुए ली कुआन यू के विकसित राष्ट्रों की अनुशासित आदतों को अपनाने के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कूड़ा न फैलाना, यातायात नियमों का पालन करना, भोजन की बर्बादी से बचना और स्थानीय उत्पादों का समर्थन करने जैसे छोटे-छोटे कदम राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ के महत्व पर जोर देते हुए शादियों जैसे समारोहों को विदेश के बजाय भारत में मनाने की अपील की। साथ ही यह बी कहा कि प्रत्येक नागरिक के छोटे-छोटे प्रयास सामूहिक रूप से एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान करते हैं। छात्रों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि उन्होंने बड़े कदमों के बजाय छोटे कदमों पर जोर दिया, जिससे यह साबित होती है कि यही सबसे अधिक मायने रखते हैं।
प्रेरणा या अनुशासन?
एक छात्र के सफलता के लिए प्रेरणा या अनुशासन में से कौन अधिक महत्वपूर्ण है के सवाल का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीवन में दोनों ही आवश्यक हैं। उन्होंने समझाया कि अनुशासन के बिना, केवल प्रेरणा का कोई खास उपयोग नहीं है। उन्होंने एक किसान का उदाहरण दिया जो अपने पड़ोसी की सफलता से प्रेरित होता है लेकिन बारिश से पहले अपने खेत को तैयार करने में विफल रहता है, जिससे खराब परिणाम मिलते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनुशासन अपरिहार्य है, जबकि प्रेरणा “सजावट के साथ सोने” की तरह मूल्य जोड़ती है, और अनुशासन के बिना, प्रेरणा एक बोझ बन जाती है और निराशा पैदा करती है। एक छात्र ने वर्षों से परेशान कर रहे एक प्रश्न पर स्पष्टता प्राप्त करने पर सम्मानित महसूस करने की बात कही।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उदय और इसके उचित उपयोग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे कंप्यूटर हों या मोबाइल फोन, हर युग में नई तकनीकों से जुड़ी चिंताएं सामने आती हैं लेकिन डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक को मानव जीवन का स्वामी नहीं बनना चाहिए और उपकरणों के गुलाम बनने से सतर्क किया। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “मैं गुलाम नहीं बनूँगा,” और सलाह दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मार्गदर्शन और मूल्यवर्धन के लिए किया जाना चाहिए, न कि सीखने के विकल्प के रूप में। उन्होंने कहा कि नौकरियों का स्वरूप हमेशा बदलता रहेगा, जैसे परिवहन बैलगाड़ियों से हवाई जहाजों में परिवर्तित हुआ, लेकिन जीवन चलता रहता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक को समझना, अपनी क्षमताओं का विस्तार करना और उसकी खूबियों को कार्य में जोड़ना बिना किसी भय के प्रगति सुनिश्चित करता है।
विकसित भारत का संकल्प
छात्रों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वे अभिभूत और सम्मानित महसूस कर रहे हैं और प्रधानमंत्री उन्हें एक नेता से कहीं अधिक, परिवार के सदस्य जैसे लगे। कोयंबटूर में छात्रों के साथ अपनी बातचीत समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोयंबटूर के युवा एआई, स्टार्टअप और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के बारे में अत्यधिक जागरूक हैं और उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह भारत की युवा सोच को दर्शाता है, जो 2047 तक एक विकसित भारत बनने के संकल्प को नई शक्ति प्रदान कर रहा है।
इसके बाद यह चर्चा कोयंबटूर से छत्तीसगढ़ के रायपुर चली गई, जहां उन्होंने छात्रों के साथ रोचक बातचीत की और स्थानीय व्यंजनों का भी आनंद लिया।
यात्रा और ध्यान केंद्रित रखने की प्रधानमंत्री की सलाह
प्रधानमंत्री ने “जय जोहार” कहकर विध्यार्थियों का अभिवादन करते हुए खान-पान की परंपराओं और स्थानीय व्यंजनों के बारे में पूछा। फिर उन्होंने छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया और छुट्टियों में यात्रा से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्हें सलाह दी कि यात्रा पर ज्यादा दूर जाने से पहले वे अपने ही तहसील, जिले और राज्य का भ्रमण करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्यटन का सबसे अधिक आनंद तब आता है, जब छात्र ट्रेन से यात्रा करते हैं, अपने साथ भोजन ले जाते हैं और भारत की विविधता से सीखते हैं।
