पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एकदूसरे से सीखने और एकदूसरे की बात सुनने के महत्व को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग एकदूसरे से सीखने और सुनने के उत्सुक रहते हैं, विद्वान लोग उनकी प्रशंसा करते हैं। ऐसे लोग स्वार्थी सोच और छिपे हुए मकसदों से मुक्त तथा हर तरह से खुशहाल और समृद्ध रहते हैं:
“ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥”
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा:
“ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥”
ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥ pic.twitter.com/JoTDKpmwnM
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
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पीके/केसी/एसके
ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥ pic.twitter.com/JoTDKpmwnM