पीएमइंडिया
भारत माता की जय,
कार्यक्रम में उपस्थित यूपी के ऊर्जावान और कर्मयोगी मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, प्रयागराज की धरती के जनप्रिय नेता उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, केंद्रीय कैबिनेट में मेरी सहयोगी साध्वी निरंजन ज्योति जी, श्रीमती अनुप्रिया पटेल जी, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ महेंद्र सिंह जी, राजेन्द्र प्रताप सिंह मोती जी, श्री सिद्धार्थनाथ सिंह जी, नन्दगोपाल गुप्ता नंदी जी, श्रीमती स्वाति सिंह जी, श्रीमती गुलाबो देवी जी, श्रीमती नीलिमा कटियार जी, संसद में मेरी सहयोगी बहन रीता बहुगुणा जी, श्रीमती हेमा मालिनी जी, श्रीमती केशरी देवी पटेल जी, डॉ संघमित्रा मौर्य जी, श्रीमती गीता शाक्य जी, श्रीमती कांता कर्दम जी, श्रीमती सीमा द्विवेदी जी, डॉ रमेश चंद बिन्द जी, प्रयागराज की मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता जी, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीके सिंह जी, सभी विधायकगण अन्य जनप्रतिनिधि गण, और यहां उपस्थित यूपी की सामर्थ्य को बढ़ाने वाले यहां के सामर्थ्य की प्रतीक मेरी माताओं, बहनों ! आप सभी को मेरा प्रणाम। माँ गंगा, यमुना, सरस्वती के पावन तट पे बसा प्रयागराज के धरती के, हम शीश झुकाय के प्रणाम करत हई। ई उ धरा ह, जहां धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी बहत ह। तीर्थन के तीर्थ, प्रयागराज में आइके, हमेशा ही एक अलगैय पवित्रता और ऊर्जा का अहसास होत है। पिछले वर्ष फरवरी में हम कुम्भ मा ई पवित्र धरती पर आवा रहेन, तब संगम में डुबकी लगायके अलौकिक आनंद के अनुभव प्राप्त किहे रहे। तीर्थराज प्रयाग की ऐसी पावन भूमि को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। आज हिंदी साहित्य जगत के सर्वमान्य आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की पुण्य तिथि भी है। प्रयागराज से साहित्य की जो सरस्वती बही, द्विवेदी जी लंबे समय तक उसके संपादक भी रहे। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
माताओं-बहनों,
प्रयागराज हजारों सालों से हमारी मातृशक्ति की प्रतीक माँ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की धरती रही है। आज ये तीर्थ नगरी नारी-शक्ति के इतने अद्भुत संगम की भी साक्षी बनी है। ये हम सभी का सौभाग्य है कि आप सभी हमें अपना स्नेह देने, अपना आशीर्वाद देने आई हैं। माताओं-बहनों, मैं यहां मंच पर आने से पहले मैंने बैंकिंग सखियों से, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनों से और कन्या सुमंगला योजना की लाभार्थी बेटियों से बात की। ऐसे-ऐसे भाव, ऐसी-ऐसी आत्मविश्वास से भरी बातें ! माताओं बहनों, हमारे यहाँ एक कहावत है- “प्रत्यक्षे किम् प्रमाणम्”।
यानी, जो प्रत्यक्ष है, जो सामने है, उसे साबित करने के लिए कोई प्रमाण की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी में विकास के लिए, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जो काम हुआ है, वो पूरा देश देख रहा है। अभी यहाँ मुझे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की एक लाख से ज्यादा लाभार्थी बेटियों के खातों में करोड़ों रुपए ट्रान्सफर करने का सौभाग्य मिला। ये योजना गाँव-गरीब के लिए, बेटियों के लिए भरोसे का बहुत बड़ा माध्यम बन रही है। यूपी ने बैंक सखी का भी जो अभियान शुरू किया है, वो महिलाओं को रोजगार के अवसरों के साथ ही उनके जीवन में भी बड़े बदलाव ला रहा है। सरकार से अलग अलग योजनाओं का जो पैसा सीधे डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए खाते में आता है, ये पैसा निकालने अब बैंक नहीं जाना पड़ता। बैंक सखी की मदद से ये पैसा गाँव में, घर पर ही मिल जाया करता है। यानी, बैंक सखी बैंक को गाँव तक लेकर आ गई हैं। और जो लोग सोच रहे होंगे कि ये तो छोटा सा काम है, उन्हें मैं ये भी बताना चाहता हूं कि बैंक सखियों का काम कितना बड़ा है। यूपी सरकार ने इन बैंक सखियों के ऊपर ऐसे करीब 75 हजार करोड़ के लेन-देन की ज़िम्मेदारी सौंपी है। 75 हजार करोड़ रुपये का कारोबार यह गाँव में रहने वाली मेरी बहने मेरी बेटियाँ कर रही हैं। जितना लेन-देन गाँव में होगा, उतनी ही उनकी आमदनी भी होगी। इनमें से ज़्यादातर बैंक सखियाँ वो बहनें हैं, कुछ साल पहले तक जिनके खुद के बैंक खाते भी नहीं थे। लेकिन आज इन महिलाओं के हाथों में बैंकिंग की, डिजिटल बैंकिंग की ताकत आ गई है। इसलिए, देश देख रहा है कि यूपी में कैसे काम हो रहा है। और तभी तो मैं कहता हूँ, “प्रत्यक्षे किम् प्रमाणम्”॥
