पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज जीवन के गहरे अनुभवों, नैतिक शिक्षाओं, नीति और सदाचार व्यक्त करने वाले संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मंच पर भारत का निरंतर उत्थान उसके लोगों के दृढ़ संकल्प, कड़े परिश्रम और सामूहिक भावना से प्रेरित है।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-
“यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते।
न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥”
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में लिखा;
“देशवासियों के इन्हीं गुणों से भारत आज अपने सामर्थ्य को निरंतर बढ़ा रहा है…
“यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते।
न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥”
देशवासियों के इन्हीं गुणों से भारत आज अपने सामर्थ्य को निरंतर बढ़ा रहा है…
यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते।
न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥ pic.twitter.com/4DaqacIIeN
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
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पीके/केसी/एकेवी/एसके
देशवासियों के इन्हीं गुणों से भारत आज अपने सामर्थ्य को निरंतर बढ़ा रहा है…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते।
न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥ pic.twitter.com/4DaqacIIeN