परीक्षा के तनाव और रिवीजन से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में, श्री मोदी ने कहा कि छात्रों को अपनी तैयारी पर भरोसा रखना चाहिए, शांत रहना चाहिए और विषय पर पूरी तरह से पकड़ बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने सीखने की तुलना खेल से करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा से शक्ति का निर्माण होता है। उन्होंने पढ़ाई में संघर्ष कर रहे छात्रों से दोस्ती करने और उनकी मदद करने की एक व्यावहारिक तकनीक का सुझाव दिया।
पढ़ाई और खेल में संतुलन कायम रखना
खेल और पढ़ाई में संतुलन कायम रखने की इच्छा रखने वाले एक छात्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि सामाजिक जीवन के लिए भी आवश्यक है और इसे कभी कम नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने इस गलतफहमी के प्रति आगाह किया कि केवल खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने से पढ़ाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि केवल शिक्षा ही सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा का विकास आवश्यक है। जिस तरह खिलाड़ी बनने के लिए खेलना जरूरी है, जीवन में खेल का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए खेल को शामिल करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई भी जरूरी है, ताकि दूसरे उन्हें केवल मैदान पर बैठे रहने वाले और ज्ञानहीन व्यक्ति के रूप में न देखें। उन्होंने यह कहकर अपनी बात समाप्त की कि सच्ची शक्ति शिक्षा और खेल दोनों में निपुण होने में निहित है। छात्रों ने कहा कि वे उनकी सलाह को अपने जीवन में अपनाएंगे और इस अनुभव के लिए हार्दिक आभार भी व्यक्त किया।
पर्यावरण संरक्षण
पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के विषय पर एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हमारे स्वभाव में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन के छोटे-छोटे नियम बड़ा बदलाव लाते हैं जैसे कि- ब्रश करते समय पानी बंद करना और जरूरत पड़ने पर ही उसका इस्तेमाल करना। उन्होंने एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी साझा की, जिन्होंने पेट्रोल पंपों से तेल के डिब्बे इकट्ठा किए और बच्चों से अपने घरों से बोतलों में बचा हुआ पानी लाने को कहा, जिसका इस्तेमाल पौधों को पानी देने के लिए किया गया। सब्जियों के छिलकों से खाद बनने के कारण, पूरा स्कूल हरा-भरा हो गया, जिससे पता चलता है कि कैसे एक शिक्षक की पहल ने पर्यावरण को बदल दिया। उन्होंने कहा कि मानवीय व्यवहार इस तरह के बदलाव की शुरुआत कर सकता है और पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटेव सामान्य कार्य ही पर्याप्त हैं।
नेतृत्व संबंधी विचार
जब प्रधानमंत्री से पूछा गया कि भावी पीढ़ी के नेताओं में वे किन गुणों की अपेक्षा रखते हैं, तो उन्होंने पहला गुण निडरता को बताया। उन्होंने सलाह दी कि नेतृत्व तब शुरू होता है, जब कोई दूसरों का इंतजार किए बिना कार्य करने का निर्णय लेता है। उन्होंने कूड़ा उठाने का उदाहरण दिया जो दूसरों को प्रेरित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतृत्व का मतलब चुनाव या भाषण नहीं है, बल्कि दूसरों को समझाने और उन्हें राजी करने की क्षमता के बारे में है और इस बात पर बल दिया कि सच्चे नेता मार्गदर्शन करने से पहले लोगों को समझते हैं। छात्रों ने प्रशंसा व्यक्त करते हुए इस अनुभव को एक सपने जैसा बताया और प्रधानमंत्री से मिलने पर खुद को सौभाग्यशाली और सम्मानित होने जैसा कहा।
रायपुर में बातचीत समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि परीक्षा की तैयारी, तनाव और अपेक्षाएं ‘परीक्षा पे चर्चा’ के मुख्य विषय हैं और इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि ये चर्चाएं केवल बोर्ड परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये जीवन के कई पहलुओं को छूती हैं और युवा मन में चल रहे विचारों को दर्शाती हैं।