माताओं बहनों,
यूपी ने टेक होम राशन, जच्चा-बच्चा को दिये जाने वाले पोषण को तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी महिलाओं के हाथों में सौंपी है। ये पोषण वाला राशन और आहार अब सेल्फ हेल्प ग्रुप में साथ मिलकर महिलाएं खुद बनाएँगी। ये भी बहुत बड़ा काम है, सालाना हजारों करोड़ रुपए का काम है। जिन 202 पुष्टाहार उत्पादन यूनिट्स का आज शिलान्यास हुआ है, उनसे सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाओं की आमदनी भी होगी, और गाँव के किसानों का भी बहुत बड़ा लाभ होगा। गाँव की महिलाएं अपनी फ़ैक्टरी में पुष्टाहार बनाने के लिए फसल-अनाज गाँव से ही तो खरीदने वाली हैं। यही तो सशक्तिकरण के वो प्रयास हैं जिन्होंने यूपी की महिलाओं का जीवन बदलना शुरू कर दिया है। सरकार, अलग-अलग सेक्टर्स में, स्वयं सहायता समूहों को जो साहयता दे रही है, इसकी एक किस्त के तौर पर आज मुझे एक हजार करोड़ रुपए ट्रान्सफर करने का सौभाग्य मिला है। यूपी के विकास की धारा अब किसी के रोकने से रुकने वाली नहीं है। उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है – अब वो पहले की सरकारों वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी। डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है।
भाइयों और बहनों,
माताओं-बहनों-बेटियों का जीवन पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला, पीढ़ियों का निर्माण करने वाला जीवन होता है। एक बेटी का सामर्थ्य, उसकी शिक्षा, उसका कौशल, सिर्फ परिवार ही नहीं समाज की, राष्ट्र की दिशा तय करती है। इसलिए, 2014 में जब हमने मां भारती के बड़े सपनों, बड़ी आकांक्षाओं को साकार करने का बीड़ा उठाया तो सबसे पहले देश की बेटी के विश्वास को नई ऊर्जा देने का प्रयास शुरू किया। इसलिए, हमने बेटी के जन्म से लेकर जीवन के चक्र में, हर अवस्था में महिलाओं को सशक्त करने के लिए योजनाएं बनाईं, अभियान चलाए।
साथियों,
बेटियां कोख में ही ना मारी जाएं, वो जन्म लें, इसके लिए हमने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से समाज की चेतना को जगाने का प्रयास किया। आज परिणाम ये है कि देश के अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है। प्रसव के बाद भी बिना चिंता के अपने बच्चे की शुरुआती देखरेख करते हुए, मां अपना काम जारी रख सके, इसके लिए महिलाओं की छुट्टी को 6 महीने किया गया है।
साथियों,
गर्भावस्था के दौरान गरीब परिवारों में मातृ स्वास्थ्य, चिंता का एक बहुत बड़ा कारण रहा है। इसलिए हमने गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, अस्पतालों में डिलिवरी और गर्भावस्था के दौरान पोषण पर विशेष ध्यान दिया। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत गर्भावस्था के दौरान 5 हज़ार रुपए महिलाओं के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं, ताकि वो उचित खान-पान का ध्यान रख सकें। अभी तक 2 करोड़ से ज्यादा बहनों को लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।
साथियों,
बेटियां ठीक से पढ़ाई कर सकें, उनको स्कूल बीच में ना छोड़ना पड़े, इस पर भी हमने लगातार काम किया है। स्कूलों में बेटियों के लिए अलग टॉयलेट बनाना हो, या फिर सेनिटेरी पैड्स को गरीब से गरीब बेटियों के लिए सुलभ कराना हो, हमारी सरकार किसी भी काम में पीछे नहीं रही है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ बच्चियों के अकाउंट खोले गए हैं। ये पैसा बड़े होने पर उनके सपनों को पूरा करे, इसके लिए इस पर ब्याज़ दर भी ऊंची रखी गई है। स्कूल-कॉलेज के बाद करियर से लेकर घर-गृहस्थी तक भी हर कदम पर महिलाओं की सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालय बनने से, उज्जवला योजना के तहत गरीब से गरीब बहनों को गैस कनेक्शन की सुविधा मिलने से, घर में ही नल से जल आने से, बहनों के जीवन में सुविधा भी आ रही है और उनकी गरिमा में भी वृद्धि हुई है।
साथियों,
