पीएमइंडिया
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति श्री निकोस क्रिस्टोडौलीडेस ने 20-23 मई 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की। इस यात्रा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है, जब साइप्रस यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता कर रहा है।
यह यात्रा उस ऐतिहासिक गति को आगे बढ़ाती है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जून 2025 में साइप्रस यात्रा से पैदा हुई थी और जिसने रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला रखी थी। यह यात्रा भारत-साइप्रस संबंधों का परिणाम-उन्मुख और कार्यान्वयन-संचालित चरण में प्रवेश का संकेत देती है।
दोनों राजनेताओं ने 2025 में जारी हुए संयुक्त घोषणापत्र को लागू करने में प्राप्त महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया, जिसमें राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाना, व्यावसायिक सहभागिता में वृद्धि, रक्षा संपर्कों में मजबूती और नवाचार एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग की शुरुआत शामिल है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत-साइप्रस साझेदारी के प्रगाढ़ स्तर को मान्यता देते हुए, दोनों नेताओं ने नई वास्तविकताओं और अवसरों को प्रतिबिंबित करने के लिए द्विपक्षीय व्यापक साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर सहमति व्यक्त की।
भारत की राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 22 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। माननीय राष्ट्रपति ने यात्रा पर आये राष्ट्रपति के सम्मान में एक राजकीय भोज का भी आयोजन किया।
यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने 22 मई 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संवाद में नवीनीकृत गति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और आपसी सम्मान पर आधारित भारत और साइप्रस के बीच घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदारी की पुष्टि की। उन्होंने भारत-ईयू संबंधों, साथ ही आपसी रुचि के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए।
दोनों नेताओं ने भारत-साइप्रस व्यापक साझेदारी के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में उच्च राजनीतिक स्तर पर नियमित संपर्क का स्वागत किया। उन्होंने 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान घोषित भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के कार्यान्वयन में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के जरिये 2027 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित होने की 65वीं वर्षगांठ मनाने पर सहमति व्यक्त की।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने प्रधानमंत्री मोदी को एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के सफल आयोजन पर बधाई दी। इसमें साइप्रस का प्रतिनिधित्व अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल नीति के उप-मंत्री ने किया था और उन्होंने सम्मेलन घोषणा का अनुमोदन भी किया था। दोनों नेताओं ने एआई के सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी विकास की दिशा में काम करने पर अपने विचार साझा किए।
साझा मूल्य और बहुपक्षीय सहयोग
दोनों राजनेताओं ने शांति, लोकतंत्र, कानून का शासन, प्रभावी बहुपक्षवाद और सतत विकास के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) पर जोर देते हुए, यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून पर आधारित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए अपने समर्थन की पुनः पुष्टि की, जिसमें समुद्री मार्ग आवागमन और हवाई मार्ग की स्वतंत्रता, अवरोध रहित व्यापार और संप्रभु समुद्री अधिकार शामिल हैं।
दोनों नेताओं ने ज्वलंत वैश्विक चुनौतियों का सामना करने तथा सुधार किये गये और प्रभावी बहुपक्षवाद के माध्यम से उभरते घटनाक्रम के लिए दुनिया को तैयार करने की अपनी अपील दोहराई। इस संदर्भ में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और राष्ट्रमंडल सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भीतर समन्वय को मजबूत करने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें इसे अधिक प्रभावी, कुशल और समकालीन भू-राजनीतिक चुनौतियों के अनुरूप बनाने के तरीके शामिल हैं। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों में, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मामले भी शामिल हैं, निकट समन्वय करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं को पूरा करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपनी ठोस समर्थन की पुनः पुष्टि की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर आपस में निकट सहयोग करने और एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की।
