পি এম ইণ্ডিয়া
প্ৰধানমন্ত্ৰী শ্ৰী নৰেন্দ্ৰ মোদীয়ে আজি সোমনাথ অমৃত মহোৎসৱত দিয়া ভাষণৰ আভাস শ্বেয়াৰ কৰি এই কথা উল্লেখ কৰে যে মহোৎসৱ কেৱল অতীতৰ উদযাপন নহয়, বৰঞ্চ আগন্তুক এহাজাৰ বছৰৰ বাবে ভাৰতৰ বাবে প্ৰেৰণাৰ উৎসৱো।
এক্সৰ এলানি পোষ্টত প্ৰধানমন্ত্ৰীয়ে লিখে-
“সোমনাথ অমৃত মহোৎসৱ কেৱল অতীতৰ উদযাপন নহয়। ই অনাগত হাজাৰ বছৰৰ বাবে ভাৰতৰ প্ৰেৰণাৰো উদযাপন।”
“১৯৯৮ চনত পোখৰাণত হোৱা পাৰমাণৱিক পৰীক্ষাৰ লগে লগে বিশ্বই ভাৰতীয় বিজ্ঞানীসকলৰ শক্তি উপলব্ধি কৰিলে। পৰৱৰ্তী সময়ত দেশখনে যি শক্তিৰে প্ৰতিটো সংকটৰ সন্মুখীন হ’ল, সেই শক্তিয়ে বিশ্বক আচৰিত কৰি তুলিলে।”
“আমাৰ দেশত অগণন মহান ব্যক্তিত্ব আছে, য’ত আছে চৰ্দাৰ পেটেল, ড° ৰাজেন্দ্ৰ প্ৰসাদ, কে.এম. মুন্সী, যিয়ে নিজৰ জীৱনটো সোমনাথৰ সেৱাত উৎসৰ্গা কৰিছিল। তেওঁলোকৰ স্মৃতিয়ে আমাক ভাৰতীয়সকলক আমাৰ সাংস্কৃতিক ঐতিহ্যৰ প্ৰচাৰ অব্যাহত ৰাখিবলৈ অনুপ্ৰাণিত কৰে।”
“আমাৰ সাংস্কৃতিক স্থানসমূহ হাজাৰ হাজাৰ বছৰ ধৰি ভাৰতৰ চিনাকি। কিন্তু দুৰ্ভাগ্যজনকভাৱে দেশত এতিয়াও এনে লোক আছে যাৰ বাবে সোমনাথৰ দৰে জাতীয় গৌৰৱৰ বিষয়তকৈ তুষ্টিকৰণ অধিক গুৰুত্বপূৰ্ণ।”
“দেশজুৰি পবিত্ৰ তীৰ্থস্থান গঢ়ি তোলাৰ সৌভাগ্য মোৰ হৈছে। পবিত্ৰ সোমনাথ কমপ্লেক্স ইয়াৰ এক শক্তিশালী উদাহৰণ।”
“৭৫ বছৰ আগতে যেতিয়া সংস্কাৰ কৰা সোমনাথ মন্দিৰটো পবিত্ৰ কৰা হৈছিল, তেতিয়া ভাৰতে এক নতুন যাত্ৰা আৰম্ভ কৰিছিল। আজি এই যাত্ৰা আমাৰ সন্মুখত অধিক ব্যাপক ৰূপত আছে, যিটো আমি নতুন উচ্চতালৈ লৈ যাব লাগিব।”
75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। pic.twitter.com/446QkWrUfn
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
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सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है। यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। pic.twitter.com/8Zyqp3CqwN
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वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के साथ दुनिया ने भारत के वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को महसूस किया। इसके बाद देश ने हर तरह के संकट का जिस मजबूती से मुकाबला किया, उससे दुनिया भी हैरान रह गई। pic.twitter.com/l4FYmAr5Kp
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सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और के. एम. मुंशी जी सहित हमारे देश में ऐसी अनगिनत महान विभूतियां हुई हैं, जिन्होंने सोमनाथ की सेवा में सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका पुण्य स्मरण हमें प्रेरणा देता है कि हम भारतवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाना है। pic.twitter.com/8s9pKMU1F0
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हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसे लोग हैं, जिनके लिए सोमनाथ जैसे राष्ट्रीय स्वाभिमान के विषय से ज्यादा जरूरी तुष्टिकरण है। pic.twitter.com/5nkVL6lWrO
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मुझे देशभर के पवित्र तीर्थों के विकास का सौभाग्य मिला है। पवित्र सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। pic.twitter.com/rmJ1aMJL0s
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75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। pic.twitter.com/446QkWrUfn
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