आयुष्मान भारत योजना के तहत भी सबसे अधिक लाभ अगर किसी को हुआ है तो वो हमारी बहनें ही हैं। चाहे वो अस्पतालों में डिलिवरी हो या फिर दूसरा इलाज, पहले पैसे के अभाव में बहनों के जीवन पर संकट रहता था। अब 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने से उनकी ये चिंता दूर हो गई है। माताओं-बहनों, भारतीय समाज में हमेशा से माताओं-बहनों को सर्वोपरि दर्जा दिया गया है। लेकिन आज एक सच्चाई की तरफ भी मैं आपका, पूरे देश का ध्यान दिलाना चाहता हूं। हमारे यहां परंपरा से सदियों तक, दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही कि घर और घर की हर संपत्ति को केवल पुरुषों का ही अधिकार समझा जाने लगा। घर है तो किसके नाम ? पुरुषों के नाम। खेत है तो किसके नाम ? पुरुषों के नाम। नौकरी, दुकान पर किसका हक ? पुरुषों का। आज हमारी सरकार की योजनाएं, इस असमानता को दूर कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो घर दिये जा रहे हैं, वो प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं के ही नाम से बन रहे हैं। अगर मैं यूपी की ही बात करूं तो यूपी में 30 लाख से अधिक घर पीएम आवास योजना के बनाए गए हैं। इनमें से करीब 25 लाख घरों की रजिस्ट्री में महिलाओं का भी नाम है। आप अंदाजा लगा सकते हैं। पहली बार यूपी में 25 लाख महिलाओं के नाम उनका घर हुआ है। जिन घरों में पीढ़ियों से किसी महिला के नाम पर कोई संपत्ति नहीं थी, आज वो पूरे के पूरे घर, किसी महिला के ही नाम हैं। यही तो होता है महिलाओं का सशक्तिकरण, सच्चा सशक्तिकरण, यही तो होता है विकास।
माताओं-बहनों,
मैं आज आपको एक और योजना के बारे में बताना चाहता हूं। यह योजना है – केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना। स्वामित्व योजना के तहत देश भर के गांवों में घरों को, जमीनों की ड्रोन से तस्वीरें लेकर, घर के मालिकों को प्रॉपर्टी के कागज दिए जा रहे हैं, घरौनी दी जा रही है। ये घरौनी देने में घर की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अगले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के गांवों में योगी जी की सरकार, हर घर की मैपिंग कराकर ऐसे ही घरौनी देने का काम पूरा कर लेगी। फिर जो बने हुए घर हैं, उनके कागज में भी घर की महिलाओं का नाम होगा, घर की माताओं का नाम होगा।
साथियों,
रोजगार के लिए, परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ देश चला रहा है, उसमें भी महिलाओं को बराबर का भागीदार बनाया जा रहा है। मुद्रा योजना आज गांव-गांव में, गरीब परिवारों से भी नई-नई महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना के तहत मिले कुल ऋण में से लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना के जरिए भी देश भर में महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और ग्रामीण संगठनों से जोड़ा जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को तो मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैपिंयन मानता हूं। ये स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं। इसलिए, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 2014 से पहले के 5 वर्षों में जितनी मदद दी गई, बीते 7 साल में उसमें लगभग 13 गुणा बढ़ोतरी की गई है। हर सेल्फ हेल्प ग्रुप को पहले जहां 10 लाख रुपए तक का बिना गारंटी का ऋण मिलता था, अब ये सीमा भी दोगुनी यानि 20 लाख की गई है।
माताओं-बहनों,
शहर हो या गांव, महिलाओं के लिए हमारी सरकार, हर छोटी-बड़ी मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रही है। कोरोना के इस काल में आपके घर का चूल्हा जलता रहे, इसके लिए मुफ्त राशन देने की व्यवस्था हमारी ही सरकार ने की। महिलाएं रात की पाली में भी काम कर सकें, इसके लिए नियमों को आसान बनाने का काम हमारी ही सरकार ने किया। खदानों में महिलाओं के काम करने पर जो कुछ बंदिश थी, वो हमारी ही सरकार ने हटाई है। देशभर के सैनिक स्कूलों के दरवाजे, लड़कियों के लिए खोल देने का काम हमारी ही सरकार ने किया है। रेप जैसे संगीन अपराधों की तेज़ सुनवाई के लिए हमारी सरकार देशभर में करीब 700 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स स्थापित कर चुकी है। मुस्लिम बहनों को अत्याचारों से बचाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून हमारी ही सरकार ने बनाया।
साथियों,
बिना किसी भेदभाव, बिना किसी पक्षपात, डबल इंजन की सरकार, बेटियों के भविष्य को सशक्त करने के लिए निरंतर काम कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक और फैसला किया है। पहले बेटों के लिए शादी की उम्र कानूनन 21 साल थी, लेकिन बेटियों के लिए ये उम्र 18 साल की ही थी। बेटियाँ भी चाहती थीं कि उन्हें उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए, आगे बढ़ने के लिए समय मिले, बराबर अवसर मिलें। इसलिए, बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है। देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है, लेकिन किसको इससे तकलीफ हो रही है, ये सब देख रहे हैं !