संप्रभुता और शांति के लिए समर्थन
साइप्रस और भारत ने साइप्रस प्रश्न के एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी समाधान को हासिल करने के लिए बातचीत को फिर से शुरू करने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो सहमति प्राप्त संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा और संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के अनुसार हो तथा राजनीतिक समानता के साथ द्विक्षेत्रीय, द्विसामुदायिक संघ के आधार पर हो। उन्होंने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएनएफआईसीवाईपी) की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके कार्यादेश के प्रति अपने पूर्ण समर्थन पर जोर दिया। राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने यूएनएफआईसीवाईपी में भारत के अमूल्य योगदान की सराहना की।
भारत ने साइप्रस गणराज्य की स्वतंत्रता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एकता के लिए अपनी अडिग और स्थायी समर्थन की पुनः पुष्टि की। दोनों पक्षों ने वार्ताओं के माध्यम से शांति समाधान की दिशा में प्रयासों को कमजोर न करने से संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सुरक्षा, रक्षा और आतंकवाद-रोधी कार्रवाई
दोनों राजनेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की पूरी तरह और स्पष्ट रूप से निंदा की, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। साइप्रस ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रति एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया।
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय प्रयास करने का आह्वान किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार व्यापक और स्थायी तरीके से किया जाना चाहिए।
सीमा पार आतंकवाद से मुकाबले के लिए व्यापक, समन्वित और सतत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रणाली दोनों में सहयोग के साथ काम करने के महत्व को रेखांकित किया।
इस संदर्भ में, नेताओं ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए बहुपक्षीय प्रयासों को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र ढांचे के भीतर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्रता से अंतिम रूप देने और अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मजबूत और संयुक्त कार्रवाई की अपील की, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति के अधीन आने वाले 1267 समूह, उनके संबंधित छद्म समूह, सहायक, प्रायोजक, वित्तपोषक और समर्थक शामिल हैं।
उन्होंने हिंसक उग्रवाद और कट्टरवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और धन-शोधन का सामना करने तथा आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को रोकने और आतंकवादी भर्ती का मुकाबला करने के लिए सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को समाप्त करने तथा संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्यबल (एफएटीएफ) के तहत आतंकवादी नेटवर्क को बाधित करने और आतंकवाद के वित्तपोषण से लड़ने का भी आह्वान किया।
उन्होंने आतंकवाद के प्रति अपनी शून्य-सहनशीलता नीति को दोहराया तथा दोहरे मानदंड, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और किसी भी परिस्थितियों में ऐसे कृत्यों के लिए किसी भी प्रकार के औचित्य को अस्वीकार किया। नेताओं ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई पर एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) स्थापित करने के लिए एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो जानकारी और ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण के माध्यम से आतंकवाद-रोधी कार्रवाई में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा। उन्होंने जेडब्ल्यूजी की पहली बैठक को जल्द से जल्द आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
दो नेताओं ने विशेष रूप से साइबरस्पेस में नए और उभरते खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच जारी करीबी सहयोग का उल्लेख किया। इस संदर्भ में, नेताओं ने दोनों देशों के बीच साइबरसुरक्षा संवाद की स्थापना का स्वागत किया।
उन्होंने विशेष रूप से साइबरसुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संबंधित रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग भी शामिल है। इस संदर्भ में, नेताओं ने साइप्रस रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग क्लस्टर (सीवाईडीएसआईसी) और भारतीय रक्षा निर्माता समिति (एसआईडीएम) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होने का स्वागत किया।