गुजरात के देवमोगरा में छात्रों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी पृष्ठभूमि के बारे में पूछा और उनकी कलाकृति की सराहना की। उन्होंने पिछली मुलाकातों से कुछ परिचित चेहरों को भी पहचाना और उनके साहस की भी प्रशंसा की।
गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों का विकास
आदिवासी क्षेत्रों में काम करने की प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर श्री मोदी ने ऐतिहासिक पालचेतरिया घटना को याद किया, जिसमें आदिवासी समुदाय ने एक बड़ा स्वतंत्रता संग्राम लड़ा था। उन्होंने उस भयंकर अकाल को भी याद किया जिसके दौरान वे उस क्षेत्र में रहे और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता महसूस की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब उमरगम से अंबाजी तक विज्ञान पढ़ने के लिए एक भी विद्यालय नहीं था लेकिन अब वहां विश्वविद्यालय, विज्ञान विद्यालय, इंजीनियरिंग संस्थान और आईटीआई हैं, जिनसे महत्वपूर्ण बदलाव और लाभ मिल रहे हैं। उन्होंने पिछड़े आदिवासी समुदायों की सहायता के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख किया और बताया कि इसके लिए अलग योजनाओं और बजट की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास को गति देती है और उमरगम-अंबाजी राजमार्ग जैसी आधारभूत परियोजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि कनेक्टिविटी प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है और उन्होंने इस पर विशेष ध्यान दिया है।
पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तनाव से निपटने के बारे में एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छात्रों को अक्सर परीक्षा का तनाव होता है लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें एहसास होता है कि यह अस्थायी था। उन्होंने कहा कि परीक्षा के तनाव से उबरने का सबसे अच्छा तरीका केवल पढ़ने के बजाय नियमित रूप से प्रश्नपत्र हल करने और लिखने की आदत विकसित करना है। उन्होंने आगे कहा कि निरंतर अभ्यास, तनाव को दूर करता है। उन्होंने हंसी और उससे भी जरूरी पर्याप्त नींद के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि अच्छी नींद मन को तरोताजा रखती है, विचारों को प्रवाहित रखती है और मनोबल को बढ़ाती है।
करियर के लिए सही मार्ग
करियर विकल्पों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि लगातार बदलती आकांक्षाएं परिवारों को भ्रमित कर देती हैं और ऐसे में सफल लोगों से प्रेरणा लेना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि हमें न केवल उनकी उपलब्धियों को देखना चाहिए, बल्कि उनके पीछे के प्रयास और अनुशासन को भी समझना चाहिए। उन्होंने एक क्रिकेटर का उदाहरण दिया जो सुबह 4 बजे उठकर साइकिल से अभ्यास के लिए जाता है और कहा कि सपनों को कड़ी मेहनत और नियमित दिनचर्या से साकार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता खुद अपनी पहचान बनाती है और जब कोई नंबर एक बन जाता है, तो पूरा स्कूल, गांव और समुदाय इसे पहचान लेता है।
इसके बाद छात्रों ने वारली, लिपन और पिथोरा कला सहित अपनी सांस्कृतिक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया और उनकी परंपराओं के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने उनकी कृतियों की सराहना करते हुए पूछा कि क्या उन्होंने इन्हें हाथ से बनाया है। प्रधानमंत्री ने उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा, “आप लोग महान कलाकार बन गए हैं।” उन्होंने चित्रों को पाकर प्रसन्नता व्यक्त की और उनकी सांस्कृतिक गहराई और रचनात्मकता की सराहना की। छात्रों ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे किसी मित्र से बात कर रहे हों और इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उनके काम की सराहना की।