भाइयों बहनों,
5 साल पहले यूपी की सड़कों पर माफियाराज था! यूपी की सत्ता में गुंडों की हनक हुआ करती थी! इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी कौन था? मेरे यूपी की बहन-बेटियाँ थीं। उन्हें सड़क पर निकलना मुश्किल हुआ करता था। स्कूल, कॉलेज जाना मुश्किल होता था। आप कुछ कह नहीं सकती थीं, बोल नहीं सकती थीं। क्योंकि थाने गईं तो अपराधी, बलात्कारी की सिफ़ारिश में किसी का फोन आ जाता था। योगी जी ने इन गुंडों को उनकी सही जगह पहुंचाया है। आज यूपी में सुरक्षा भी है, यूपी में अधिकार भी हैं। आज यूपी में संभावनाएं भी हैं, आज यूपी में व्यापार भी है। मुझे पूरा विश्वास है, जब हमारी माताओं बहनों का आशीर्वाद है, इस नई यूपी को कोई वापस अंधेरे में नहीं धकेल सकता। भाईयों- बहनों आइये, प्रयागराज की पुण्य भूमि से ये संकल्प लें, हमारा यूपी आगे बढ़ेगा, हमारा यूपी नई ऊँचाइयाँ छूएगा। आप सभी माताओं बहनों को आपके आशीर्वाद के लिए, आपके समर्थन के लिए और यूपी को आगे बढ़ाने में आपकी सहभागिता के लिए मैं फिर से एक बार आपको आदरपूर्वक नमन करता हूँ, आपका हदृय से बहुत- बहुत धन्यवाद करता हूँ। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, बहुत बहुत धन्यवाद!
***
DS/SH/AK/SJ
Addressing a programme in Prayagraj. #NariShaktiDeshKiShakti https://t.co/2njX6mz9zB
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
प्रयागराज हजारों सालों से हमारी मातृशक्ति की प्रतीक माँ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की धरती रही है।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
आज ये तीर्थ नगरी नारी-शक्ति के इतने अद्भुत संगम की भी साक्षी बन रही है: PM @narendramodi
यूपी में विकास के लिए, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जो काम हुआ है, वो पूरा देश देख रहा है: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
अभी यहाँ मुझे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की एक लाख से ज्यादा लाभार्थी बेटियों के खातों में करोड़ों रुपए ट्रान्सफर करने का सौभाग्य मिला।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
ये योजना गाँव-गरीब के लिए, बेटियों के लिए भरोसे का बहुत बड़ा माध्यम बन रही है: PM @narendramodi
उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है- अब वो पहले की सरकारों वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है: PM @narendramodi
बेटियां कोख में ही ना मारी जाएं, वो जन्म लें, इसके लिए हमने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के माध्यम से समाज की चेतना को जगाने का प्रयास किया।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
आज परिणाम ये है कि देश के अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है: PM @narendramodi
हमने गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, अस्पतालों में डिलिवरी और गर्भावस्था के दौरान पोषण पर विशेष ध्यान दिया।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत गर्भावस्था के दौरान 5 हज़ार रुपए महिलाओं के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं, ताकि वो उचित खान-पान का ध्यान रख सकें: PM @narendramodi
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालय बनने से,
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
उज्जवला योजना के तहत गरीब से गरीब बहनों को गैस कनेक्शन की सुविधा मिलने से,
घर में ही नल से जल आने से,
बहनों के जीवन में सुविधा भी आ रही है और उनकी गरिमा में भी वृद्धि हुई है: PM @narendramodi
दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही कि घर और घर की संपत्ति को केवल पुरुषों का ही अधिकार समझा जाने लगा।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
घर है तो किसके नाम? पुरुषों के नाम।
खेत है तो किसके नाम? पुरुषों के नाम।
नौकरी, दुकान पर किसका हक? पुरुषों का: PM @narendramodi
आज हमारी सरकार की योजनाएं, इस असमानता को भी दूर कर रही हैं।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
प्रधानमंत्री आवास योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो घर दिये जा रहे हैं, वो प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं के ही नाम से बन रहे हैं: PM @narendramodi