फरवरी 2026 में हस्ताक्षर हुए भारत-साइप्रस द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम का स्वागत करते हुए, दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग की संभावना को रेखांकित किया। उन्होंने खोज और बचाव (एसएआर) मामलों पर आधिकारिक समन्वय और सहयोग की स्थापना के लिए तकनीकी समझौते पर हुए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया। ये रक्षा औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेंगे, जो 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर आधारित होगा, साथ ही विनिमय, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की सुविधा भी प्रदान करेंगे। नेताओं ने 2026-2031 की अवधि के लिए दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के रोडमैप के पूरा होने का स्वागत किया।
भारत और साइप्रस दोनों ही समुद्री राष्ट्र हैं जिनकी समुद्री परंपराओं की जड़ें गहरी हैं, दोनों नेताओं ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को प्रोत्साहित किया, जिसमें भारतीय नौसैनिक जहाजों के नियमित बंदरगाह दौरे और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए संयुक्त समुद्री प्रशिक्षण और अभ्यास के अवसरों का पता लगाना शामिल है।
व्यापार, निवेश और नवाचार
दोनों राजनेताओं ने जोर दिया कि द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी का और विस्तार करने की महत्वपूर्ण संभावना मौजूद है। उन्होंने भरोसेमंद, विश्वसनीय और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहयोग बढ़ाने और अपनी आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करने पर सहमति व्यक्त की।
नेताओं ने भारत में साइप्रस के निवेश की सतत वृद्धि का स्वागत किया, जिससे साइप्रस भारत में निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया। उन्होंने स्टार्टअप्स, डिजिटलीकरण, एआई और नवाचार-उन्मुख उद्यमों के माध्यम से अछूती आर्थिक संभावनाओं को पूरी तरह से साकार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय को वित्तीय सेवाओं, समुद्री क्षेत्र, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ और हरित ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और अनुसंधान एवं नवाचार सहित प्राथमिक क्षेत्रों में व्यापार और निवेश के अवसरों का सक्रिय रूप से पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। नेताओं ने इस वर्ष की शुरुआत में संपन्न ऐतिहासिक भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के कार्यान्वयन के माध्यम से उत्पन्न होने वाले अवसरों को भी रेखांकित किया।
फिनटेक संपर्क के माध्यम से, केवल सीमा पार लेनदेन ही नहीं बल्कि सीमा पार संबंध भी मजबूत होंगे। नेताओं ने वित्तीय क्षेत्र में आर्थिक सहभागिता की मजबूती का उल्लेख किया, जिसमें 2025 में एनआईपीएल और यूरोबैंक साइप्रस के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी शामिल है। उन्होंने भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के लक्ष्य तत्काल भुगतान निपटान प्रणाली (टीआईपीएस प्रणाली) के बीच अंतर-संचालन योग्य ढांचे की स्थापना का स्वागत किया, जो सीमा पार निर्बाध लेनदेन की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे दोनों देशों के पर्यटक और व्यवसाय लाभान्वित होंगे।
दोनों नेताओं ने त्रिपक्षीय और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में बढ़ती गति का भी स्वागत किया। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत-ग्रीस-साइप्रस (आईजीसी) व्यापार और निवेश परिषद की स्थापना की सराहना की, जो व्यवसाय-से-व्यवसाय संबंधों को मजबूत करने, निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने और तीनों देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।
जून 2025 में लिमासोल में आयोजित भारत-साइप्रस निवेशक गोलमेज से उत्पन्न गति को आगे बढ़ाते हुए, इस यात्रा के दौरान मुंबई में भारत-साइप्रस व्यावसायिक मंच का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक और व्यावसायिक साझेदारी को और मजबूत करना और सहयोग के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना था। नेताओं ने मुंबई में व्यावसायिक संघ के दौरान बी2बी समझौतों पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया।
नेताओं ने दोनों देशों की स्टार्टअप्स, यूनिकॉर्न्स, नवाचार इकोसिस्टम और वेंचर कैपिटल नेटवर्क के बीच निरंतर सहयोग का स्वागत किया। इस संदर्भ में, उन्होंने नवाचार और प्रौद्योगिकी पर समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो दोनों देशों के स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स, गति प्रदाताओं और नवाचार एजेंसियों के बीच आदान-प्रदान के लिए एक रूपरेखा प्रदान करेगा।
राजनेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन को मजबूत करने में समुद्री और नौवहन सहयोग तथा विश्वसनीय समुद्री साझेदारियों के माध्यम से भारत-प्रशांत को यूरोप से जोड़ने के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने साइप्रस की यूरोप के द्वार के रूप में भूमिका और पोतांतरण, भंडारण, वितरण, और लॉजिस्टिक्स के लिए क्षेत्रीय हब के रूप में सेवा देने की क्षमता को मान्यता दी। उन्होंने दोनों देशों के लाभ के लिए साइप्रस-आधारित और भारतीय समुद्री सेवा प्रदाताओं की संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने को प्रोत्साहित किया। इसी संदर्भ में, दोनों नेताओं ने व्यापारी नौवहन पर मौजूदा द्विपक्षीय समझौते के तहत समुद्री सहयोग में प्राप्त सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
साइप्रस का वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त समुद्री सेवा इकोसिस्टम और भारत की तेजी से बढ़ती समुद्री और बंदरगाह अवसंरचना क्षमताओं के बीच मजबूत पूरक भूमिका को देखते हुए, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय भागीदारी के एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
इस संदर्भ में, उन्होंने साइप्रस की क्षमता को मान्यता दी कि यह भारतीय नौवहन हितों के लिए एक यूरोपीय समुद्री प्रवेश द्वार और संचालन आधार के रूप में कार्य कर सकता है और भारतीय समुद्री हितधारकों और साइप्रस के नौवहन और जहाज प्रबंधन समुदाय के बीच निकट संबंधों का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने समुद्री सेवाओं, बंदरगाह परिवहन-संपर्क, लॉजिस्टिक्स, समुद्री प्रशिक्षण और कौशल विकास के साथ-साथ हरित नौवहन और नियामक अनुपालन में सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे निकट भविष्य में व्यावहारिक और परस्पर लाभकारी परिणाम सामने आ सकें।
नेताओं ने उल्लेख किया कि विशेष रूप से बढ़ती जलवायु-संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में, आपदा प्रतिरोधक क्षमता और अवसंरचना सहयोग दोनों देशों के लिए बढ़ती महत्ता वाला क्षेत्र है। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने आपदा प्रतिरोधक अवसंरचना संघ (सीडीआरआई) में शामिल होने की साइप्रस की रुचि का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने सीडीआरआई की भूमिका को तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच तथा आपदा-प्रतिरोधक अवसंरचना प्रणालियों में निवेश को बढ़ावा देने के मंच के रूप में रेखांकित किया।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी
नई और उभरती प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता की पहचान करते हुए, नेताओं ने कहा कि नवाचार और प्रौद्योगिकी पर एमओयू, अनुसंधान केंद्रों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, साथ ही उभरती और सतत प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं को भी प्रोत्साहित करेगा, जिसमें नैतिक और जिम्मेदार एआई शामिल है।
अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक आर्थिक प्रगति, सुरक्षा, नवाचार और तकनीकी उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसंरचना के रूप में मान्यता देते हुए, दोनों पक्षों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी साझेदारी के प्रति रुचि व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने सूचित किया कि भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 गैर-सरकारी संस्थाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू से अंत तक गतिविधियाँ करने के लिए एक सक्षम और गतिशील ढांचा प्रदान करती है। दोनों पक्षों ने परस्पर लाभ के लिए सहयोग बढ़ाने के चल रहे प्रयासों का स्वागत किया। इस संदर्भ में, नेताओं ने ईराटोस्थेनेस एक्सीलेंस सेंटर (ईसीओई) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रचार और अधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के बीच चल रहे सहयोग का स्वागत किया।
शिक्षा, आवागमन और कौशल विकास
राजनेताओं ने अकादमिक स्तर पर बढ़ते आदान-प्रदान का स्वागत किया, जिसमें छात्र और शोधकर्ता शामिल हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने उल्लेख किया कि यह दोनों देशों में उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के लिए सशक्त आधार प्रदान करेगा ताकि जुड़ाव मजबूत हो, आदान-प्रदान बढ़े और सहयोग के अवसरों का पता लगाया जा सके, जिसमें संयुक्त अनुसंधान पहलों, संकाय और छात्र आवाजाही और संस्थागत साझेदारियां शामिल हैं।
नेताओं ने सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (एसएसआईएफएस) और साइप्रस के एम ओ एफ ए डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच कूटनीतिक प्रशिक्षण पर एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो कूटनीतिकों के प्रशिक्षण में सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।
नेताओं ने प्रवास और आवागमन साझेदारी समझौते को पूरा करने के दृष्टिकोण से बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो सुरक्षित, नियमित और व्यवस्थित प्रवास पर सहयोग को सुविधाजनक बनाने का एक ढांचा प्रदान करेगा, और उच्च कौशल प्राप्त कर्मियों, छात्रों और शोधकर्ताओं के सतत कार्यबल आवागमन का समर्थन करेगा। दोनों नेताओं ने सामाजिक सुरक्षा समझौते के लिए जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की।
