पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर सभी जीवों का कल्याण करना हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है।
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि इसी व्यापक दृष्टि के साथ, भारत आज प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:
“प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते।
तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥”
हम ऐसी समृद्धि प्राप्त करें जो चारों दिशाओं में विस्तृत हो और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हो – जहाँ प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य में रहते हुए, पर्यावरण संरक्षित हो और सभी जीवों का सतत कल्याण सुनिश्चित हो।
प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते।
तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥ pic.twitter.com/RelovuuzKx
— Narendra Modi (@narendramodi) June 8, 2026
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प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
— Narendra Modi (@narendramodi) June 8, 2026
यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते।
तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥ pic.twitter.com/RelovuuzKx