रोजगार के लिए, परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ देश चला रहा है, उसमें भी महिलाओं को बराबर का भागीदार बनाया जा रहा है।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
मुद्रा योजना आज गांव-गांव में, गरीब परिवारों से भी नई-नई महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है: PM @narendramodi
दीनदयाल अंत्योदय योजना के जरिए भी देश भर में महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और ग्रामीण संगठनों से जोड़ा जा रहा है।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को तो मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैपिंयन मानता हूं।
ये स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं: PM @narendramodi
बिना किसी भेदभाव, बिना किसी पक्षपात, डबल इंजन की सरकार, बेटियों के भविष्य को सशक्त करने के लिए निरंतर काम कर रही है।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक और फैसला किया है।
पहले बेटों के लिए शादी की उम्र कानूनन 21 साल थी, लेकिन बेटियों के लिए ये उम्र 18 साल ही थी: PM
बेटियाँ भी चाहती थीं कि उन्हें उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए, आगे बढ़ने के लिए समय मिले, बराबर अवसर मिलें।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
इसलिए, बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है।
देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है, लेकिन किसको इससे तकलीफ हो रही है, ये सब देख रहे हैं: PM
5 साल पहले यूपी की सड़कों पर माफियाराज था!
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
यूपी की सत्ता में गुंडों की हनक हुआ करती थी!
इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी कौन था?
मेरे यूपी की बहन बेटियाँ थीं।
उन्हें सड़क पर निकलना मुश्किल हुआ करता था। स्कूल, कॉलेज जाना मुश्किल होता था: PM @narendramodi
आप कुछ कह नहीं सकती थीं, बोल नहीं सकती थीं।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
क्योंकि थाने गईं तो अपराधी, बलात्कारी की सिफ़ारिश में किसी का फोन आ जाता था।
योगी जी ने इन गुंडों को उनकी सही जगह पहुंचाया है: PM @narendramodi
आज यूपी में सुरक्षा भी है, अधिकार भी हैं।
— PMO India (@PMOIndia) December 21, 2021
आज यूपी में संभावनाएं भी हैं, व्यापार भी है।
मुझे पूरा विश्वास है, जब हमारी माताओं बहनों का आशीर्वाद है, इस नई यूपी को कोई वापस अंधेरे में नहीं धकेल सकता: PM @narendramodi
2014 में जब हमने मां भारती के बड़े सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया, तो सबसे पहले देश की बेटी के विश्वास को नई ऊर्जा देने का प्रयास शुरू किया।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से समाज की चेतना को जगाने का आज परिणाम ये है कि अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में वृद्धि हुई है। pic.twitter.com/GZPnFlCHHp
संपत्ति के अधिकार को लेकर जो असमानताएं थीं, उन्हें हमारी सरकार की योजनाएं कैसे दूर कर रही हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है- प्रधानमंत्री आवास योजना।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
इस योजना के तहत ही पहली बार यूपी में 25 लाख महिलाओं के नाम उनका घर हुआ है। यही तो होता है सशक्तिकरण, यही तो होता है विकास! pic.twitter.com/ArVt5h9p3h
महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैंपियन मानता हूं। इनके स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं। pic.twitter.com/VymMa7fEaB
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
डबल इंजन की सरकार बिना किसी भेदभाव और पक्षपात के बेटियों के भविष्य को सशक्त करने के लिए निरंतर काम कर रही है। इसीलिए बेटियों की शादी की उम्र को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है। pic.twitter.com/SleBtfY8AV
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
आज यूपी में सुरक्षा भी है, अधिकार भी हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2021
आज यूपी में संभावनाएं भी हैं, व्यापार भी है। pic.twitter.com/E3gEfqSmFF