इस संदर्भ में, नेताओं ने भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) और साइप्रस के प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार संस्थान (आईसीपीएसी) के बीच एम ओ यू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो युवा लेखाकारों के लिए पेशेवर और विनियामक मानकों को विकसित करने, लेखांकन और ऑडिट में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने, और वित्त और व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में आपसी मान्यता और रोजगार क्षमता को बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान करेगा।
सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के आपसी संबध
राजनेताओं ने भारत और साइप्रस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने सांस्कृतिक सहयोग पर एमओयू के हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे दृश्य कला, प्रदर्शन कला, कला के लिए शैक्षिक कार्यक्रम, विरासत संरक्षण और रचनात्मक उद्योग के क्षेत्रों में आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है। नेताओं ने संयुक्त पहलों, प्रदर्शनियों और क्षमता निर्माण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए संग्रहालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक निकायों के बीच करीबी सहयोग की अपील की, और साइप्रस में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि की सराहना की।
नेताओं ने द्विपक्षीय पर्यटन में और वृद्धि की संभावना को स्वीकार किया, जो दोनों देशों के लोगों के बीच बेहतर समझ को बढ़ावा देने में योगदान देगा। दोनों पक्षों ने पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग के माध्यम से दोनों देशों में पर्यटन प्रवाह को बढ़ाने के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की।
नेताओं ने उल्लेख किया कि लोगों की बढ़ती आवाजाही और लोगों के बीच आपसी संबंधों के विस्तार के मद्देनजर राजनयिक मामलों में सहयोग दोनों देशों के लिए लगातार रुचि का क्षेत्र बना हुआ है। इस संदर्भ में, उन्होंने राजनयिक संवाद की शुरुआत का स्वागत किया और उल्लेख किया कि यह राजनयिक मुद्दों को संबोधित करने और सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संरचित रूपरेखा प्रदान करेगा।
भारत–ईयू संबंध
दोनों राजनेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के पूरे होने का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने 2030 के लिए संयुक्त भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडा की भी पुष्टि की, जिसका उद्देश्य ईयू-भारत सहयोग को व्यापक, गहरा और बेहतर तरीके से समन्वित करके रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है, ताकि दोनों भागीदारों और व्यापक दुनिया के लिए समान रूप से लाभकारी, ठोस और परिवर्तनकारी परिणाम प्रदान किए जा सकें।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को रणनीतिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हुए, नेताओं ने इसके शीघ्र हस्ताक्षर और समय पर क्रियान्वयन की अपील की, ताकि महत्वपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं को विविधता प्रदान करके और नए बाजार खोलकर व्यापार और निवेश सहयोग की वास्तविक संभावनाओं को साकार किया जा सके।
नेताओं ने प्रमुख व्यापार, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा मुद्दों को संबोधित करने के लिए भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के काम को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और जुलाई में टीटीसी मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामों के प्रति आशा व्यक्त की।
भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के हस्ताक्षर से साझा रुचि वाले क्षेत्रों में सहयोग गहरा होगा, जिसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष और आतंकवाद-रोधी कार्रवाई शामिल हैं। दोनों नेताओं ने इस संदर्भ में भारत-ईयू सूचना सुरक्षा समझौते के शीघ्र पूरे किये जाने पर भी जोर दिया।
आवागमन पर सहयोग के व्यापक ढांचे पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) के हस्ताक्षर और भारत में पायलट यूरोपीय संघ कानूनी गेटवे कार्यालय की शुरूआत का स्वागत करते हुए, नेताओं ने उल्लेख किया कि इसका महत्व पेशेवरों, कुशल कार्यबल और छात्रों की आवाजाही के लिए कानूनी रास्ते प्रदान करने और भारत और ईयू के बीच लोगों के आपसी संबंध मजबूत से जुड़ा है।
भारत-प्रशांत, परिवहन संपर्क और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दे
राजनेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें यूएनसीएलओएस शामिल है, के अनुसार एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और नियम-आधारित भारत-प्रशांत को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस की भारत-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की सराहना की तथा समुद्री सुरक्षा में सहयोग और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को गहरा करने की क्षमता को रेखांकित किया।
दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार, परिवहन संपर्क और समृद्धि को पुनः आकार और बढ़ावा देने में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की परिवर्तनकारी क्षमता को मान्यता दी। उन्होंने पूर्वी भूमध्यसागर और व्यापक मध्य पूर्व में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और भारत से व्यापक मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप तक गहरे जुड़ाव और परिवहन संपर्क गलियारे को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय परिवहन संपर्क संवाद की स्थापना पर चर्चा की।
नेताओं ने प्रमुख हितधारकों के बीच संवाद, कूटनीति और रचनात्मक भागीदारी के माध्यम से यूक्रेन में संघर्ष के शीघ्र समाधान के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति प्राप्त की जा सके।
पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर, दोनों नेताओं ने शांतिपूर्वक तरीके से मौलिक मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया, जिसमें समुद्री नौवहन का सुरक्षित और अवरुद्ध-रहित मार्ग सुनिश्चित करना शामिल है।
दोनों नेताओं ने वैश्विक अप्रसार संरचना को बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा की, और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के शामिल होने के महत्त्व को मान्यता दी।
निष्कर्ष
दोनों राजनेताओं ने भारत–साइप्रस संबंधों की घनिष्टता पर संतोष व्यक्त किया और भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए, उन्होंने दोनों पक्षों को भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के समय पर कार्यान्वयन के लिए काम करने का निर्देश दिया। नेताओं ने पारस्परिक सम्मान और सहयोग की साझा भावना पर आधारित नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
साइप्रस के राष्ट्रपति ने भारत सरकार और भारत के लोगों द्वारा अपनी राजकीय यात्रा के दौरान किए गए उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए भारत के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।
नेताओं ने साइप्रस और भारत को रणनीतिक साझेदार तथा यूरोप, भूमध्यसागर और भारत-प्रशांत क्षेत्र के बीच जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में साझा दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि की, और शांति, स्थिरता, परिवहन संपर्क और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।
उन्होंने भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के तहत ठोस परिणाम हासिल करने और व्यापक भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी के गतिशील स्तंभ के रूप में भारत-साइप्रस सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि वर्तमान यात्रा ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध को द्विपक्षीय संबंधों के नए चरण में बदलने में एक निर्णायक कदम को रेखांकित करती है, और इस साझेदारी को एक अधिक महत्वाकांक्षी, आधुनिक, रणनीतिक और भविष्य उन्मुख सहयोग के ढांचे स्थापित करती है।
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पीके/केसी/जेके
Addressing the joint press meet with President Christodoulides of Cyprus.@Christodulides
— Narendra Modi (@narendramodi) May 22, 2026
https://t.co/fGPTKnRtyQ
We discussed ways to increase cooperation in infrastructure, energy, agriculture, technology and financial services. We also view defence and security as a key means of furthering bilateral friendship. Emphasis will remain on boosting cultural as well as people-to-people ties. pic.twitter.com/MJPriXcwMs
— Narendra Modi (@narendramodi) May 22, 2026
Happy to have met President Nikos Christodoulides in Delhi. We held extensive deliberations on further strengthening the India-Cyprus friendship. Considering the close ties between our nations, we have decided to elevate our friendship into a Strategic Partnership. Ours is indeed… pic.twitter.com/36unkio3YK
— Narendra Modi (@narendramodi) May 22, 2026
Outcomes that will add momentum to the India-Cyprus friendship! https://t.co/8w5GwjJ202
— Narendra Modi (@narendramodi) May 22, 2026
The visit of President Nikos Christodoulides to India will greatly benefit the people of India and Cyprus. At the same time, it will contribute to a prosperous and sustainable planet as well!@Christodulides pic.twitter.com/7OmWZ2AB2l
— Narendra Modi (@narendramodi) May 22, 2026