पीएम्इंडिया
नवी दिल्ली, 11 मे 2026
पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी आज सोमनाथ अमृत महोत्सवातील आपल्या संबोधनाची काही क्षणचित्रे सामायिक केली. हा महोत्सव केवळ भूतकाळाचा उत्सव नसून, आगामी एक हजार वर्षांसाठी भारताच्या प्रेरणेचा उत्सव असल्याची बाब त्यांनी आपल्या संबोधनातून अधोरेखित केली.
यासंदर्भात X या समाज माध्यमावर त्यांनी सामायिक केलेली संदेश मालिका,
सोमनाथ अमृत महोत्सव केवळ भूतकाळाचा उत्सव नाही. हा पुढच्या एक हजार वर्षांसाठीचा भारताच्या प्रेरणेचा महोत्सव देखील आहे.
75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। pic.twitter.com/446QkWrUfn
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
1998 साली पोखरणमध्ये केलेल्या अणुचाचणीतून जगाला भारताच्या शास्त्रज्ञांच्या सामर्थ्याची जाणीव झाली. त्यानंतर देशाने प्रत्येक प्रकारच्या संकटाचा ज्या समर्थपणे सामना केला, ते पाहून जगही थक्क झाले.
वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के साथ दुनिया ने भारत के वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को महसूस किया। इसके बाद देश ने हर तरह के संकट का जिस मजबूती से मुकाबला किया, उससे दुनिया भी हैरान रह गई। pic.twitter.com/l4FYmAr5Kp
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद आणि के. एम. मुंशी यांच्यासह आपल्या देशात अशी असंख्य महान व्यक्तिमत्वे होऊन गेली, ज्यांनी सोमनाथाच्या सेवेसाठी सर्वस्व अर्पण केले. त्यांचे पुण्यस्मरण आपल्याला प्रेरणा देते की, आपण भारतीयांनी आपला सांस्कृतिक वारसा निरंतर पुढे न्यायचा आहे.
सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और के. एम. मुंशी जी सहित हमारे देश में ऐसी अनगिनत महान विभूतियां हुई हैं, जिन्होंने सोमनाथ की सेवा में सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका पुण्य स्मरण हमें प्रेरणा देता है कि हम भारतवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाना है। pic.twitter.com/8s9pKMU1F0
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
आपली सांस्कृतिक स्थळे हजारो वर्षांपासून भारताची ओळख राहिली आहेत. परंतु दुर्दैवाने देशात आजही असेही लोक आहेत, ज्यांच्यासाठी सोमनाथासारख्या राष्ट्रीय स्वाभिमानाच्या विषयापेक्षा तुष्टीकरण अधिक महत्त्वाचे आहे.
हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसे लोग हैं, जिनके लिए सोमनाथ जैसे राष्ट्रीय स्वाभिमान के विषय से ज्यादा जरूरी तुष्टिकरण है। pic.twitter.com/5nkVL6lWrO
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
मला देशभरातील पवित्र तीर्थक्षेत्रांचा विकास करण्याचे सौभाग्य लाभले आहे आणि पवित्र सोमनाथ परिसर देखील याचेच एक ठळक उदाहरण आहे.
मुझे देशभर के पवित्र तीर्थों के विकास का सौभाग्य मिला है। पवित्र सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। pic.twitter.com/rmJ1aMJL0s
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
75 वर्षांपूर्वी जेव्हा पुनर्बांधणी केलेल्या सोमनाथ मंदिरात प्राणप्रतिष्ठा झाली, तेव्हा भारताने एका नवीन प्रवासाला सुरुवात केली.आज ही वाटचाल अधिक व्यापक स्वरूपात आपल्यासमोर आहे, जी आपल्याला नवीन उंचीवर घेऊन जायची आहे.
75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। pic.twitter.com/446QkWrUfn
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सुषमा काणे/तुषार पवार/प्रिती मालंडकर
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सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है। यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। pic.twitter.com/8Zyqp3CqwN
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वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के साथ दुनिया ने भारत के वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को महसूस किया। इसके बाद देश ने हर तरह के संकट का जिस मजबूती से मुकाबला किया, उससे दुनिया भी हैरान रह गई। pic.twitter.com/l4FYmAr5Kp
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सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और के. एम. मुंशी जी सहित हमारे देश में ऐसी अनगिनत महान विभूतियां हुई हैं, जिन्होंने सोमनाथ की सेवा में सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका पुण्य स्मरण हमें प्रेरणा देता है कि हम भारतवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाना है। pic.twitter.com/8s9pKMU1F0
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हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसे लोग हैं, जिनके लिए सोमनाथ जैसे राष्ट्रीय स्वाभिमान के विषय से ज्यादा जरूरी तुष्टिकरण है। pic.twitter.com/5nkVL6lWrO
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मुझे देशभर के पवित्र तीर्थों के विकास का सौभाग्य मिला है। पवित्र सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। pic.twitter.com/rmJ1aMJL0s
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75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। pic.twitter.com/446QkWrUfn
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