शिक्षकों और आदिवासी युवाओं की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जीवन में शिक्षकों की भूमिका के बारे में एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि शिक्षकों ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके शिक्षक उन्हें प्रतिदिन पुस्तकालय जाने, टाइम्स ऑफ इंडिया में संपादकीय पढ़ने, उसे लिखने और अगले दिन उस पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करते थे, जिससे उनमें अनुशासन और जिज्ञासा का भाव पैदा हुआ। उन्होंने अपने प्राथमिक विद्यालय के दिनों के परमार सर की यादें साझा कीं, जो शारीरिक फिटनेस पर बहुत जोर देते थे और उन्हें योग व मल्लखंब सिखाते थे। भले ही वे पेशेवर खिलाड़ी नहीं बन पाए लेकिन इससे उन्हें स्वास्थ्य का महत्व समझ में आया। उन्होंने कहा कि हर महान व्यक्तित्व के जीवन में दो प्रमुख प्रभाव हमेशा याद रखे जाते हैं- एक उनकी माता का और दूसरा, उनके शिक्षक का।
देश की प्रगति में आदिवासी समुदायों के योगदान के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने उनकी बदौलत ही उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की प्रकृति के प्रति श्रद्धा और समर्पण के कारण ही भारत का पर्यावरण संरक्षित है, क्योंकि वे प्रकृति की पूजा और रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के बड़ी संख्या में बेटे-बेटियां सशस्त्र बलों में सेवारत हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आदिवासी युवा खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। मध्य प्रदेश की क्रांति गौड़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि क्रिकेट में पहचान बनाने वाली एक आदिवासी बेटी क्रांति गौड़ और कई अन्य आदिवासी खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों में अपार प्रतिभा है और प्रौद्योगिकी के सहयोग से उनकी क्षमता और भी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन केवल नौकरी के लिए नहीं जीना चाहिए, बल्कि एक सार्थक जीवन के निर्माण के सपनों के साथ जीना चाहिए, जो सच्चा लाभ प्रदान करे।
उसके बाद श्री मोदी ने मोगी माता को समर्पित विद्यार्थियों द्वारा गाया गया सामूहिक गीत सुना, जिसमें उनके निवास स्थान और जीवन शैली का वर्णन था। उन्होंने उसमें निहित सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की सराहना की। विद्यार्थियों ने बताया कि श्री मोदी से हुई बातचीत में जीवन में खुश रहने, तनाव दूर करने, समय का प्रभावी प्रबंधन करने और बिना किसी भय के परीक्षा की तैयारी करने के विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था तथा बातचीत के दौरान समय का पता ही नहीं चला।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ का सफर पूर्वोत्तर के अष्टलक्ष्मी क्षेत्र तक पहुंच गया है, जहां बहते ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे गुवाहाटी में चर्चाएं हुईं। उनका पारंपरिक गमोसा से स्वागत किया गया और उन्होंने कहा कि असम में ऐसा करना अनिवार्य है। छात्रों ने बताया कि उनकी उपस्थिति से उन्हें शांति मिली और उनकी चिंता कम हुई। प्रधानमंत्री ने पूछा कि क्या उन्होंने पहले टेलीविजन पर कार्यक्रम देखा था या उनकी किताब ‘एग्जाम वॉरियर’ पढ़ी थी, तो छात्रों ने बताया कि इससे परीक्षा को लेकर उनका डर कम हुआ और उन्हें परीक्षा को त्योहार की तरह मनाने की सीख मिली। उन्होंने कहा कि अक्सर परिवार के सदस्य ही कम अंकों पर सवाल उठाकर डर पैदा करते हैं। उन्होंने अपने इस मंत्र को दोहराया कि प्रतिस्पर्धा स्वयं से होनी चाहिए, दूसरों से नहीं और आत्म-सुधार निरंतर होना चाहिए।
स्वस्थ आहार और जीवनशैली
खान-पान और जीवनशैली से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे किसी तय प्रणाली का पालन नहीं करते। उन्होंने अपने उन दिनों को याद किया जब वे अलग-अलग घरों में शाकाहारी भोजन करते थे और खुद खिचड़ी जैसे साधारण व्यंजन बनाते थे। उन्होंने सलाह दी कि खान-पान व्यक्तिगत पसंद पर आधारित होना चाहिए, इसे दवा की तरह नहीं लेना चाहिए, और व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि वह पेट भरने के लिए खाए या मन को संतुष्ट करने के लिए। उन्होंने कहा कि लोग पेट भरने के लिए अनाज तो खाते हैं, लेकिन अक्सर गहरी सांस लेना भूल जाते हैं। उन्होंने छात्रों को अपने शरीर को प्राथमिकता देने, सूर्योदय देखने जैसी आदतें अपनाने और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि ये अभ्यास ताजगी और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
तुलना के दबाव से निपटना
प्रधानमंत्री मोदी ने एक छात्र की इस चिंता का जवाब देते हुए कि माता-पिता बच्चों की तुलना भाई-बहनों और दोस्तों से कर रहे हैं, कहा कि ऐसी स्थितियों को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। उन्होंने समझाया कि अगर माता-पिता भाई-बहन की लिखावट की तारीफ करते हैं, तो उपेक्षित महसूस करने के बजाय, सही प्रतिक्रिया यह है कि उस भाई-बहन से उसे सिखाने के लिए कहा जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने भाई-बहनों की खूबियों से सीखना चाहिए और माता-पिता से कहना चाहिए, “आपने मेरी एक अच्छी खूबी बताई है, अब मुझे बताएं कि इसे कैसे विकसित किया जाए।” उन्होंने सलाह दी कि माता-पिता को दूसरों के सामने किसी एक बच्चे की अत्यधिक प्रशंसा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे असंतुलन पैदा हो सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अगर कोई करीबी किसी चीज में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है, तो बिना बताए चुपचाप उसे अपना गुरु मानना चाहिए और सलाह मांगनी चाहिए, जिससे समानता और सम्मान को बढ़ावा मिलता है।
खुद पर विश्वास
मंच पर भय और आत्मविश्वास के मुद्दे पर, प्रधानमंत्री ने समझाया कि आत्मविश्वास दो शब्दों- “आत्मा” और “विश्वास” से आता है, जिसका अर्थ है स्वयं पर विश्वास। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद पर भरोसा करते हैं, वे कभी नहीं डरते और वे कार्य करने से पहले स्थितियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध शिकागो भाषण को याद करते हुए कहा कि विवेकानंद शुरू में घबराए हुए थे, लेकिन उन्होंने शक्ति के लिए मां सरस्वती से प्रार्थना की और जब उन्होंने “अमेरिका के बहनों और भाइयों” से शुरुआत की, तो श्रोताओं ने कई मिनटों तक तालियां बजाईं, जो एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। सचिन तेंदुलकर के शून्य पर आउट होने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महान वक्ताओं और खिलाड़ियों को भी असफलताओं का सामना करना पड़ता है लेकिन वे कभी आत्मविश्वास नहीं खोते। उन्होंने छात्रों से परिस्थिति को समझने, चुनौतियों को स्वीकार करने और अपनी आंतरिक शक्ति पर भरोसा करने का आग्रह किया।
इसके बाद विद्यार्थियों ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हाजरिका का एक गीत प्रस्तुत किया जिसकी प्रधानमंत्री ने सराहना की। एक छात्रा ने चाय बागानों से अपने परिवार के जुड़ाव के बारे में बताया और उन्हें चाय की पत्तियां भेंट कीं, जिस पर उन्होंने स्नेहपूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए उनकी माताजी को अपना प्रणाम कहा। छात्रों ने उनसे मिलकर खुशी व्यक्त की और कहा कि पीढ़ी के अंतर के बावजूद उन्हें कुछ भी अलग महसूस नहीं हुआ।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि परीक्षा पे चर्चा में न केवल परीक्षा संबंधी चर्चाएं शामिल थीं, बल्कि स्थानीय संगीत और असम की चाय भी शामिल थी, जिसने इसे एक यादगार अनुभव बना दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं एक अवसर हैं और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, तैयारी को बेहतर बनाती है। उन्होंने कहा कि स्थान, छात्र और अनुभव भले ही अलग-अलग हों लेकिन हर चर्चा का उद्देश्य एक ही था—सुनना, समझना और साथ मिलकर सीखना। उन्होंने सभी छात्रों को शुभकामनाएं दीं।
Episode 2 of Pariksha Pe Charcha is a special one. It features students from various cities across India. Do watch!#ParikshaPeCharcha26 https://t.co/GdUvEJw5rf
— Narendra Modi (@narendramodi) February 9, 2026
***
पीके/केसी/बीयू/एसएस
Episode 2 of Pariksha Pe Charcha is a special one. It features students from various cities across India. Do watch!#ParikshaPeCharcha26 https://t.co/GdUvEJw5rf
— Narendra Modi (@narendramodi) February 9, 2026